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(GMT+08:00) 2008-01-22 15:15:05    
चीनी परम्परागत शतरंज वेछी पसंद करने वाले तिब्बती अधिकारी

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दोस्तो, आज के लेख में परिचय दिया जाएगा एक तिब्बती अधिकारी का, जो चीनी परम्परागत शतरंज वेछी पसंद करते हैं। यह हैं हमारे तिब्बती बंधु श्री छी ज़ाला ।

श्री छी ज़ाला चीन के युन्नान प्रांत के दीछींग तिब्बती स्वायत्त प्रिफैक्चर के शीर्ष नेता हैं । तिब्बती बंधु श्री छीज़ाला एक विद्वान हैं, क्योंकि वे पुस्तक पढ़ना, फोटो खींचना पसंद करते हैं और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों के साथ विचारों का आदान-प्रदान पसंद करते हैं, इस के साथ ही उन्हें चीनी परम्परागत शतरंज वेछी खेलना भी पसंद है । वेछी एक किस्म का चीनी परम्परागत शतरंज का खेल है, जो सफेद व काले रंग की गोल गोटियों से खेला जाता है और मुख्य तौर पर चीन, जापान और कोरिया गणराज्य आदि देशों में लोकप्रिय है । कहा जाता है कि इस किस्म के शतरंज खेलने से खिलाड़ियों की रणनीतिक बुद्धि का विकास होता है ।

श्री छी ज़ाला विभिन्न स्त��ीय पत्र-पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित करते रहते हैं और उन की《गोतान सोंगजानलिन मठ की कहानी》、《युन्नान का दिछिंग---शांगरिला का रहस्य》और《विचार व रास्ता》आदि रचनाएं छप चुकी हैं । युन्नान प्रांत के दिछिंग तिब्बती प्रिफैक्चर के शीर्ष नेता के रूप में वे एक सरकारी अधिकारी हैं, लेकिन एक तिब्बती बंधु के नाते वे एक अल्पसंख्यक जातीय अधिकारी भी हैं । श्री छी ज़ाला के बारे में अनेक कहानियां हैं ।

श्री छी ज़ाला का तिब्बती नाम है लहज़ान ज़ाला , जिस का मतलब है कि बौद्धिसत्व के जुड़ा व्यक्ति । करीब आठ सौ वर्ष पूर्व चीन के य्वान राजवंश में छी ज़ाला के पूर्वज आज के युन्नान प्रांत के उत्तर पश्चिमी भाग स्थित तिब्बती बहुल क्षेत्र में अधिकारी थे । यह परिवार स्थानीय तिब्बती जनता में बहुत लोकप्रिय रहा है ।छी जाला की युवावस्था पठार में याकों के साथ गुज़री, उस समय वह एक चरवाहा था ।

घास मैदान में याकों को पालना बहुत अकेलेपन का काम होता है, इसी दौरान श्री छी ज़ाला को सोचने की आदत पड़ी । गत शताब्दी के अस्सी वाले दशक के मध्य से ही युवा छी ज़ाला को गहन रूप से वेछी खेलना पसंद आने लगा । आज दीछींग प्रिफैक्चर के शीर्ष नेता के रूप में वे बहुत व्यस्त हैं , लेकिन वेछी शतरंज खेलना हमेशा से उन का पसंदीदा शौक रहा है । अनेक वर्षों तक वेछी शतरंज खेलना उन के जीवन अनुभवों का एक हिस्सा बन गया है। तिब्बती अधिकारी श्री छी ज़ाला ने कहा:

"मुझे चीनी परम्परागत शतरंज वेछी खेलना बहुत पसंद है । यह शतरंज का खेल खेलने से लोगों को शांति मिलती है ।"

सच है कि वेछी शतरंज खेलने के लिए धैर्य व सोच-विचार चाहिए । अपने आप को वेछी शतरंज के खिलाड़ी कहलाने वाले तिब्बती बंधु छी ज़ाला ने इस खेलकूद की कई रणनीतिक युक्तियों का प्रयोग अपने कार्य में शामिल किया है ।

दोस्तो, आप लोगों जानते होंगे कि विश्वविख्यात पर्यटन स्थल शांगरिला वर्ष 2001 के सत्रह दिसम्बर के पूर्व दिछिंद तिब्बत स्वायत्त प्रिफैक्चर की एक कांउटी---जोंगत्येन कांउटी था, जहां बहुत गरीबी थी । शांगरिला नाम बदलने से ले कर अब तक के कई वर्षों में यह गरीब कांउटी विश्व में सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल बन गयी है, जिस की पर्यटन आय बहुत शानदार है । तो किस ने तत्कालीन गरीब जोंगत्येन कांउटी के प्राकृतिक सौंदर्य में शांगरिला नाम जोड़ा ? इन्हीं तिब्बती अधिकारी छी ज़ाला ने ।

ब्रिटेन के सुप्रसिद्ध लेखक जैम्स हिल्टन द्वारा 1933 में लिखी गई विश्वविख्यात उपन्यास《लॉस्ट होराइज़न》में एक स्वप्न वाले स्थल का वर्णन किया गया है । वह शांगरिला ही है । लोगों को शांगरिला जाने की जिज्ञासा रहती है । लेकिन उन्हें मालूम नहीं है कि वास्तव में शांगरिला कहां है । इस तरह सुन्दर व रहस्यमय शांगरिला की खोज जारी रहती है। संबंधित सामग्रियों से पता चलता है कि शांगरिला चीन के युन्नान प्रांत के उत्तर पश्चिमी भाग यानी दिछिंग प्रिफैक्चर के आसपास है । लेकिन इस कथन को साबित नहीं किया जा सका है । वर्ष 1995 में श्री छी ज़ाला दिछिंग तिब्बत स्वायत्त प्रिफैक्चर की जोंगत्येन कांउटी के शीर्ष नेता थे, उन्होंने सोचा कि अगर शांगरिला को जोंगच्येन में होने को निश्चित किया जाए, तो सुन्दर जोंगत्येन विश्व के सामने आ खड़ा होगा ।

