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आज के इस कार्यक्रम में होज़खास नयी दिल्ली के दीपक ठाकुर, रामपुरफुल पंजाब के बलवीर सिंह, विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश के राहम टुन्निसा के पत्र शामिल हैं।
होज़खास नयी दिल्ली के दीपक ठाकुर ने हांगकांग की राजनीति के बारे में कुछ जानकारी हासिल करने की इच्छा व्यक्त की है।
हांगकांग दक्षिण पूर्वी चीन के समुद्रतट पर स्थित है,जो चीन के भीतरी इलाके के शनचन शहर से लगा है। वह हांगकांग टापू,खाओलुंग क्षेत्र एवें शिनच्ये क्षेत्र से गठिग है औऱ उस का कुल क्षेत्रफल 1092 वर्ग किलोमीटर है। हांगकांग चीन की प्रादेशिक भूमि का एक अखंड भाग है। पर 1840 में उस पर ब्रिटेन का कब्जा हो गया।19 दिसम्बर 1984 को हांगकांग के सवाल पर चीन और ब्रिटेन ने एक संयुक्त घोषणा-पत्र जारी किया। इस के अनुसार पहली जुलाई 1997 को दोनों देशों की सरकारों ने चीन में हांगकांग की वापसी संबंधी सत्ता-हस्तांतरण रस्म आयोजित की,तब से हांगकांग पर चीन का शासन पुन:शुरु हो गया और हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के रुप में विधिवत् रूप से कायम हो गया।
इस समय हांगकांग में《हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के बुनियादी कानून 》का सुभीते से क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस कानून के अनुसार चीनी केंद्रीय सरकार हांगकांग में एक देश दो व्यवस्थाएं लागू करने औऱ हांगकांग पर खुद हांगकांगवासियों द्वारा प्रशासन करने की नीति अपनाती है।
हांगकांग में लोकतंत्र की राजनीतिक व्यवस्था लागू है। वहां की प्रमुख प्रशासनिक इकाइयां हैं: प्रमुख प्रशासक कार्यालय,सरकारी कार्यालय,कानून निर्माण कार्यालय और सर्वोच्च अदालत। प्रमुख प्रशासक शीर्ष नेता हैं,जो हर पांचवें वर्ष में स्थानीय मतदान के जरिए चुने जाते है और जिन का कार्यकाल 5 साल का है। हांगकांग में स्वतंत्र अर्थव्यवस्था लागू है। वह चीन के हांगकांग के नाम पर अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में शामिल हो सकता है।
रामपुरफुल पंजाब के बलवीर सिंह पूछते हैं कि चीन की कोयला खानों में अक्सर धमाके होते रहते हैं, जिन में बहुत सी जानें चली जाती है. ऐसा किन कारणों से होता है ? विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश के राहम टुन्निसा ने भी इस से मिलता-जुलता सवाल पूछा है।
पिछले सालों में चीन के अनेक क्षेत्रों की कोयला खानों में विभिन्न स्तर के धमाके हुए हैं,जिन से देश को भारी जान-माल की क्षति पहुंची है.चीन सरकार के संबंधित विभागों ने ने इन धमाकों के कारणों का पता लगाने के लिए अनेक संगोष्ठियां आयोजित की हैं,जिन में विशेषज्ञों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए.चीनी भू-विद्या विश्वविद्यालय के प्रोफेसर,राष्ट्रीय सुरक्षा उत्पादन शास्त्र के विशेषज्ञ लो-युन के अनुसार देश में कोयला खानों में धमाके होने का मुख्य कारण संबंधित कानून-कायदे की अवहेलना है.उन्हों ने कहा कि बहुत सी कोयला-खानों के मालिकों और खुद खान मजदूरों ने सुरक्षा खनन पर आवश्यक ध्यान नहीं दिया है.चीनी उत्खनन संघ के एक अफसर डा.ली युंगफंग ने कहा कि चीन एक बड़ा कोयला उत्पादक देश है.यहां कोयला खानों में सुरक्षित तकनीकी व्यवस्था काफी समय से कायम है.ऐसे में कोयला खानों में हुई अधिकाश दुर्घटनाएं टाली जा सकती थी.उदाहरणार्थ गैस-विस्फोट की रोकथाम के लिए देश के पास पर्याप्त तकनीकी ताकत है.अगर ज्यादा ध्यान दिया जाए,तो इस तरह के विस्फोट नहीं होंगे.
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कोयले की बढ़ती मांग भी कोयला-खानों में धमाके होने का एक मुख्य कारण है.इधर के वर्षों में चीनी कोयला-बाजार में मांग के आपूर्ति से कहीं ज्यादा होने की स्थिति बरकरार है.मांग की आपूर्ति के लिए कोयला-खानों को सभी चेतावनियों की परवाह न कर हद से ज्यादा उत्पादन करना पडा है.जब कि बहुत से कोयला-खानों में सुरक्षित खनन के काम का आधार बहुत कमजोर है,जिस से स्वभावत: दुर्घटना होने की गुंजाइश मौजूद है.आज भी चीन की कोयला-खानें पुराने परंपरागत फार्मूले पर चल रही हैं,जिस में उत्पादन की तकनीक काफी पिछड़ी है.आर्थिक लाभ की लोलुपता में कोयला खानों के मालिक इन खामियों की अनदेखी कर मजदूरों को गैरवैज्ञानिक ढंग से खनन करने के लिए विवश करते हैं.विशेषज्ञों ने देश में कोयले जैसे ऊर्जा के ऊद्योग को नए औद्योगिकीकृत रास्ते में ले जाने पर जोर दिया है.ऊर्जा के नए औद्योगिकीकरण की यह मांग है कि बड़ी सावधानी से ऊर्जा का विकास किया जाए,सीमित मात्रा में खनन किया जाए,जान को खतरे वाली सभी खतरनाक परियोजनाएं और कारोबार कदम-ब-कदम बन्द किएं जाएं,बड़ी मात्रा में गैस पैदा करने वाली कोयला-खानों या जहरीली गैस सहित तेल कुओं पर स्थाई पाबंदी लगायी जाए,साथ ही जान की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले ऊर्जा उपक्रमों के विकास को बढावा दिया जाए.
हाल ही में चीन के संबंधित विभाग ने देश के विभिन्न क्षेत्रों के संबंधिक अधिकारियों से मांग की है कि वे कोयला-खानों में गैरकानूनी खनन के खिलाफ अभियान के दौरान संबंधित कानून-कायदे की अवहेलना,स्वार्थ के लिए कोयला-खानों के मालिकों व सरकारी अधिकारियों के बीच मिलीभगत और भ्रष्टाचार जैसी अवैध काररवाइयों की सख्त जांच करें.जो कानूनविरोधी अपराध करता है,उसे न्यायिक सजा दी जाए.

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