
तिब्बती पंचांग के नए साल के पूर्व दो दिनों से ही हर परिवार में सफ़ाई का काम खूब किया जाता है। आटे से घर की दीवारों पर शुभकामना शब्द लिखे जाते हैं। नए साल की पूर्व रात को परिवार के सभी सदस्य एकत्र होकर रात्रि भोज करते हैं। इसके साथ ही हर परिवार में तिब्बती बौद्ध धर्म के बुद्ध-मूर्ति के सामने विभिन्न प्रकार के खाद्य-पदार्थ रखे जाते हैं। त्यौहार में नए वस्त्र तैयार किया जाता है। नए साल के पहले दिन तड़के, महिला जौ का गर्म मदिरा बनाकर परिवार के सदस्यों के पलंग के सामने लाती हैं, इसे पीकर तिब्बती लोग उठते हैं और नये साल की खुशियां मनाना शुरू करते हैं।
तिब्बती परम्परा के अनुसार, नए साल के पहले दिन परिवार की महिला सबसे पहले उठती है, वह कुएं में पहले पीपे का पानी लाती हैं। पालतू पशुओं को खिलाने के बाद परिवार के अन्य सदस्यों को उठाती है। सब लोग नए साल के लिए खूबसूरत नए वस्त्र पहनते हैं। नाश्ते के वक्त परिवार के बूढ़े लोग"जूसू छिमा"टोकरे में से खाद्य-पदार्थ को आसमान में फेंकते हैं, जिसका उद्देश्य देवी-देवताओं का सम्मान करना है । इसके बाद वे"जूसू छिमा"टोकरे के खाद्य-पदार्थ खाते हैं। परिवार के बुढ़े लोग युवाओं से"जाशी देले"यानी नमस्कार कहते हैं, और युवा लोग उन्हें शुभकामनाएं देते हैं कि वे स्वस्थ रहे और सुखमय रहे, आशा करते हैं कि अगले नए साल में परिवार के सदस्य इसी तरह एक साथ भी खिशियां मनाएंगे। ऐसी रस्म के बाद परिवार के सदस्य एक दूसरे के सम्मान में जौ का मदिरा पीते हैं। तिब्बती परम्परा के अनुसार, नए साल के पहले दिन परिवार का समय है, जिसमें रेश्तेदारों व दोस्तों के बीच आवाजाही नहीं होती है । नए साल के दूसरे दिन से ही मित्रों व रिश्तेदारों एक दूसरे के घर आते जाते हैं, नए साल की शुभकामनाएं देते हैं, यह गतिविधि तीन या पांच दिन तक चलती है।





