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(GMT+08:00) 2007-07-13 10:57:54    
वेवूर विद्वान श्री इमिन .तुरसुन

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सिन्चांग के मशहूर वेवूर विद्वान श्री इमिन . तुरसुन इस साल 83 साल के हैं । वयोवृद्धावस्था में भी वे बहुत चतुर और स्फुर्ति नजर आते है , यो उन के बाल सभी पके पड़ गए , किन्तु वे अब भी चिन्तनशील और तेजस्वी रहते हैं । उन का कहना है कि दिमाग नहीं खपाने पर उस में जंग लग सकती है । असल में उन की अच्छी सेहतमंदी और तेज स्फुर्ति पिछले अनेक दशकों में उन की चिन्तनशील होने और पढ़ने लिखने में संलग्न होने का सुफल है ।

इमिन. तुरसुन का जन्म सिन्चांग के उरूमुछी शहर के एक कारीगर खानदान में हुआ । छै साल की उम्र में वह पिता द्वारा मदरसा में दाखिला किया गया , वहां उन्हों ने अरबी , फारसी और हान भाषाएं सीखीं , जिस के फलस्वरूप उन के लिए भाषा व साहित्य की मजबूत आधार तैयार हो गया । वर्ष 1951 में सिन्चांग जन प्रकाशन गृह स्थापित हुआ , अपनी मजबूत भाषा व लेखन की श्रेष्ठता के कारण वे प्रकाशन गृह के अनुवादक विभाग के प्रधान नियुक्त किए गए । इस की याद करते हुए श्री तुरसुन ने कहाः

उस जमाने में प्रकाशन गृह में कर्मचारियों की संख्या बहुत कम थी , अनुवादन और संपादन के काम बहुत ज्यादा थे । उस समय मैं तारीम साहित्य नामक पत्रिका की संपादक कमेटी के सदस्य भी था , इसलिए मैं दिन में प्रकाशन गृह में काम करता था , रात को पत्रिका के लेखों का संपादन करता था । अकसर रोज दसेक घंटों तक काम करता रहा । कभी कभी छापाखाने में जरूरी काम आया , मुझे तुरंत ही वहां जाना पड़ता । गर्मियों में हो या सर्दियों में , मौसम कितना खराब क्यों न हो , मैं अपने काम को कभी नहीं छोड़ता । आज की दृष्टि से उस जमाने की मेहनत बहुत ही कड़ी थी , लेकिन हम बड़े जोश के साथ काम करते रहे , क्योंकि हम अपने काम को बहुत मूल्यवान समझते थे ।

सिन्चांग जन प्रकाशन गृह के संपादक विभाग में श्री इमिन.तुरसुन सब से ज्यादा भाषाएं जानते हैं । इसलिए वे अकसर अन्य लोगों को भाषा और व्याकरण की शिक्षा देते थे और विभाग के हान जातीय लोगों को वेवूर भाषा भी सीखाते थे । अपने शानदार कारनामों के फलस्वरूप प्रकाशन गृह के नेताओं ने कई बार उन्हें ऊंचे पद पर नियुक्त करने का फैसला किया , लेकिन उन्हों ने हर बार नेतृत्व का पद संभालने से इन्कार किया । उन का कहना थाः

मैं साफ साफ जानता हूं कि मेरी खुबियां किस क्षेत्र में है । मैं अपने कलम से ज्यादा से ज्यादा लेख लिख कर अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहता हूं और अपने कलम से लोगों के सांस्कृतिक जीवन को रंगबिरंगे बनाना चाहता हूं ।

प्रकाशन गृह में श्री इमिन .तुरसुन तीस से ज्यादा साल तक काम करते थे । इस के दौरान उन्हों ने बेशुमार लेखों और साहित्यिक रचनाओं का अनुवाद और संपादन किया , जिन में चीन के सुप्रसिद्ध चार प्राचीन क्लासिक साहित्य रचनाओं में से एक लाल भवन का सपना भी शामिल है । लाल भवन सपना चीन का एक सब से मशहूर और लोकप्रिय उपन्यास है , भाषा और विषय की दृष्टि से वह इतने कठिन और उत्कृष्ट है कि उस का दूसरी भाषाओं में अनुवाद करना असाध्य माना जाता है । इस के अनुवाद में श्री इमिन . तुरसुन ने असाधारण परिश्रम किए , उन का ध्यान और काम दिन रात इस उपन्यास पर केन्द्रित रहा । कई सालों की कड़ी और अथक मेहनत के बाद वेवूर भाषा का लाल भवन सपना प्रकाशित हुआ । यह वेवूर भाषा का एक उत्तम काम है , इस के अनुवाद के कठिन काम की याद करते हुए तुरसुन ने कहाः

