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(GMT+08:00) 2007-10-19 10:39:05    
छिङ राजवंश का सामाज

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छिङ सेना आठ बैनर सेना ( मानचू सेना) और हरी बटालियन सेना ( हान मूल की सेना) से बनी थी।

आठ बैनर सेना की संख्या दो लाख बीस हजार थी, तथा उसे पेइचिङ व उस के आसपास के इलाकों में और देश के महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया था।

हरी बटालियन सेना की संख्या करीब दस लाख थी। इसे हरी बटालियन सेना का नाम इसलिए दिया गया था क्योंकि वह अपने चिन्ह के तौर पर हरी झण्डियों का इस्तेमाल करती थी।

इसके सैनिकों को विभिन्न प्रान्तीय गवर्नरों का इस्तेमाल करती थी। इस के सैनिकों को विभिन्न प्रान्तीय गवर्नरों या गवर्नर जनरलों के अधीन तैनात किया गया था।

छिङ सरकार ने मिङ राजवंश का अनुकरण करते हुए 1646 छिङ विधि संहिता बनाई । बाद में व्याख्या के रूप में इसमें कुछ दृष्टांत जोड़ कर नए ग्रन्थ का नाम विस्तृत छिङ विधि संहिता रख दिया गया।

छिङ सरकार ने अपने शासन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सामाजिक अन्तरविरोधों की तीव्रता को कम करने और आर्थिक उत्पादन को बहाल करने की नीति अपनाई।

सम्राट खाङशी (शासन काल 1662-1722) ने एक आदेश जारी कर जमींदारों की ऐसी तमाम गतिविधियों पर रोक लगा दी जिनके जरिए वे किसानों को बेदखल कर अपनी जमीन बढाते रहते थे।

सम्राट खाङशी ने यह ऐलान भी किया कि "आबादी में चाहे जितनी वृद्धि हो, पहले से निर्धारित व्यक्ति कर कभी नहीं बढाया जाएगा।"

साथ ही, व्यक्ति कर को भूमि कर में मिला देने की व्यवस्था लागू की गई, जिस के अन्तर्गत कर का निर्धारण भूमि के परिमाण के आधार पर होता था।

वास्तव में यह व्यवस्था मिङ राजवंश की एक कर वाली व्यवस्था का ही जारी रूप थी।

इस व्यवस्था में नाना प्रकार के करों को मिलाकर, जिन में व्यक्ति कर का एक भाग और बेगार कर ( बेगार न करने की स्थिति में वसूल किया जाने वाला कर ) भी शामिल था, एक ही तरह की लेवी का रूप दे दिया गया था, जिस की बसूली चांदी में की जाती थी।

लेकिन मिङ राजवंश के अन्तिम काल में अनेक और लेवियां भी लगा दी गई थीं, जिन के फलस्बरूप जनता का बोझ दिनोंदिन बढता गया था और तथाकथित " एक कर वाली व्यवस्था " की सारभूत बातों को ग्रहण कर उस में कुछ संशोधन व सुधार किया।