इस गांव के बसने की कहानी भी इस ओपल माइंस से ही जुड़ी है. हुआ यूं कि जो लोग यहां खदानों में काम करते थे, उन्हें वहां के तापमान के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था. कूबर पेडी एक रेतीला स्थान है इसलिए यहां पर गर्मियों में तापमान बहुत ज्यादा हो जाता है और सर्दियों में तापमान में काफी गिरावट देखने को मिलता है. इसी वजह से यहां पर रहने वाले और काम करने वाले लोगों को काफी परेशानी होती थी.
अंतत: लोगों ने मिलकर यह निश्चय किया कि माइनिंग के बाद जो खदानें खाली बची रह जाती हैं, उनका इस्तेमाल बतौर घर किया जाए. इसके पश्चात् 1915 में लोगों ने गुफाओं को काटकर घरों का निर्माण किया और उन अंडरग्राउंड घरों में रहना शुरू कर दिया.
करीबन 3500 लोगों की आबादी वाले इस शहर के 60 प्रतिशत लोग जमीन के अंदर ही रहते हैं. सौ साल पुराने इस शहर का नाम भी इन अंडरग्राउड घरों के आधार पर ही है. कूबर पेडी का नाम प्राचीन कुपा पिती से पड़ा है, जिसका मतलब सफेद लोगों का गड्ढा है. वैसे यह घर बाहर से देखने में भले ही सामान्य लगे लेकिन वास्तव में यह घर पूरी तरह से फर्निश्ड और सारी सुख-सुविधाओं से लैस हैं.
इतना ही नहीं, यहां पर केवल घर ही नहीं, बल्कि होटल, गोल्फ कोर्स, चर्च, म्यूजियम, दुकानें, कैसिनो और पब आदि भी हैं. इसके अतिरिक्त जमीन के नीचे घर होने के कारण यहां पर तापमान वातावरण के अनुकूल होता है.
इसलिए यहां पर न तो गर्मियों में एसी की आवश्यकता होती है और न ही सर्दियों में हीटर की. वैसे इन घरों को बनाते समय सामान्य घर की हर जरूरत को ध्यान में रखा गया है.
सभी कमरों में वर्टिकल शॉफ्ट की मदद से वेंटिलेशन और तापमान पर नियत्रंण रखा जाता है. साथ ही इन्हें आम घरों की शक्ल देने के लिए नकली खिड़कियां भी बनाई गई हैं, जिससे यह देखने में एकदम सामान्य लगे.
अगर आप जीवन में कुछ अलग देखने की चाह रखते हैं तो एक बार इन अंडरग्राउड घरों को अवश्य देखें. यकीनन आपको एक अदभुत अनुभव की अनुभूति होगी.
लिली- दोस्तों, यह था हमारा संडे स्पेशल। चलिए... दोस्तों, अभी हम चलते हैं अजीबोगरीब और चटपटी बातों की तरफ।









