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    द्विभाषी शिक्षा से संपर्क का पुल तैयार
    2015-04-03 16:43:04 cri

    भाषा किसी जाति या संस्कृति का आधार ही नहीं बल्कि लोगों के बीच आपस में घुलने मिलने का एक माध्यम भी है। वर्तमान भूमंडलीकरण के दौर में विभिन्न सभ्यताओं और विभिन्न जातियों के बीच आवाजाही अधिक से अधिक घनिष्ठ हो रही है। विभिन्न देशों में बहुभाषी शिक्षा को ध्यान में रखा जाता है। आज चीन के अल्पसंख्यक जातिय क्षेत्रों के विभिन्न विद्यालयों में छात्र-छात्राएं अपनी जाति की भाषा सीखने के साथ चीनी हान भाषा यानी मैन्डारिन और अंग्रेज़ी जैसी भाषा भी सीख रहे हैं, यह वर्तमान अंतर्राष्ट्रीकरण रूझानों के अनुकूल है। पश्चिमी चीन के छिंगहाई प्रांत के तिब्बती बहुल क्षेत्रों में बच्चे तिब्बती भाषा सीखने के साथ साथ दूसरी भाषा भी सीख रहे हैं जिससे बाह्य विश्व के साथ संपर्क और आदान प्रदान करने की कुंजी भी वो अपने हाथ में रखते हैं।

    छिंगहाई प्रांत के यूशू तिब्बती स्वायत्त प्रिफेक्चर में होंगछी यानी लाल झंडा प्राईमरी स्कूल में पांचवें ग्रेड की तिब्बती भाषा में दस उम्र वाले छात्र छात्राएं गुरु के साथ ऊंची आवाज़ में पाठ्यपुस्तक पढ़ रहे हैं। जिसका विषय अमेरिकी वैज्ञानिक फ़्रेंकलिन द्वारा आकाश में चमकने वाली बिजली के बारे में पता लगाए जाने का है। तिब्बती भाषा सिखाने वाली अध्यापिका खानचो देची ने हमारे संवाददाता से कहा कि हर सप्ताह में इस तरह की छह तिब्बती भाषा की कक्षाएं आयोजित होती हैं। स्कूल में सभी विद्यार्थी चाहे तिब्बती हों या हान जाति के, पहले ग्रेड से ही तिब्बती भाषा सीखने लगता है। छोटी उम्र के इन छात्र-छात्राओं के लिए तिब्बती भाषा सीखना आसान बात नहीं है। लेकिन सभी विद्यार्थी इसे सीखने में अपनी रुचि दिखाते हैं। अध्यापिका खानचो देची ने कहा:

    "हमारे स्कूल के विद्यार्थियों को तिब्बती भाषा सीखना पसंद है। उनके माता पिता तिब्बती जाति के हैं। स्कूल से घर लौटने के बाद अवकाश के समय वे तिब्बती भाषा वाली पुस्तकों का आनंद भी उठाते हैं।"

    वास्तव में पिछले दस वर्षों में तिब्बती लोगों के लिये औपचारिक स्कूली तिब्बती भाषा शिक्षा लेना अकल्पनीय था। च्याओपा तोंगचू छिंगहाई प्रांत में गेसार संस्कृति का अनुसंधान करने वाले विद्वान हैं। उनका जन्म छिंगहाई प्रांत के हाई नान तिब्बती स्वायत्त प्रिफेक्चर के एक चरवाहे के परिवार में हुआ था। वर्ष 1949 में नए चीन की स्थापना के बाद उन्होंने स्कूल में औपचारिक तिब्बती भाषा में शिक्षा ली और वे हाईनान प्रिफेक्चर में विश्वविद्यालय में दाखिल हुए पहले तिब्बती विद्यार्थी बने। उन्होंने हमारे संवाददाता से कहा कि पुराने जमाने में तिब्बती भाषा से संबंधित शिक्षा मात्र मठों या निजी स्कूलों में अल्पसंख्यक लोगों को दी जाती थी। दूसरे लोगों को आत्म-शिक्षा के माध्याम से अपनी मातृभाषा सीखना पड़ता था। इसकी चर्चा में तिब्बती विद्वान च्याओपा तोंगचू ने कहा:

