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    तिब्बत में किसानों, चरवाहों को मिला रोज़गार, केन्द्र ने की सहायता
    2015-02-28 15:02:37 cri

    तिब्बत में ह्वाशिन सीमेंट ग्रुप का कारखाना

    तिब्बत में ह्वाशिन सीमेंट ग्रुप का कारखाना

    तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में लगातार हो रहे आर्थिक और सामाजिक विकास के चलते अधिक से अधिक किसान और चरवाहे जौ उगाने और गाय-भेंड़ पालने यानी कृषि और पशुपालन के काम से मुक्ति पाकर दूसरे तरीकों से विभिन्न प्रकार के रोज़गार में हिस्सा ले रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है।

    तिब्बत की सहायता के लिये चीन के भीतरी क्षेत्र में 17 प्रांत और शहर रोज़गार प्रशिक्षण देने, औद्योगिक उत्पादन का अवसर देने, कृषि और पशुपालन उत्पादन में सहयोग करने जैसे तरीकों से तिब्बती किसानों और चरवाहों की मदद कर रहे हैं। इस योजना से अभी तक कई फलदायी उपलब्धियां प्राप्त हुई हैं।

    वांगच्यु ल्हासा शहर की मोचूकोंगखा कांउटी के च्यामा जिले स्थित लोंगदा गांव में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की ग्रामीण शाखा समिति के सचिव हैं। तिब्बत की सहायता के लिए स्थानीय कर्मचारियों ने भीतरी क्षेत्र में प्रशिक्षण योजना के तहत वे पूर्वी चीन के शानतुंग प्रांत की राजधानी चिनान और च्यांगसू प्रांत की राजधानी नानचिंग का निरीक्षण दौरा किया था। उन्होंने इन क्षेत्रों में नए-गांवों के निर्माण और ग्रामीण उद्योग प्रबंधन संबंधी स्थिति को देखा और संबंधित जानकारी ली। वांगच्यु ने कहा कि इन दोनों शहरों के गांवों में समुन्नत प्रबंधन अनुभव सीखते हुए उन्हें स्वयं की व्यवस्था में कमियों की जानकारी मिली। इसके बाद उनके मन में स्थानीय ग्रामीण बाज़ार से जुड़े विचार पैदा हुए।

    वर्ष 2007 के बाद से अब तक वांगच्यु ने गांव में रेत-पत्थर के कारखाने और चूने के कारखाने की स्थापना की, जिससे 20 से अधिक गांववासियों को रोज़गार मिला। रेत-पत्थर के कारखाने में काम करने वाले मज़दूरों के रहने और खाने पीने की व्यवस्था नि:शुल्क की गयी है। प्रति महीने वे कम से कम 3 हज़ार युआन कमाते हैं। इसके साथ ही साल के अंत में गांववासी कारखाने को मिले मुनाफ़े का हिस्सा भी पाते हैं।

    वांगच्यु के अनुसार वर्ष 2007 से वर्ष 2013 तक गांव वासियों की सालाना औसतन आय 2700 युआन से बढ़कर 4800 युआन तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि पहले गांववासी कम धन कमाते थे, जौ उगाने के अलावा वे कोई दूसरा काम नहीं करते थे। यहां तक कि कुछ गांववासियों को राजधानी ल्हासा जाने के बाद भी कोई अच्छी नौकरी नहीं मिल पाती थी। लेकिन कारखाने स्थापित करने के बाद गांववासी अधिक आय प्राप्त करते हैं और उनके जीवन में भी सुधार आया है। वांगच्यु के अनुसार अब रेत-पत्थर कारखाने की सालाना आय करीब 20 लाख युआन हो चुकी है। उन्हें कारखाने के भविष्य में होने वाले विकास पर विश्वास है। संबंधित विकास योजना की चर्चा करते हुए वांगच्यु ने कहा:

    "भविष्य में रेत-पत्थर संसाधन खत्म होने के बाद यहां पर खाली स्थान सामने आएगा। जहां हम ग्रीन हाउस बनाकर सब्ज़ियां उगाएंगे। वर्तमान में हम हरेक वर्ष रेत-पत्थर कारखाने द्वारा प्राप्त मुनाफ़े से 1 लाख युआन निकाल कर बैंक में जमा कराते हैं, अभी तक हम कुल 4 लाख युआन बचा चुके हैं। 3 या 4 वर्षों में ग्रीन हाउस बनाने के लिए हमारे पास पर्याप्त धन राशि होगी। योजना है कि यहां 200 से अधिक ग्रीन हाउस की स्थापना की जाएगी। फिर गांव में युवाओं को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। हम सब्ज़ियां उगाने संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिये कुछ पेशेवर तकनीशियनों को आमंत्रित करेंगे। विश्वास है कि भविष्य में अधिक से अधिक गांववासी सब्ज़ियां उगाने में सक्षम होंगे और उनका जीवन स्तर और बेहतर होगा। ऐसा मेरा विचार है।"

    मध्य चीन के हूपेई प्रांत के ह्वाशिन सीमेंट ग्रुप की तिब्बती शाखा कंपनी वर्तमान में तिब्बत की सहायता करने वाली सबसे बड़ी औद्योगिक इकाई है। कंपनी ने तिब्बत में 70 करोड़ युआन का निवेश किया है और स्थानीय किसानों और चरवाहों को अच्छा अवसर प्रदान किया है। वर्तमान में कंपनी के 600 कर्मचारियों में से 2 तिहाई तिब्बती जाति के निवासी हैं। हर वर्ष कंपनी में काम करने वाले नए कर्मचारियों के 80 प्रतिशत लोग स्थानीय तिब्बती बंधु होते हैं।

    कंपनी के मैनेजर नी वेईतुंग ने कहा कि ह्वाशिन कंपनी विभिन्न प्रकार की प्रशिक्षण प्रणाली अपनाती है, स्थानीय तिब्बती किसान और चरवाहे प्रशिक्षण लेने के बाद आधुनिक औद्योगिकी मज़दूर बन सकेंगे। उनका कहना है:

    "शुरू में हमारी कंपनी में तिब्बती कर्मचारियों का शैक्षिक स्तर ऊंचा नहीं था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में संबंधित प्रशिक्षण लेने के बाद उनका औद्योगिकी स्तर उन्नत हुआ है। अब ये तिब्बती मज़दूर पूर्वी चीन में प्रगतिशील समुद्र तटीय क्षेत्रों में स्थित सीमेंट कारखाने में काम कर सकते हैं। कारखाने में वे बहुत मेहनत से काम करते हैं। मेरा विचार है कि तिब्बत की सहायता के लिए सुयोग्य व्यक्तियों को प्रशिक्षण देना महत्वपूर्ण बात है। हमने साधारण तिब्बती किसानों और चरवाहों को प्रशिक्षित कर उन्हें आधुनिक औद्योगिकी मज़बूती दिलाई। अब उनमें से कुछ लोग कार्यशाला के प्रमुख कर्मचारी भी बन चुके हैं।"

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