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आज के इस कार्यक्रम में मुजफ्फरपुर बिहार के जसीम अहमद,रजिया सुलताना और गुलाम नवी,सासाराम बिहार के फिरदौस खुर्शीद,निकहत फातमा,अशीफ़ अली और कटिहार बिहार के हरेंद्र प्रसाद साहा के पत्र शामिल हैं।
मुजफ्फरपुर बिहार के जसीम अहमद,रजिया सुलताना और गुलाम नवी पूछते हैं कि वाद्य यंत्र बांसुरी का विकास कब और कहां हुआ?
भैय्या,चीन में वाद्ययंत्र बांसुरी का इतिहास बुहत पुराना है.विशेषज्ञों के अनुसार पूर्वी चीन के चच्यांग प्रांत के हमुतु क्षेत्र में हुई खुदाई से प्राप्त बांसुरी के टुकड़े से जाहिर हुआ है कि बांसुरी चीनी इतिहास में 7000 साल से भी अधिक समय गुजार चुकी है.आदिम काल में ही उस का मूलरूप बन गया था,जो बहुत छोटा था.हान और चिन राजवंशों में विभिन्न लम्बाई वाली बांसुरियां प्रकाश में आईं,जिन से विभिन्न धुनें निकाली जा सकती थीं.स्वे राजवंश के बाद अर्धधुन निकालने वाली बांसुरी का आविष्कार हुआ.थांग राजवंश में बांसुरी के आकार और क्षमता में भारी सुधार लाया गया,जिस से वह आज की बांसुरी से काफी मिलती-जुलती है.लगभग 800 साल पहले के य्वान राजवंशकाल में ही बांसुरी विकसित होकर बिल्कुल आज जैसी हो गयी.
बांसुरी एक प्रकार का चीनी राष्ट्रीय विशेषता वाला वाद्ययंत्र है.इसलिए उस का चीनी राष्ट्रीय संगीत में व्यापक प्रयोग होता है.
सासाराम बिहार के फिरदौस खुर्शीद,निकहत फातमा,अशीफ़ अली का सवाल है कि चीन में अंगूर की खेती किन-किन प्रांतों में होती है तथा अंगूर से बनी शराब का किन-किन देशों में निर्यात किया जाता है?
दोस्तो,चीन के लगभग सभी क्षेत्रों में अंगूर की खेती होती है.पर उत्तर पश्चिमी भाग के सिनच्यांग वेवूर स्वायत्त प्रदेश,पीली मिट्टी पठारीय क्षेत्र,पूर्वी भाग के पोहाई खाड़ी क्षेत्र,मध्य भाग के कुछ प्रांतों में अंगूर की बड़ी मात्रा में खेतीबारी की जाती है.
सिनच्यांग,शानतुंग,हपे,ल्याओनिंग औऱ हनान में अंगूर की खेती का क्षेत्रफल और अंगूर का उत्पादन पूरे देश का क्रमश: 63.7 प्रतिशत और 69.8 प्रतिशत आंका गया है.
ध्यान रहे कि चीन में पैदा होने वाले अंगूर में ज्यादा मिठास होने के कारण वह अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बहुत लोकप्रिय है.पिछले 2 सालों में भारत ने भी चीन से बड़ी मात्रा में अंगूर का आयात किया है.
शराब बनाने में इस्तेमाल किए जाने वाला अंगूर अलग किस्म का होता है.चीन में इस किस्म के अंगूर की खेती का क्षेत्रफल 60 हजार हेक्टर है,जो तमाम किस्मों के अंगूर की खेती के कुल क्षेत्रफल का 15.3 प्रतिशत मात्र है.इस तरह के अंगूर से बनी शराब का मुख्यत:अमरीका,यूरोपीय संघ के सदस्य देशों,जापान,दक्षिण कोरिया,दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों औऱ कुछ अफ्रीकी देशों में निर्यात किया जाता है.अमरीका इस तरह की चीनी शराब का सब से बड़ा खरीददार है.
कटिहार बिहार के हरेंद्र प्रसाद साहा ने चीन के ताओधर्म के बारे में जानकारी पाने की इच्छा व्यक्त की है.
ताओधर्म या ताओपंथ चीन का मौलिक धर्म है.इस का प्रवर्तन सन् 142 में हुआ था और प्रवर्तक थे चांग-लिन.ताओपंथी लाओ-ज़ी को अपना गुरू मानते हैं.लाओ-ज़ी चीन के वसंत-शरद काल यानी ईसा से 770 वर्ष पूर्व औऱ ईसा से 481 साल पहले के काल के बीच हुए एक विचारक औऱ दार्शनिक थे.उन्हों ने नीति-शास्त्र नाम का एक ग्रंथ लिखा था,जिस में पथ या रास्ते की अवधारणा प्रस्तुत की गयी.लाओ-ज़ी की मान्यता थी कि पथ से एक का जन्म होता है और एक से दो,दो से तीन तथा तीन से विविध जीव व वस्तुएं उत्पन्न होती हैं.लाओ-ज़ी ने पथ को विश्व का मूल मानकर आकाश के महत्व को नकार दिया था.उन का विचार था कि सच्ची नीति कुछ करना ही है.उन का संदेश था कि मानव को अपनी लोलुपता पर नियंत्रण करना चाहिए औऱ तृप्त होने पर लड़ना-झगड़ना नहीं चाहिए.लाओ-ज़ी के नीति-शास्त्र का बाद में चीन के दर्शन-शास्त्र पर भारी प्रभाव पड़ा .
लाओ-ज़ी ने स्वयं किसी धर्म का प्रवर्तन नहीं किया था.दरअसल बाद में ताओपंथियों ने उन्हें अपना गुरू मान लिया.ताओपंथ के अनुसार जो मानव पथ को प्राप्त करता है,वह ऋषि-मुनि बनता है औऱ अमर होता है.इसलिए ताओधर्म तपस्या पर जोर देता है और तपस्या के उस तरीके में चिन्तन,ध्यान औऱ सूत्रों के पाठ के अलावा औषधि बनाना,उपवास रखना,मालिश करना तथा कसरत करना जैसी क्रियाएं शामिल हैं.

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