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(GMT+08:00) 2007-12-24 16:22:02    
तुनह्वांग गुफाओं में बरामद प्राचीन पुस्तकों का औपचारिक प्रकाशन

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दोस्तो,हाल ही में चीनी राजकीय पुस्तकालय ने तुनह्वांग गुफा में बरामद हुई प्राचीन पुस्तकों में से 30 पुस्तकों का प्रकाशन किया।इन सभी प्राचीन पुस्तकों के प्रकाशन की योजना के एक अंग के रूप में राजकीय पुस्तकालय के इस काम का उच्च मूल्यांकन किया गया है।संबंधित विशेषज्ञों का कहना है कि इस से प्राचीन पुस्तकों की मरम्मत,संरक्षण और अनुसंधान में चीनी विद्वानों द्वारा की गई प्रगति जाहिर हुई है।

सन् 1900 में उत्तर पश्चिमी चीन के कानसू प्रांत के तुनह्वांग क्षेत्र में स्थित गुफाओं में 5वीं से 11 वीं शताब्दी तक की बहुत सी चीनी पुस्तकें बरामद की गईं,जिन में चीनी और संस्कृत आदि भाषाओं में प्राचीन और मध्य काल में धर्म,खगोल,भूगोल,इतिहास और संस्कृति से जुड़ी जानकारियां कलमबद्ध हैं।इन पुस्तकों को प्राचीन काल में चीन और पूर्वी एशिया के सामाजिक जीवन के अनुसंधान के लिए मूल्यवान सामग्री माना गया है।अफसोस की बात है कि पिछली सदी के पहले के 20,30 वर्षों में युद्ध और सामाजिक अस्थिरता के कारण इन पुस्तकों के कुछ हिस्सों का विदेशों में पलायन हो गया।इस समय दुनिया में 40 देशों और इलाकों में ये पुस्तकें सुरक्षित हैं।विशेषकर ब्रिटेन,फ्रांस,रूस औऱ जापान में इन पुस्तकों की काफी संख्या है।

चीनी राजकीय पुस्तकालय तुनह्वांग गुफाओं में बरामद हुई पुस्तकों का सब से बड़ा संग्रहकर्ता है।इस में संग्रहीत इन पुस्तकों की संख्या 16 हजार से भी अधिक है,जो विदेशों में संरक्षित इस तरह की पुस्तकों की कुल संख्या का एक तिहाई है।दीर्घकाल तक बिना देखरेख के कारण ये पुस्तकें क्षतिग्रस्त होने से नहीं बच सकीं हैं।पिछली सदी के 80 वाले दशक से ही चीनी राजकीय पुस्तकालय ने फटी-पुरानी पुस्तकों की मरम्मत का कार्य शुरू किया।संबंधित विशेषज्ञों और विद्वानों की मेहनत से इस कार्य में काफी उपलब्धियां हासिल हुईं।इस के आधार पर चीनी राजकीय पुस्तकालय ने मरम्मत की गई पुस्तकों में से 150 को 2007 के अंत तक प्रकाशित करने का निर्णय लिया।इस पुस्तकालय के उपमहानिदेशक छन-ली ने हमारे संवाददाता से कहा कि मरम्मत की गई सभी पुस्तकों का प्रकाशन करना तुनह्लांग-शास्त्र के अनुसंधान में लगे हुए सभी चीनी और विदेशी विद्वानों की अभिलाषा रहा है।उन का कहना हैः

"सांस्कृतिक अवशेषों को साथ-साथ संरक्षित और विकसित करने की ज़रूरत है। किसी भी राष्ट्रीय संस्कृति के विकास के लिए ऐसा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।संरक्षित चीजों को प्रदर्शित करने की बजाए सिर्फ छुपा कर रखना कोई मायने नहीं रखता है।किस तरह ज्यादा से ज्यादा लोगों को इन पुस्तकों के प्रयोग की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, बीते कुछ वर्षों में हमारे कार्य का यह लक्ष्य रहा है।हम ने आधुनिक प्रौद्योगिकी,खासकर डिजिटल तकनीक औऱ इंटरनेट पर ढेरों काम किए हैं।हमारी उम्मीद है कि दीर्घकाल तक बन्द कमरों में संरक्षित रहीं ये पुस्तकें अब जल्द ही लोगों के सामने आएंगी,ताकि उन का व्यावहारिक उपयोग हो सके।"

