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(GMT+08:00) 2007-08-06 14:39:19    
शाँघाई शहर , चीन की अदालती कार्यविधि

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आज के इस कार्यक्रम में हरियाणा के मनीष व्यास मनू और शिमला हिमाचल प्रदेश के श्रीचन्द्र कुमार के पत्र शामिल हैं।

हरियाणा के मनीष व्यास मनू का सवाल है कि चीन का शाँघाई शहर किस तरह का है ?

शांघाई पूर्वी चीन के समुद्र तट पर स्थित हैं.यह एक केंद्र शासित शहर है और देश का सब से बड़ा औद्योगिक व वाणिज्य शहर भी.इस का क्षेत्रफल लगभग 6340 वर्गकिलोमीटर है औऱ जनसंख्या 1 करोड़ 20 लाख से अधिक.

शांघाई शहर चीन की सब से बड़ी नदी यांग्त्जी नदी के मुहाने पर बसा है.उस के उत्तर पश्चिम में च्यांगसू प्रांत और दक्षिण पश्चिम में चच्यांग प्रांत है.प्राचीन काल में वह मछुआरों का एक गांव था.11वीं सदी में वह एक बस्ती में परिणत हो गया था.सन् 1685 तक वह एक महत्वपूर्ण बन्दरगाह का रूप ले चुका था.सन् 1845 से ब्रिटेन,फ्रांस,जापान और अमरीका आदि देशों ने कथित पट्टों पर शाँघाई में जमीन ली और वहां अपने-अपने अधिकार-क्षेत्र स्थापित किए.

कालांतर में शाँघाई एक औद्योगिक व वाणिज्य शहर बनता गया,एक समय तक उस का औद्योगिक उत्पादन-मूल्य देश का 8वां हिस्सा था.अब वह विमान,अंतरिक्ष,इस्पात,

रसायन,जहाज-निर्माण और इलेक्ट्रोनिक्स आदि उद्योगों में अग्रसर है.शांघाई बन्दगाह में डेढ़ सौ देशों के माल-जहाज आते-जाते हैं.अनेक हवाई मार्ग शाँघाई को देश के अन्य भागों एवं विदेशों के नगरों के साथ जोड़े हुए हैं.शाँघाई में शैक्षणिक व वैज्ञानिक अनुसंधान कार्य भी विकसित हैं.वहां कोई 40 विश्वविद्यालय या कालेज हैं,200 से अधिक वैज्ञानिक अनुसंधान प्रतिष्ठान और प्रयोगशालाएं हैं.इधर के वर्षों में शाँघाई ने दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की की है. वह विदेशी पूंजी-निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद है.भारत समेत बहुत से विदेशों की प्रमुख कंपनियों और बैंकों के बिजनेस इस शहर में चल रहे हैं।

शिमला हिमाचल प्रदेश के श्रीचन्द्र कुमार पूछते हैं कि चीन की अदालती कार्यविधि कैसी हैं? रामपुरफुल पंजाब के बलवीर सिंह ने भी इस बारे मे जानने की इच्छा प्रकट की है.

दोस्तो, भारत की ही भांति चीन की अदालती कार्यविधि अपेक्षाकृत जटिल है.वैसे आप जानते हैं कि हर किसी देश में कानून,न्याय और अदालत से जुडे मामले सरल होना संभव नहीं है.यहां हम सिर्फ संक्षिप्त रूप से चीन की अदालती कार्यविधि की जानकारी दे सकते हैं.

चीन के सभी नागरिक अपने कानूनी अधिकारों के हितों को नुकसान पहुंचाए जाने की हालत में दीवानी कानून की धारा न0.108 के अनुसार अपनी न्यायिक रक्षा करवा सकते हैं.मामले के अभियोक्ता को अदालत जाने से पहले अपील-पत्र तैयार करना होता है और इसे अदालत में पेश करने के समय पहचान-पत्र यानी आई टी कार्ड या संस्था की लाइसेंस की कॉपियां देनी होती है.वकील से सेवा ली जाए या नही,यह अभियोक्ता की ज्ञान और मामले की स्थिति पर निर्भर करता है.अगर वकील की सहायता ली जाए,तो अधिकार-पत्र दिया जाएगा.अभियोक्ता को खुद इन सभी दस्तावेजों को सीधे अदालत में पेश करना होता है.अपील-पत्र मिलने के 7 दिनों के बाद अदालत अभियोक्ता को मामला मानने य न मानने का जवाब देती है.यदि मामले पर मुकदमे की अनुमित दी जाए,तो अभियोक्ता को निश्चित फीस देनी होती है और वह मुकदमे की शुरूआत संबंधी सूचना मिलने पर अदालत में उपस्थित हो जाएगा.

अदालत में अभियोक्ता और अभियुक्त दोनों पक्षों को न्यायाधीशों के प्रबंध एवं अदालत के अनुशासन का पालन करना चाहिए तथा एक दूसरे के बयान को बीच में काटने की इजाजत नहीं है.अगर पहली सुनवाई को नहीं माना जाए,तो 15 दिनों के अन्दर फिर से अपील-पत्र को अदालत में पेश किया जाएगा और उच्चत्तम अदालत में फीस दी जाएगी.अगर 15 दिनों के भीतर अपील-पत्र प्रस्तुत नहीं किया जाए,तो पहली सुनवाई मानी जाएगी औऱ अभियोक्ता व अभियुक्त दोनों पक्ष संबधित फैसले पर अमल करेंगे.अगर दूसरी या तीसरी सुनवाई का फैसले स्वीकार करने से इन्कार किया जाए,तो प्रोक्युटर में याचिका दाखिल की जाएगी तथा चीनी राष्ठ्रीय जन प्रतिनिधि सभा और चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन की राष्ट्रीय समिति को संबंधित जानकारी दी जाएगी.

मामले के दर्ज होने से उस के समाप्त होने तक यानी एक मामले से निपटने में आम तौर पर 3 महीने लगते हैं.पर ठोस अवधि मामले की सरलता और जटिलता तय करती है.चीन के सभी अदालतें अधिक से अधिक 3 महीनों के भीतर एक मामले के निपटारे की कोशिश करती हैं,नहीं तो मामलों का ढेर लगने के साथ-साथ उन की मुसीबतों का भी ढेर लग जाएगा.

अभियोक्ता को अदालती फीस देने की जरूरत है.फीस मामलों की विभिन्नता के आधार पर भिन्न-भिन्न होती है.तलाक-मामले और अन्य गैरसंपत्ति-मामले के लिए फीस 10 से 50 चीनी य्वान और संपत्ति से जुड़े मामले की फीस संपत्ति के आंकडों के अनुसार कम से कम 50 चीनी य्वान तय होती है.संपत्ति अधिक हो,तो फीस ज्यादा लगती है.