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चीन की अल्पसंख्यक जाति

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सांस्कृतिक जीवन
(GMT+08:00) 2007-07-19 09:58:40    
मैंने अपनी आंखों से चीन देखा है

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हाल में भारत के विभिन्न तबकों से आये सौ युवकों से गठित एक प्रतिनिधि मंडल ने चीन की यात्रा पूरी की है।

चीन के दस दिनों की यात्रा के दौरान, भारतीय युवकों ने चीन की राजधानी पेइचिंग के अलावा, दक्षिण पश्चिम चीन के युन्नान प्रांत के खुनमिंग शहर, पूर्वी चीन के नानचिंग शहर और शांघाई शहर का दौरा किया। चीन-यात्रा ने उन पर गहरी छाप छोड़ी है । अनेक भारतीय युवकों ने कहा कि यह यात्रा सदा के लिए एक अविस्मर्णीय अनुभव और याद रहेगी। चीन की संस्कृति, चीन का आर्थिक विकास और चीनी लोगों के प्रति उन के क्या विचार हैं। आज के इस कार्यक्रम में सुनिए, भारतीय युवकों की नजर में चीन।

लगभग सभी भारतीय युवकों के लिए यह उन की पहली चीन यात्रा है। पहले उन्हें पुस्तकों, फिल्मों आदि माध्यमों से चीन की जानकारी मिली थी।पुणे से आये भारतीय युवक श्री सिद्धार्थ तातुस्कर ने हमें बताया कि चीन के लम्बे इतिहास एवं पुरानी सभ्यता के प्रति भारतीय युवकों की बड़ी रुचि है।

चीन की यात्रा के दौरान, भारतीय युवकों को दक्षिण पश्चिम चीन के युन्नान प्रांत की राजधानी खुनमिंग शहर का दौरा करने का मौका मिला। चीन में कुल 56 जातियां हैं, जबकि युन्नान प्रांत में चीन की 26 अल्पसंख्यक जातियां रहती हैं। यहां भारतीय युवाओं ने चीन की विभिन्न अल्पसंख्यक जातियों की विविधता भरे रीति रिवाज व संस्कृति को देखा।

युन्नान की अल्पसंख्यक जातियों के गांव में भारतीय लोगों ने एक बौद्ध धर्म के मंदिर में पूजा भी की। भारत के सिक्किम प्रांत से आये पंचायती राज्य के एक नेता ने कहा कि मंदिर में पूजा करने के बाद वे बहुत खुश थे।

चीन यात्रा के दौरान, भारतीय युवकों ने न केवल चीन की परम्परागत संस्कृति को देखा , बल्कि चीन में हो रहे तेज़ आर्थिक विकास को भी देखा। अनुभव बताते समय वे बार-बार शब्द आश्चर्य शब्द का इस्तेमाल कर रहे थे। एक्सप्रेस वे पर सवार होते समय, वे खुशी से गा रहे थे। सुश्री अतिथि मेहत्ता भारतीय युवा प्रतिनिधि मंडल की उप प्रधान हैं। चीन के आधुनिकीकरण के प्रति उन का गहरा अनुभव है।

शहर ही नहीं, चीन में भारतीय युवा चीन के पूर्वी च्यांग सू प्रांत के एक आधुनिक गांव ह्वा शी गांव भी गये। वहां चौड़ी चौड़ी सड़कें एवं सुन्दर मकानों को देखकर वे विश्वास नहीं कर पाए कि वे लोग एक गांव में आये हैं। भारतीय युवकों ने ह्वा शी गांव के एक ग्रीन हाऊस का दौरा भी किया और कुछ लोगों ने उस में उगने वाले फल को भी चखा।

भारतीय युवाओं की चीन यात्रा का एक महत्वपूर्ण भाग है चीनी विद्यार्थियों से मिलना। चीन के पेइचिंग, खुनमिंग और नान चीन शहरों में वे वहां के मशहूर विश्वविद्यालय जाकर विद्यार्थियों से मिले और उन से विचारों का आदान-प्रदान किया।अभी आप जो आवाज सुन रहे हैं, वह युन्नान विश्वविद्यालय में भारतीय युवा प्रतिनिधि मंडल के प्रधान श्री मनी शंक्कर अय्यर और एक चीनी विद्यार्थी के बीच बातचीत की है। मौके पर चीनी विद्यार्थी ने भी एक परम्परागत चीनी गीत गाया। चीनी विद्यार्थियों की ईमानदारी का भारतीय युवाओं पर गहरा प्रभाव पड़ा है।

युवा प्रतिनिधि मंडल की उप प्रधान सुश्री अतिथि मेहत्ता ने कहा कि चीनी विद्यार्थी बहुत प्यारे हैं।उन्होंने कहा कि चीनी लोग बहुत ईमानदार हैं।

दस दिनों की यात्रा जल्द ही समाप्त हो गई । बिदाई का वक्त भी आ गया। अनेक भारतीय युवकों ने कहा कि चीन यात्रा उन सभी लोगों के लिए अविस्मर्णीय रहेगी। भारतीय युवा प्रतिनिधि मंडल के प्रधान श्री अय्यर ने कहा कि यदि दुनिया में सब से बड़ी आबादी होने वाला देश चीन व भारत एक साथ मिलकर सहयोग करें, तो जरुर विश्व में अग्रिम पंक्ति में खड़े हो सकेंगे।

अनेक भारतीय युवाओं ने हमें बताया कि चीन व भारत के बीच युवाओं के आदान-प्रदान की यह योजना बहुत महत्वपूर्ण है। यह दोनों देशों के युवाओं को एक दूसरे को समझने में मदद देगी। हम दोनों देशों को एक दूसरे की खूबियों से सीख करके एक साथ आगे विकास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मौका मिला, तो जरुर फिर एक बार चीन आएंगे।

बिदाई देते समय भारतीय युवा प्रतिनिधि मंडल के प्रधान श्री अय्यर ने बिदाई न कहिए नामक एक गीत भी सुनाया।इस गीत ने भारतीय युवाओं के मन की बात कही है। हमें विश्वास है कि चीन यात्रा हमेशा ही भारतीय युवाओं की एक सुन्दर याद रहेगी। हमें आशा है कि भारत व चीन के युवक आपसी मित्रता को प्रगाढ़ करने के लिए योगदान प्रदान करते रहेंगे। हिन्दी चीनी भाई भाई की भावना पीढ़ी दर पीढ़ी दोनों देशों की जनता के दिल में भरी रहेगी।