    "देश की मुक्ति होने के बाद मैं सात आठ वर्ष की उम्र में स्कूल गया था और तभी से तिब्बती भाषा सीखने लगा। मुक्ति के पूर्व तिब्बती क्षेत्र में सभी स्कूल मठ के स्कूल थे, जिनमें सभी लोग दाखिला नहीं ले पाते थे। इस तरह उस जमाने में तिब्बत में 70 से 80 प्रतिशत लोग अनपढ़ थे। कुछ लोग आत्म-शिक्षा के माध्यम से तिब्बती भाषा सीखते थे। कैसे ?वे लोक-कथाओं, लोक-गीतों, पहाड़ी गीतों, गेसार से संबंधित गायन वाचन जैसे तरीके से अपनी मातृभाषा में एक-एक शब्द सीखते थे।"

    विद्वान च्याओपा तुंगचू ने जानकारी देते हुए कहा कि तिब्बती भाषा सीखने के लिये कड़ा व्याकरण सीखना पड़ता है। लेकिन व्याकरण सीखना गुरु के प्रशिक्षण के लिये जरूरी है। तिब्बती कहावत है कि गुरु के बिना शिक्षा प्राप्त करना ठीक वैसे ही है जैसे बिना हाथ वाले व्यक्ति का पर्वत पर चढ़ना। इस तरह तिब्बती भाषा सीखने में आत्म-शिक्षा वाले तरीके और स्कूली शिक्षा के बीच बड़ा फ़र्क है। जिससे इस भाषा को सीखने में स्कूली शिक्षा का महत्व जाहिर हुआ है। वास्तव में स्कूलों में तिब्बती भाषा की कक्षा खोलने से इसे विद्यार्थियों के अभिभावकों का स्वागत भी मिला। होंगछी प्राइमरी स्कूल के द्वार पर हमारे संवाददाता की मुलाकात तिब्बती लड़की छाईयोंग च्वोमा की मां से हुई। तिब्बती मां ने संवाददाता से कहा:

    "स्कूल की कक्षाओं में तिब्बती भाषा के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा दी जाती है। मुझे लगता है कि यह बहुत जरूरी है। हम बुनियादी स्तर पर विद्यार्थियों को शिक्षा देते हैं। वर्णमाला से अक्षरों तक, फिर शब्दों और वाक्यों तक उन्हें पढ़ाते हैं। वे कदम दर कदम प्रगति हासिल करते हैं। यह एक बहुत अच्छा रास्ता है।"

    होंगछी प्राइमरी स्कूल में तिब्बती विद्यार्थियों का अनुपात 98 प्रतिशत है। स्कूल में तिब्बती भाषा के अलावा चीनी हान भाषा यानी मैन्डारिन का प्रयोग भी किया जाता है। हर सप्ताह इन दोनों भाषाओं की छह-छह कक्षाएं दी जाती हैं। गणित, संगीत, ललितकला जैसी दूसरी कक्षाओं में मैन्डारिन का इस्तेमाल करके शिक्षा दी जाती है। शिक्षा देने के इस तरीके को द्विभाषी शिक्षा कहा जाता है। यूशू प्रिफेक्चर तिब्बती बहुल क्षेत्र है, यहां द्विभाषी शिक्षा देने का अर्थ क्या है?होंगछी प्राइमरी स्कूल के प्रधान छाई चानशान के विचार में एक और भाषा सीखने से विद्यार्थी को एक और अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा:

    "हम पठारीय क्षेत्र में रहते हैं। बाहरी दुनिया के साथ संपर्क करने के दौरान अगर तुम्हें एक और अधिक भाषा आता है, तो भविष्य में रोज़गार के लिए अधिक अवसर मिलेगा, यह बाद में स्वयं के जीवन के लिए भी लाभदायक होगा।"

