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    शी चिनफिंग की मोदी से भेंट
    2014-09-18 20:51:03 cri

    चीनी राष्ट्राध्यक्ष शी चिनफिंग ने 18 सितंबर को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्ता की। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि एक साथ मिलकर और घनिष्ठ साझेदार संबंधों का विकास करेंगे। दोनों देश विकसित अवसर को पकड़ते हुए अपने-अपने विकास के लक्ष्य को संपूर्णता के साथ निभाएंगे, एशिया की शांति, स्थिरता समृद्धि को आगे बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति को ज्यादा न्यायसंगत दिशा में ले जाने के प्रयास करेंगे।

    शी चिनफिंग ने बल देते हुए कहा कि चीन और भारत एक दूसरे के महत्वपूर्ण पड़ोसी देश ही नहीं, बल्कि बड़े विकासशील देश और नवोदित बाज़ार भी हैं। इसके साथ ही दोनों देश बहु-ध्रुवीकरण प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण शक्ति हैं। कहते हैं कि 21वीं सदी एशिया की सदी है। चीन और भारत का विकास इसकी एक कड़ी है। चीन ड्रैगन और भारत हाथी के सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व, शांति, विकास और सहयोग विकास से 2 अरब 50 करोड़ की जनसंख्या को लाभ मिलेगा। साथ ही व्यापक विकासशील देशों को भी इससे लाभ पहुंचेगा और इसी क्षेत्र और संपूर्ण विश्व भर में दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। चीन भारत को स्थाई रणनीतिक सहयोगी साझेदार मानता है। हम भारत के साथ मिलकर और घनिष्ठ साझेदार संबंध स्थापित करना चाहते हैं। इसके लिए हमें द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तरों में सहयोग बढ़ाना चाहिए।

    मोदी ने कहा कि भारत और चीन प्राचीन सभ्यता वाले देश हैं। दोनों देशों की जनसंख्या विश्व की जनसंख्या का एक तिहाई हिस्सा है। भारत-चीन सहयोग, समान विकास न सिर्फ़ दोनों देशों, दोनों देशों की जनता के लिये लाभ पहुंचाने वाला है, बल्कि एशिया और विश्व में शांति, समृद्धि और मानव प्रगति के लिए योगदान देगा। मैं राष्ट्राध्यक्ष शी चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय संबंधों के विकास को आगे बढ़ाने की समान कोशिश करुंगा। भारत को आशा है कि चीन के साथ उच्च स्तर और विभिन्न क्षेत्रों में संपर्क और बातचीत मज़बूत करना चाहता है, ताकि दोनों पक्षों के समान हितों और सहमतियों को ज्यादा से ज्यादा सहयोगी फलों तक बदला जा सके।

    मोदी ने दोहराते हुए कहा कि तिब्बत स्वायत्त प्रदेश चीन लोक गणराज्य की प्रादेशिक भूमि का एक अंक है। भारत तिब्बतियों के भारत में चीन विरोधी कार्रवाई को कतई इजाजत नहीं देता। भारत चीन के साथ सीमा विवाद का अच्छी तरह प्रबंधन करते हुए सीमा मुद्दे से जुड़ी वार्ता को गति देने के समान प्रयास करेगा, ताकि इसके निपटारे में शीघ्र ही संबंधित प्रस्ताव मिल सके। भारत को आशा है कि औषधि और निर्माण उद्योग के उत्पादों के चीन में निर्यात का विस्कार किया जाएगा, द्विपक्षीय व्यापारिक संतुलन को बढ़ाया जाएगा। बिजली और रेल निर्माण के क्षेत्र में भारत चीन की हिस्सेदारी का स्वागत है। इसके साथ ही भारत बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार आर्थिक कॉरिडोर, एशिया बुनियादी संस्थापन के लिए निवेश बैंक के निर्माण में सक्रिय रूप से भाग लेगा, चीन के साथ मानविकी सहयोग मज़बूत करेगा। भारत और चीन को अंतरराष्ट्रीय मामलों में समन्वय और सहयोग मज़बूत करते हुए आतंक विरोधी, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में मौजूद चुनौतियों का समान रूप से सामना करना चाहता है।

    (श्याओ थांग)

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