श्री छन-ली के अनुसार चीनी राजकीय पुस्तकालय ने पिछली शताब्दी के चौथे दशक में ही तुनह्वांग गुफाओं में बरामद हुई पुस्तकों के संरक्षण के लिए एक तदर्थ संस्था कायम की थी और नव्वे के दशक के शुरू में इन पुस्तकों को पूर्णतया सुव्यवस्थित करने का काम आरंभ हुआ।

श्री चांग ची-छिंग इस पुस्तकालय के एक जिम्मेदार व्यक्ति हैं,जिन्हों ने प्राचीन पुस्तकों के संरक्षण और मरम्मत में समृद्ध अनुभव अर्जित किए हैं।उन्हों ने परिचय देते हुए कहा कि तुनह्वांग गुफाओं में बरामद हुई पुस्तकों की मरम्मत चीनी परंपरा की विशेष बहुचक्रीय तकनीक से की जाती है।इस तकनीक से एक छोटे से कागज की मरम्मत में कई महीनों तक का समय लग सकता है।मरम्मत की गई पुस्तकों में मरम्मत का कोई निशान नहीं दीखता है।इसलिए बहुत से देशों के पुस्तकालयों ने अपने कार्यकर्ताओं को चीन में पुस्तकों की मरम्मत की तकनीक सीखने के लिए भेजा है।

अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक-जगत का मानना है कि चीन में पुस्तकों की मरम्मत का स्तर उच्च कोटि का है।चीनी राजकीय पुस्तकालय द्वारा तुनह्वांग गुफाओं में बरामद की गईं और मरम्मत के बाद अभी प्रकाशित की गईं इन पुस्तकों को देखें तो वे बहुत पठनीय और स्पष्ट हैं।इन में अंकित हर शब्द पढने में कोई दिक्कत नहीं आती है।श्री चांग ची-छिंग ने कहाः

"हमारा कार्य है तुनह्वांग गुफाओं में बरामद हुई पुस्तकों की अच्छी तरह मरम्मत कर उन्हें स्पष्ट रूप में प्रदर्शित करना ।इस बार हम ने माइक्रो फिल्म से इन पुस्तकों के फोटो खींचकर डिजिटल तकनीक से मरम्मत का तरीका अपनाया।व्यवहार में यह तरीका सफल साबित हुआ है।"

श्री चांग ने यह भी बताया कि इस बार मरम्मत की गई 30 पुस्तकों में बहुत पतले कागज का प्रयोग किया गया है,जिस से चीन में छपाई की गुणवत्ता और उच्च स्तर का पता चलता है।बहुत से विदेशी विशेषज्ञों ने इन पुस्तकों को देखने के बाद उन की बड़ी प्रशंसा की।पर चीनी विशेषज्ञ जानते हैं कि प्राचीन पुस्तकों की मरम्मत में प्राप्त उपलब्धियों का मतलब यह नहीं है कि चीन में सांस्कृतिक अवशेषों का संरक्षण-कार्य परिपूर्ण हो गया है।चीनी राजकीय पुस्तकालय के शोधकर्ता श्री लिंग शी-थ्यान ने विचार व्यक्त किया कि विज्ञान और सूक्ष्मता की दृष्टि से प्राचीन पुस्तकों व काग़जातों के संरक्षण और मरम्मत में चीन को विदेशों से बहुत कुछ सीखना चाहिए।उन्हों ने कहाः

