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वहीं, चीन स्थित अल्जीरियाई राजदूत अल्हासन बुखालिफ़ (Alhassan Bukhalifa) ने कहा कि लाल सेना के लॉन्ग मार्च का इतिहास चीनियों के लिए गर्व की बात है, और यह इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिखा गया है। क्योंकि लॉन्ग मार्च की जीत के परिणाम का असर आज भी देखने को मिलता है और भविष्य में भी देखने को मिलता रहेगा। उन्होंने कहा: "मुझे लगता है कि लॉन्ग मार्च एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है। यह नए चीन की स्थापना का एक आधार है। लॉन्ग मार्च ने समाज के विभिन्न जगत के लोंगों को पुनः गठित किया। यह चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की भी एक जीत है। चीन लोक गणराज्य की स्थापना के बाद से लेकर आज तक हम लॉन्ग मार्च की जीत के परिणाम फिर भी देख सकते हैं। उदाहरण के लिए चीन की अर्थतंत्र, राजनीति और कूटनीति जैसे क्षेत्रों में विकास, मेरे विचार में ये सब लॉन्ग मार्च से शुरु हुए हैं।"
चीन स्थित अज़रबाइजान के राजदूत लातिव गांडिलोव (Latif Gandilov) ने कहा कि लॉन्ग मार्च ने चीनी जनता के सामने मौजूद मुसिबतें जाहिर हुईं, लेकिन इसकी जीत से यह भी जाहिर है कि जनता के एकजुठ होकर समान लक्ष्य की ओर प्रयास करके फतह हासिल की जा सकती है। उन्होंने कहा: "मौजूदा प्रदर्शनी" से मैं उस समय में चीनी जनता की मुसिबतें व पीड़ा को महसूस कर सकता हूं। लॉन्ग मार्च के दौरान चीनी जनता को भूख, ठंडे मौसम, आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। लेकिन चीनी जनता ने अथक प्रयास किया और बहादुरी के साथ संघर्ष किया। अंत में उन्हें जीत प्राप्त हुई। इससे जाहिर होता है कि जनता के समान लक्ष्य के लिए एक ही विचार के मार्गदर्शन के तले प्रयास करना अपराजेय है।"
गांडिलोव ने यह भी कहा कि लॉन्ग मार्च की भावना चीन पर लम्बे समय तक असर रहेगी। वर्तमान में चीनी लोग चीन-स्वप्न को बखुबी अंजाम देने के लिए तैयार हैं, जिसमें लॉन्ग मार्च की भावना का मूल भी शामिल है। चीन के स्वप्न की प्राप्ति के लिए लॉन्ग मार्च की भावना के मार्गदर्शन से अलग नहीं किया जा सकता।
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