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छिंग हाई के तिब्बती सांस्कृतिक भवन का दौरा
2011-11-07 09:38:19

सदियों से तिब्बती जाति के लोग विश्व की छत कहलाने वाले तिब्बती पठार पर निवास कर रहे हैं। पुरातत्वों के विश्लेषण से पता चला है कि, लगभग 4000 साल पहले से तिब्बती लोगों के पूर्वज इस भूमि पर बस गए थे। प्राचीन काल से ही, इस बर्फीले पठार पर निवास करने वाली तिब्बती जाति के पूर्वजों ने यहाँ पर अपनी विशेषताओं से परिपूर्ण सांस्कृतिक विरासतों का निर्माण किया। इन विरासतों में यहाँ के नृत्य, संगीत, नाटक, ललित कला, रीति-रिवाज व प्रथाएं आदि शामिल हैं। पिछले कुछ सालों से, चीन सरकार के समर्थन व सहयोग से, पुरातन तिब्बती जाति की संस्कृति सूचना क्रांति के दौर में फिर से जवान हो गई है। और इसके प्रचार-प्रसार और विकास में भी काफी बढोत्तरी हुई है। आज के इस कार्यक्रम में हमलोग एक साथ तिब्बती सांस्कृतिक भवन का दौरा करेंगे।

यह सांस्कृतिक भवन छिंग हाई प्रांत के तिब्बती बौद्ध धर्म मंदिर थाअर मठ के पास स्थित है। थाअर मठ तिब्बती बौद्ध धर्म के गलुग संप्रदाय के संस्थापक सोंगपा का जन्मस्थान है। इस सांस्कृतिक भवन के प्रांगण में प्रवेश करने पर ऐसा लगता है जैसे आप किसी बड़े पर्दे वाले सिनेमा हॉल में फिल्म छिंगहाई -तिब्बत पठार का आँखों देखा हाल देख रहे हों। वहीं पर इस सांस्कृतिक भवन के मुख्य इंजीनियर यी च्री कांग ने परिचय देते हुए कहाः

"तिब्बती सांस्कृतिक भवन के नंबर एक मंडप में तिब्बती जाति के इतिहास के बारे में चर्चा होती है, इसलिए इसे बर्फीली पठारी सभ्यता की यात्रा के नाम से पुकारते हैं। इस मंडप में दो मंजिल है, पहली मंजिल पर यहाँ के इतिहास के बारे तो दूसरी मंजिल पर तिब्बती जाति की विभिन्न कलाओं के बारे में जानकारी दी गयी है। नंबर दो मंडप में तिब्बती बौद्ध धर्म के जीवन-मृत्यु और ब्रह्मांड से संबंधित विचारों का प्रदर्शन किया गया है। इस पूरे प्रदर्शनी भवन में बौद्ध धर्म की सामग्री और रचनाएं दोनों अद्वितीय हैं। अगर सामग्री की बात करें तो यहाँ पर शैक्षिक और भावनात्मक तथा विज्ञान तकनीक और संस्कृति का मिश्रण है। एक और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि, एक सांस्कृतिक भवन जीवंत लगना चाहिए, ऐसा होना चाहिए जैसा इसमें हमेशा किसी प्रकार की आत्मा बसी हुई है।"

छिंग हाई तिब्बती सांस्कृतिक भवन की शैली अद्भुत है। यहाँ की निर्माण शैली बहुत ही सरल और भव्य है, जिसने तिब्बती जाति की परंपरागत निर्माण शैली को बरकरार रखा है साथ ही तिब्बती जाति की शैली और आधुनिकता का भी संगम है। सांस्कृतिक भवन छिंग हाई के पवित्र थाअर मठ के निकट स्थित है। थाअर मठ तिब्बती जाति की संस्कृति का निचोड़ है। दोनों इस तरह एक दूसरे को शोभा देते हैं कि लगता है कि जैसे तिब्बती संस्कृति का यहीं पर जन्म और प्रसार हुआ हो।