"वर्तमान दुनिया डिजिटल दौर से गुज़र रही है।डिजिटलीकरण विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों,विभिन्न तकनीकों और विभिन्न अवधारणाओं से प्रभावित होकर चल रहा है।अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से हम विदेशों की संबद्ध प्रगतिशील तकनीकें और अनुभव ग्रहण कर सकते हैं।मेरे विचार में विदेशों से प्रबंध के अच्छे तरीकों का सीधे आयात करना बहुत महत्वपूर्ण है।प्रबंध का तरीका बहुत हद तक सोफ्टवेयर जैसा है,जो लोगों की अवधारणा और सुयोग्यता से जुड़ा है।मैं ने तुनह्वांग गुफाओं में बरामद हुई पुस्कतों के संरक्षण पर आयोजित अनेक सम्मेलनों में भाग लिया हैं और बहुत सी मरम्मत की गई पुस्तकें देखी हैं।मुझे लगा है कि चीन से ज्यादा विदेशों में इन पुस्तकों के संरक्षण और मरम्मत को महत्व दिया जा रहा है।ब्रिटेन,फ्रांस,रूस औऱ जापान में इन पुस्तकों के संरक्षण व मरम्मत के लिए नियमित व्यवसायिक प्रशिक्षण-कक्षा चलायी जाती है और सभी मरम्मतकर्ताओं को विशेष उच्च शिक्षा प्राप्त हुई है।वे प्राचीन पुस्तकों की मरम्मत के तैयारी-कार्य को भी बहुत बारीकी से चलाते हैं,जिस से ठोस मरम्मत-कार्य को पुख्ता नींव प्राप्त हो सकी है"

श्री लिंग शी-थ्यान ने कहा कि अतीत में प्राचीन पुस्तकों की मरम्मत विशेषज्ञों के मौखिक निर्देशन में की जाती थी।2003 से चीनी राजकीय पुस्तकालय ने प्राचीन पुस्तकों व कागजातों की मरम्मत संबंधी प्रबंधन-व्यवस्था कायम की।इस व्यवस्था के तहत मरम्मत से पहले प्राचीन पुस्तकों की स्थिति,मरम्मत की प्रक्रिया के दौरान इन पुस्तकों की स्थिति और मरम्मत के बाद इन पुस्तकों की स्थिति संपूर्ण रूप से नोट की जाती है।

तुनह्वांग गुफाओं में बरामद हुई पुस्तकों के औपचारिक प्रकाशन से तुनह्वांग-शास्त्र के अनुसंधान में लगे देशी व विदेशी विद्वानों को बड़ी सुविधा मिली है।राजधानी नार्मल विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर हाओ छुन-वन तुनह्वांग-शास्त्र के विशेषज्ञ हैं।उन के मत में इधर के कुछ वर्षों में चीनी विद्वानों ने आत्मविश्वास और खुले रवैए से तुनह्वांग-शास्त्र के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान में भाग लिया है।तुनह्वांग-शास्त्र एक अंतर्राष्ट्रीय विद्या है,जिस के अनुसंधान में निश्चय ही अधिक उपलब्धियां प्राप्त हो सकती हैं।प्रोफेसर हाओ ने कहाः

"तुनह्लांग-शास्त्र शुरू से ही एक वैश्विक स्वरूप की विद्या रही है।उस के अनुसंधान का दायरा बहुत व्यापक है और अनुसंधानकर्ताओं के अपने-अपने विषय और केंद्र हैं।आपसी सहयोग और आदान-प्रदान से उन का संबंधित ज्ञान बढ सकता है और अनुसंधान का स्तर भी उन्नत हो सकता है।आज कोई भी राष्ट्र और देश भूमंडलीकरण से अछूता नहीं रह सकता है।ऐसे में किसी भी विद्वान पर वैश्विक निशान लगा हुआ है।अंतर्राष्ट्रीय विद्या होने के कारण तुनह्वांग-शास्त्र का और ज्यादा व्यापक व गहन अनुसंधान किया जाना चाहिए।"

प्रोफेसर हाऊ के अनुसार तुंगह्वांग-शास्त्र के अनुसंधान में चीनी विद्वानों की अपनी विशेषताएं हैं और विदेशी विद्वान भी उत्तम तरीके और विशेष दृष्टि अपनाते हैं।सो दोनों एक दूसरे के पूरक हो सकते हैं।उन्हों ने आशा जताई कि और अधिक विदेशी विद्वान तुंगह्वांग-शास्त्र के अनुसंधान के लिए चीन आएंगे।