
पांच साल पहले च्यामा टाऊनशिप में आयी ह्वाथाईलुंग कम्पनी ने अनेक स्थानीय लघु उपक्रमों को खरीदकर सुव्यवस्थित कर दिया और स्थानीय वातावरण संरक्षण और ऊर्जा किफायत व कम उत्सर्जन की धारणा को कम्पनी के विकास की प्रधानता पर रख दिया । थंग युंग छिंग ने इस का परिचय देते हुए कहा:"ह्वाथाइलुंग समूह एक ऐसा उपक्रम है, जिस की 8 परियोजनाएं समूचे देश में या व्यवसाय में प्रथम स्थान पर हैं, पारिस्थितिकी वातावरण संरक्षण परियोजना उन में से एक है, इस पारिस्थितिकी वातावरण संरक्षण परियोजना के निर्माण में जो 11.7 प्रतिशत की धन राशि लगायी गयी है, वह तीन प्रतिशत से कम न होने देने के राष्ट्रीय मापदंड से कहीं अधिक है, जो अल्पसंख्यक जातीय क्षेत्रों के खनन उद्योग के विकास में अग्रसर है। इस के अलावा हमने कुओं के नीचे 5.5 किलोमीटर लम्बा भूमिगत परिवहन मार्ग भी निर्मित किया, ताकि सथलीय परिवहन से उत्पन्न धुल आदि कूड़े कुर्कटों से संवेदनशील पारिस्थितिकी वातावरण को प्रदूषित किये जाने से बच जाये। अब पानी की चक्रिय प्रयोग दर 94 प्रतिशत से अधिक है। इतने बड़े कारखाने में धुआं निकलने वाली कोई भी चिमनी देखने को नहीं मिलती और न एक बूंद का दूषित पानी बाहर निकलता, साथ ही हम ने दस हजार वर्गमीटर विशाल सौर ताप परियोजना भी निर्मित की।"
इधर सालों में ह्वाथाइलुंग कम्पनी ने खान क्षेत्र में पानी के चक्रिय प्रयोग, वृक्षारोपण और भूमि संरक्षण आदि वातावरण संरक्षण परियोजनाओं में कुल मिलाकर 18 करोड़ य्वान की पूंजी लगायी है। इस के अलावा ह्वाथाइलुंग कम्पनी ने स्थानीय वासियों के साथ समान रुप से खुशहाल बनाने का दायित्व भी निभा दिया। ह्वाथाइलुंग कम्पनी के जनरल मैनेजर थंग युंग छिंग ने हमारे संवाददाता के साथ बातचीत में कहा:"यदि उपक्रम तिब्बत में उद्योग का विकास करने पर पारिस्थितिकी वातावरण संरक्षण पर जोर नहीं देगा, तो वह यहां पर अपना स्थान बनाने में कामयाब नहीं होगा, जातीय सामंजस्य को महत्व दिये बिना अस्तित्व रहने का आधार भी नहीं है ।"
पुल बांधने, मार्गों की मरम्मत करने, शिक्षा में चंदा देने, जलसंरक्षण परियोजना करने और स्थानीय वासियों को रोजगार दिलाने आदि सिलसिलेवार रियायती कदम उठाये जाने से आसपास के किसानों व चरवाहों की आय में वृद्धि हुई ही नहीं, बल्कि खान क्षेत्र का पारिस्थितिकी वातावरण भी सुधर गया है, स्थानीय वासियों का खान खुदाई पर रुख भी कदम ब कदम बदल गया है। चालू वर्ष में 29 वर्षीय तिब्बती युवा लुरुंगलीशिन ह्वाथाइलुंग कम्पनी में अनुवादक और समन्वय का काम संभालता है, स्थानीय वासियों के रुख में आये बदलाव का उल्लेख करते ही भावविभोर हो गया। उस ने कहा:"तत्काल में सचमुच विविधतापूर्ण दिक्कतें हुईं, स्थानीय वासियों के विचार में यह कम्पनी स्थानीय वासियों की भलाई के बजाये पैसे कमाने के लिये यहां आयी है, इसलिये उन्होंने शुरु में कम्पनी में कार्यरत कर्मचारियों को गाली दी और पिटाई भी की। उन्हें मालूम नहीं है कि इस सरकारी उपक्रम ने स्थानीय वासियों को इतना ज्यादा लाभ पहुंचाया और इतने सुव्यवस्थित रुप से वातावरण का संरक्षण बनाये रखा। अब कम्पनी का विरोध करने वाली आवाज सुनने को नहीं मिली है, अब वे सब के सब ह्वाथाइलुंग कम्पनी का प्रशंसक बन गये हैं और इस कम्पनी के आभारी भी हैं।"