छिंगहाई तिब्बती सांस्कृतिक भवन के दो मुख्य कार्यकर्ता यांग चिए युंग और यी ची कांग का मिलन यहाँ संयोग से ही हुआ था। उन दोनों ने इस जगह पर लगभग दस साल साथ-साथ बिताये हैं। इस सांस्कृतिक भवन के डिजाइन और निर्माण शैली में यी ची कांग के साहित्य और दर्शन की झलक दिख सकती है। इस सांस्कृतिक भवन की निर्माण शैली के मुख्य कर्मचारी और भवन के डायरेक्टर यी ची कांग ने भवन के बारे में परिचय देते हुए कहाः

"हमारा यह सांस्कृतिक भवन निजी निवेश से निर्मित है। हम आशा करते हैं कि यहाँ एक आधारभूत संस्कृति हो या यों कहें कि इसका सांस्कृतिक परिवेश मानवी संस्कृति का है, विशेष कर वह चीनी राष्ट्र की बहुरूपी संस्कृति का एक अंग है और इसकी मदद से यहाँ के इतिहास, धर्म, कला, रीति-रिवाज आदि के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह की समायोजित संस्कृति, आधुनिक तकनिक के सहारे आधुनिक युग के लोगों को दिखायी जाती है, जो आसानी से स्वीकार्य होती है।"

यह सांस्कृतिक भवन मानवीय दृष्टिकोण से तिब्बती संस्कृति की व्याख्या करने की कोशिश कर रहा है। यह चीनी राष्ट्र की बहुमुखी संस्कृति का एक भाग है तथा मानवीय विविध संस्कृतियों का एक टुकड़ा है। श्री यांग चिए युंग इस सांस्कृतिक भवन के मुख्य निवेशक हैं। उन्होंने कहाः

"मुझे यहाँ की स्थानीय संस्कृति बहुत पसंद है। बहुत सारे सांस्कृतिक नेताओं और दोस्तों के प्रोत्साहन से मैं ने इस सांस्कृतिक भवन का निर्माण करवाया है। आशा करता हूँ कि, यह सांस्कृतिक भवन पूरी तरह से यहाँ की संस्कृति को उजागर कर सकेगा। विभिन्न विभागों और अधिकारियों के समर्थन ने ही मुझे इस सांस्कृतिक भवन में निवेश के लिए हौसला प्रदान किया।"

आज, पर्यटकों को इस भवन के अंदर पग-पग पर जो चीज देखने को मिलती है, वह कमल के फूल की भांति आकर्षक होती है। हर चीज को देखने के बाद उनकी आँखें आश्चर्य से खुली रह जाती हैं।

जैसा कि तिब्बती पारंपरिक चित्र कला यानी थांगखा चित्र मंडप में थांगखा चित्र कला के वर्गीकरण और चित्रकारी का वर्णन मिलता है। एक थांगखा चित्र में थांग राजवंश की राजकुमारी वनछङ और तत्कालीन तिब्बती राजा सोंगत्सानकांबू की शादी की कहानी वर्णित है, जिस से हान जाति और तिब्बती जाति के बीच प्राचीन काल में सांस्कृतिक आवाजाही की झलक मिलती है। बुद्ध मूर्ति मंडप में मोमबत्तियों की धीमी रोशनी में भगवान बुद्ध, बोधिसत्वों, वज्रधरों और दुर्गा की मूर्तियां पंक्तिबद्ध रखी गयी हैं जो पवित्र और रहस्य का वातावरण प्रदान कर देती हैं।

वर्तमान में, यह सांस्कृतिक भवन चीन का ऐसी पहला भवन है जिसने आधुनिक तकनीकों और बहु मीडिया का उपयोग कर चतुर्मुखी तौर पर तिब्बती जाति के इतिहास, संस्कृति आदि को प्रदर्शित करता है। इसने लोगों के सामने तिब्बत के रहस्यमयी पठार पर तिब्बती जाति की संस्कृति के निरंतर विकास का प्रदर्शन किया है। सांस्कृतिक भवन के डायरेक्टर यी ची कांग ने कहाः