    तिब्बती लड़की छाईयोंग च्वोमा को न सिर्फ़ चीनी हान भाषा आती है, बल्कि ये अंग्रेज़ी बोलने में निपुण है। उसकी मां प्रसन्न है कि बच्ची अधिक भाषा बोल सकती है। च्वोमा की मां ने कहा:

    "मैन्डारिन हो या अंग्रेज़ी, अधिक भाषाएं सीखना उसके लिए अच्छा होगा।"

    वहीं यूशू प्रिफेक्चर के शिक्षा ब्यूरो के उप प्रधान चो मिनपांग के विचार में चीनी हान भाषा यानी मैन्डारिन बाहरी दुनिया के साथ संपर्क रखने, रोज़गार प्राप्त करने और आगे अध्ययन करने का तरीका है। उनका कहना है:

    "स्कूल से स्नातक स्तर की शिक्षा ग्रहण करने के बाद विद्यार्थी बाहर जाएंगे। उन्हें हान भाषा सीखना पड़ता है। यह आधारभूत बात है। अगर तुम्हें चीनी हान भाषा नहीं आती, तो यहां से बाहर जाने के बाद वो कैसे संपर्क कर सकते हैं?इसके साथ ही हान भाषा का प्रयोग करते हुए विद्यार्थी दूसरे पेशेवर कोर्स भी सीख सकेंगे। हमारे देश में दूसरे उच्च स्तरीय कॉलेज़ों में सभी कोर्स तिब्बती भाषा के माध्यम से शिक्षा नहीं दी जाती हैं। कुछ विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के बाद विद्यार्थियों को शुद्ध चीनी भाषा से अपना आगे का अध्ययन जारी रखना पड़ता है। फिर वे जन्मभूमि वापस लौटते हैं।"

    उप प्रधान चो मिनपांग ने जानकारी देते हुए कहा कि वर्ष 2008 के पूर्व यूशू प्रिफेक्चर के स्कूलों में मुख्य तौर पर हान भाषा में शिक्षा दी जाती थी। इससे विद्यार्थियों का हान भाषा का स्तर उन्नत होता गया। लेकिन स्कूल की कक्षाओं में अपनी मातृभाषा तिब्बती भाषा का प्रयोग किया गया। तो तिब्बती भाषा के माध्यम से शिक्षा देने के स्तर को उन्नत करने के लिए प्रिफेक्चर के कुछ स्कूलों में गणित, भौतिकी और रसायन जैसी कक्षाओं में तिब्बती भाषा के माध्यम से शिक्षा दी जाती है।

    "वर्ष 2008 से ही हमने कुछ गांवों और जिले के बुनियादी स्तर के स्कूलों में खासकर गणित की कक्षाओं में तिब्बती भाषा के माध्यम से शिक्षा देना शुरु किया था। इस तरह गणित से संबंधित शिक्षा का स्तर उन्नत हुआ और विद्यार्थी और अच्छी तरह ज्ञान हासिल करने लगे हैं।"

    अब यूशू प्रिफेक्चर में द्विभाषी शिक्षा का अच्छा परिणाम निकला है। तिब्बती बच्चे आसानी से हान और तिब्बती भाषा का प्रयोग कर सकते हैं। तिब्बती लड़की छाईयोंग च्वोमा ने कहा:

    "घर वापस लौटने के बाद माता पिता के साथ बातचीत करते वक्त मैं कुछ समय हान भाषा का प्रयोग करती हूँ और कुछ समय तिब्बती भाषा का। लेकिन मित्रों के साथ बातचीत करते समय तो हान भाषा का इस्तेमाल करती हूँ।"

    तिब्बती लड़की छाईयोंग च्वोमा के बराबर कई तिब्बती बच्चे घर में तिब्बती भाषा का प्रयोग करते हैं और स्कूल में हान भाषा का। यहां तक कि कुछ विद्यार्थी अंग्रेज़ी के माध्यम से आपस में बातचीत करते हैं। अपनी जाति की मातृभाषा को विरासत में लेते हुए उसका विकास करने के साथ ये तिब्बती बच्चों को दूसरी संस्कृति सीखने की कुंजी हाथ लगी है। शायद यही द्विभाषी शिक्षा का अर्थ होता है।

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