दोस्तो, हमारे पिछले कार्यक्रम में आप ने दिछिंग तिब्बती प्रिफैक्चर के एक और नेता श्री कसांग तुनचू की कहानी सुनी । शायद आप को याद होगा कि श्री कसांगतुनचू ने शांगरिला की खोज में भी भारी कोशिश की थी और अंत में चोंगत्येन को शांगरिला निश्चित करने में योगदान भी दिया।

लेकिन आज के इस कार्यक्रम में आप को परिचय दिया जा रहा है इसी क्षेत्र में तिब्बती अधिकारी श्री छी ज़ाला की कोशिश का ।

जोंगत्येन कांउटी सचमुच शांगरिला है या नहीं ? इस का निरीक्षण जारी है । श्री छी ज़ाला ने संबंधित जांच कार्य के समर्थन के लिए विशेष तौर पर 36 लाख य्वान का अनुदान किया । अंत में विभिन्न पक्षों के विशेषज्ञों व विद्वानों ने इस बात की पुष्टि की कि जोंगत्येन कांउटी का प्राकृतिक सौंदर्य और रीति रिवाज़ मशहूर उपन्यास《लॉस्ट होराइजन》में वर्णन किए गए शांगरिला के बराबर है । इस के बाद, रहस्यमय शांगरिला युन्नान प्रांत के दिछिंग प्रिफैक्चर के जोंगत्येन कांउटी में होने की खबर फैल गयी । चीन सरकार ने वर्ष 2001 में औपचारिक तौर पर जोंगत्येन कांउटी के नाम को शांगरिला कांउटी में बदल दिया । श्री छी ज़ाला इधर उधर की यात्रा करते हैं, किसी भी जगह जाने के बाद वे अवश्य ही सुन्दर शांगरिला का परिचय देते हैं । उन का कहना है:

"शांगरिला के प्राकृतिक दृश्य बहुत सुन्दर हैं । इस के साथ ही यहां की जातीय संस्कृति का इतिहास भी बहुत पुराना है । 200 किलोमीटर की दूरी में पांच हज़ार मीटर की ऊंचाई वाले दृश्य देखे जा सकते हैं । यह बहुत असाधाराण है ।"

दोस्तो, अगर आप शांगरिला की यात्रा करें, तो वहां का अमन चैन, शांति व सामंजस्य आप को प्रभावित करेगा । शांगरिला के सौंदर्य को लेकर तिब्बती बंधु छीज़ाला का अपना अनुभव है । उन्होंने कहा:

"शांगरिला का सौंदर्य मानव और प्रकृति के बीच सामंजस्य तथा मानव के बीच सामंजस्य में दिखायी पड़ता है ।"

वर्ष 1998 के पूर्व शांगरिला काउंटी यहां तक कि सारे दिछिंग प्रिफैक्चर की प्रमुख वित्तीय आय वनों की लकड़ियों की कटाई से आती थी । क्योंकि यहां प्रचूर जंगल व वनस्पतियां हैं । लेकिन वर्ष 1998 में चीन की यांग्त्सी नदी में आई भीषण बाढ़ से नदी के तटीय क्षेत्रों को भारी नुक्सान पहुंचा। इस तरह इस वर्ष से श्री छी ज़ाला ने सुझाव दिया कि दिछिंग क्षेत्र में सर्वांगीण तौर पर लकड़ी की कटाई और जानवरों के शिकार की मनाही कर दी गई। इस नीति से स्थानीय आय में कमी आयी है। लकड़ी की कटाई पर निर्भर लोग चिंतित हुए । लेकिन थोड़े समय के बाद लोगों की चिंता दूर कर दी गयी । पारिस्थितिकी पर्यावरण से मुनाफ़ा धीरे-धीरे पैदा होने लगा । दिछिंग के सुन्दर प्राकृतिक दृश्यों ने ज्यादा से ज्यादा देशी-विदेशी पर्यटकों को आकृष्ट किया । यहां तक कि अनेक लोगों ने दिछिंग में चिरस्थाई तौर पर बसने का फैसला कर लिया । इस तरह शांगरिला की पर्यटन आय तेज़ी से बढ़ रही है । लकड़ी कटाई की मनाही के बाद से लेकर उस की वित्तीय आय दो गुना बढ़ गई है ।

श्री छी ज़ाला ने कहा कि वे पर्यावरण संरक्षण वाली विचारधारा पर हमेशा डटे रहेंगे । भविष्य के विकास में इसे शामिल किया जाएगा । उन्होंने कहा:

"हमारे देश के पश्चिमी क्षेत्रों को संसाधन खपत वाले रास्ते पर नहीं चलना चाहिए । पारिस्थितिकी के कारगर संरक्षण से व्यवसायों का जोरदार विकास हो सकेगा ।"

दिछिंग तिब्बती प्रिफैक्चर और शांगरिला कांउटी के भविष्य को लेकर तिब्बती अधिकारी श्री छी ज़ाला के पास अनेक सुन्दर स्वप्न हैं । उन का कहना है:

"भविष्य में हमारे यहां का आसमान आज से और नीला होगा, पानी आज से और स्वच्छ होगा, जानवर आज से और शांत होंगे । स्थानीय लोग और बाह्य दुनिया के लोग इसी भूमि पर अमनचैन भरा जीवन बिता सकते हैं । मेरी आशा है कि उन के चेहरों पर आज से और ज्यादा मुस्कुराहट देखी जा सकेगी ।"