"भवन की जगह और दीवारों के डिजाइन व निर्माण में हमारी अपेक्षा बहुत ऊंची थी। हमारी कोशिश थी कि हरेक दीवारों और पट्टी की शैली एक जैसी होगी और अलग विशेषता से परिपूर्ण भी होगी। दीवारों की रचना के बारे में कह सकते हैं कि, हमने किसी मानक पद्धति वाली प्रदर्शनी चार्टों का प्रयोग नहीं किया है बल्कि सभी एक दूसरे से भिन्न हैं। सभी प्रदर्शनी चार्ट का निर्माण मेरे नेतृत्व में संपन्न किया गया है। इसमें समग्र भाव के त्रिआयामी प्रदर्शन पर जोर दिया गया है। आप इसे दो शब्दों में व्यक्त कर सकते हैं---जीवन और आत्मा।"

हम अगर इस सांस्कृतिक भवन की दूसरे किसी संग्रहालय से तुलना करें तो इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्रदर्शनी से झलकती है। शुरू से लेकर अंत तक एक ही थीम—जीवन है। जीवन किसी भी संस्कृति की आंतरिक पहचान होती है। जीवन की महत्ता जन्म और मृत्यु के रहस्य की खोज में छिपी होती है। यहाँ के सांस्कृतिक भवन में छिंगहाई-तिब्बत के पठारी भाग के उद्गम से लेकर विकसित होने की प्रक्रिया मौजूद है। इसमें यालुंग नदी घाटी में तिब्बती जाति की उत्पत्ति, फिर बर्फीले पठार पर इस सभ्यता की पहुंच व विकास के बारे में प्रदर्शनी ने तिब्बती जाति के जीवन के प्रति खोज को बहुत ही बारीकी से प्रदर्शित किया है। इसे तिब्बती जातीय संस्कृति का विश्वकोष भी कहा जा सकता है।

अगर इस सांस्कृतिक भवन का सबसे महत्वपूर्ण भाग जीवन की प्रदर्शनी है तो सबसे बड़ा आकर्षक भाग उच्च तकनीक के द्वारा इसकी दिखावट है। यहाँ पर दीवारों, फर्श पर तरह-तरह के प्रोजेक्शन में उच्च तकनीक की कौशलता को आसानी से देखा जा सकता है। बहुत सारे पर्यटक और विद्वान इस भवन का दौरा करने के बाद इसकी प्रशंसा करते नहीं थकते। क्वांगचोउ शहर के सांस्कृतिक डिजाइन विभाग के महासचिव छन छाव फंग ने कहाः

"छिंगहाई-तिब्बत सांस्कृतिक भवन ने तिब्बत के पवित्र मठ थाअर के संसाधनों का उपयोग कर संस्कृति के प्रचार-प्रसार कर, तिब्बती जाति की संस्कृति के विकास, पर्यटन के विकास और सांस्कृतिक उत्पादनों के लिए एक नया रास्ता खोल दिया है।"

यह सांस्कृतिक भवन लिएन हुआ सान की गोद में शान से खड़ा है। समय बीतने के साथ-साथ अधिकाधिक पर्यटकों, विशेषज्ञों, विद्यार्थियों ने इस जगह का दौरा किया है। सबों ने इसकी प्रशंसा में सिर्फ दो शब्द बोले हैं—अद्भुत और प्रभावित। यह दोनों शब्द हमेशा यहाँ आने वाले लोगों की जबान पर रहता है जिससे इस भवन की विशेषता व श्रेष्ठता का अंदाजा लगाया जा सकता है। यहाँ की संस्कृति विश्व के लोगों को यहाँ की रहस्यमय और रंगबिरंगी व विविधतापूर्ण तिब्बती संस्कृति का परिचय दे रही है।

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