वेवूर भाषा में इस प्रकार की विख्यात साहित्यिक रचना बहुत कम है , लाल भवन सपना के पात्र ज्यादा हैं , कहानी की जीवन पृष्ठभूमि और व्यक्तियों के आपसी रिश्ते बहुत चटिल है । उस का दूसरी भाषा में अनुवाद करना बहुत मुश्किल है । अंततः मैं दिन में बारीकी से उपन्यास पढ़ता था , हर अध्याय का विश्लेषण करता था और सोच मंथन करता था , और रात को अनुवाद में जुट जाता था । मेरे अनुवाद में मूल उपन्यास की मूल शैली बनाए रखी हुई है , जब वेवूर भाषी पाठक अनुदित लाल भवन सपना पढ़ रहा है , तो उसे उपन्यास के पात्रों के बहुत ही नजदीक आए महसूस होता है । मूल उपन्यास की बराबर शैली में अनुवादित वेवूर भाषी उपन्यास पढ़ने से वेवूर लोगों को और अच्छी तरह हान जाति की संस्कृति ,रीति रिवाज और चाल चलन समझने में मदद मिलती है ।

वेवूर भाषा का लाल भवन सपना पढ़ने के वक्त पाठकों को अनुवादन का काम बहुत शानदार और अद्भुत लगता है । कहानी के विष्य विस्तार में खुलने के साथ साथ मजा भी बढ़ता जाता है । वेवूर जातीय पाठक सुश्री आइजेगुल ने वेवूर भाषा के लाल भवन सपना के प्रकाशन की खबर सुनकर बड़ी खुशी प्रकट की । वे बहुत पहले ही इस मशहूर उन्यास पढ़ना चाहती थी । उन्हों ने कहाः

जब मेरे हाथ में वेवूर भाषा का लाल भवन सपना आया , तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा । लाल भवन सपना चीनी राष्ट्र के प्राचीन साहित्य में सब से उच्चे कोटि का लम्बा उपन्यास है । इस में चीन के सामंत समाज के अंतिम काल में चीनियों के बहुआयामी जीवन का जाता जीगता वर्णन किया गया । उपन्यास में उल्लेखित सामाजिक जीवन के दायरे विस्तृत है , लेखन पेनी और गहन है , संसारिक जीवन रंगबिरंगे वर्णित हुए और उन्पाय के पात्रों की संख्या 400 से ज्यादा हो गयी । उपन्यास पढ़ने में बड़ा चाव और मजा आता है ।

लाल भवन सपना के अलावा श्री इमिन .तुरसुन ने अन्य बहुत किस्मों के लेखों , उपन्यासों और कविताओं का भी अनुवाद किया , जिन में से कुछ अनुवादित रचनाएं सिन्चांग विश्वविद्यालय के पाठ चुने गए । उन के द्वारा अनुवादित काव्य और कवि , प्राचीन वेवूर संस्कृति और नोरुज उत्सव आदि कविता संग्रह वेवूर साहित्य की सर्वश्रेष्ठ रचनाएं मानी गयीं ।

सिन्चांग सामाजिक विज्ञान सोसाइटी के उपाध्यक्ष श्री चांग होंग छाओ बीस साल पहले ही श्री इमिन तुरसुन से परिचित हुए । उन के विचार में श्री इमिन तुरसुन अध्ययनशील और चिन्तनशील है , उन की कृतियां बेशुमार हैं । वयोवृद्धावस्था में भी उन्हों ने लिखना नहीं छोड़ा । वे सिन्चांग की विभिन्न जातियों के पुरानी पीढ़ी के लोकप्रिय साहित्यकार हैं । श्री इमिन . तुरसुन हमेशा लगन और संजीदगी से अकादमिक काम करते रहे और उन की कड़ी मेहनत ने श्री चांग पर अमिट छाप छोड़ी है । श्री चांग होंग छाओ ने कहाः

श्री इमिल . तुरसुन बहुत विनम्र , ईमानदार और शिष्ट रहे हैं । अपने सभी काम में वे जरा भी कसूर छूटने को नहीं देते हैं । उदाहरण के लिए वेवूर जाति के मशहूर प्राचीन संगीत समूह यानी बारह मुकाम का अनुवाद करने के दौरान उन्हों ने कुछ त्रुतियों का पता चला । अनुवाद और संपादन की सभा में उन्हों ने बेतकल्लुफ से ये गलतियां इंगित कीं और उसे ठीक करने की मांग की । सभा के बाद किए गए विश्लेषण से साबित हो गया है कि उन की राय सही है । इस प्रकार की लगन और संजीदगी की भावना से मैं बहुत प्रभावित हुआ ।

वर्तमान में श्री इमिन .तुरसुन सक्रिय रूप से वेवूर जाति के नयी पीढ़ी के लेखकों व अनुवादकों को प्रशिक्षित करने में लग रहे हैं । उन की उम्मीद है कि नयी पीढ़ी के लोग श्रेष्ठ संस्कृति को विरासत में ग्रहण कर उसे आगे विकसित कर सकेंगे ।