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(GMT+08:00) 2007-04-20 08:54:38    
प्राचीन लोनान का गांव डिकेर

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ईस्वी पांचवीं शताब्दी के समय प्राचीन रेशम मार्ग पर स्थित लोनान नामक एक महा नगर आकस्मिक रूप से भूमि पर से लुप्त हुआ , जो आज तक एक अनसुलझा रहस्य बना रहा है । लोनान के नष्ट होने के बाद वहां के निवासियों की कुछ संतानें रेशम मार्ग के अन्य स्थान पर स्थित डिकेर गांव में जा बसीं । कालांतर में उन की उत्तरवर्ती पीढ़ियों ने वहां विस्तृत रेगिस्तान के बीच एक नख्लिस्तान का विकास किया , आज के अल्पसंख्यक जाति कार्यक्रम के अन्तर्गत सिन्चांग का दौरा श्रृंखला में हम आप को इस प्राचीन गांव का दौरा करने ले जाएंगे।

डिकेर गांव आज सिन्चांग के तुरुफान बेसिन की श्यांश्यान काऊंटी के तहत है , उस के दक्षिण पूर्व में रोबुपो रेगिस्तान फैला हुआ है । डिकेर गांव वासी अपनी इस भूमि को देवता का वरदान समझते हैं , क्योंकि हर वसंत और शर्द मौसम में जब रेगिस्तान में रेतीली तूफान उड़ा करता है , लेकिन वह बहुत कम गांव की भूमि पर गिर पड़ता है और रेतीली तूफान प्रायः गांव के पूर्व और पश्चिम में खड़ी रेतीली टीलों तक मुड़ कर चले जाता है ।

डिकेर गांव के लोग बड़ी दीर्घ आयु के लिए भी बहुत मशहूर है , 500 परिवारों वाले इस गांव के पांच प्रतिशत निवासी उम्र में अस्सी साल से ऊपर पहुंच सकते हैं । गांव के मुखिया श्री ऊस्मान .यीबुलायन ने हमारे संवाददाता को बताया कि गांव वासियों की दीर्घ आयु का रहस्य संभवतः गांव में खुदे गर्म चश्मे के पानी में है । इस कुआ में शीतकालीन पानी का तापमान भी सेल्सेस तक पहुंचता है , पानी मिट्ठा और प्रचूर खनिज युक्त होता है । डिकेर गांव के नजदीक रेगिस्तान में खुदी सभी भूमिगत नहरें व कुएं अब सूख पड़ी हैं , किन्तु डिकेर गांव का यह कुआ सदियों से गर्म पानी से भरा रहता है । गांव मुखिया यीबुलायन ने कहाः

लोग कहते हैं कि पानी की कमी होने के कारण प्राचीन काल में लोनान शहर के निवासियों को अपनी जन्म भूमि को छोड़ देना पड़ा था , उस जमाने में डिकेर गांव के आसपास भी बीस तीस झीलें मौजूद थीं , झीलों की चारों ओर आदमकद ऊंचे सरपत घास उगते थे और हिरण , खरगोश और भेड़िया जैसे जंगली जानवर रहते थे । बाद में जन संख्या के लगातार बढ़ने तथा सिंचाई के लिए भूमिगत नहर व कुआ खोदने के परिणामस्वरूप बहुत से भूमिगत कुएं सूख पड़े और झीलें भी गायब हुईं , इस तरह पहले के दो सौ भूमिगत कुए नष्ट हो कर मात्र एक रह गया ।

आज से सौ साल पहले , स्वीडन के अन्वेषक सिवन.हेडिंग ने स्थानीय गाइडों के साथ अपार अनंत रेगिस्तान में रेतों के नीचे दबे प्राचीन लोनान शहर के खंडहर का पता लगाया । तत्कालीन स्थानीय गाइडों की संतानें अब भी डिकेर गांव में रहते हैं । 80 वर्षीय बुजुर्ग येहया. शायिम उन में से एक हैं । उन के पूर्वजों ने खुदाई में दृष्टवृत्त प्राचीन लोनान शहर का खंडहर देखा था । येहया. शायिम ने कहाः

मेरा परिवार पीढियों से लोनान शहर के नजदीक श्यांश्यान काऊंटी में रहता था , आज से एक सौ बीस साल पहले वहां रहने वाले अंतिम दसेक परिवार भी स्थानांतरित हुए , मेरे दादा जी का परिवार यहां से 150 किलोमीटर दूर सिंगर में जा बसा । सिंगर में बहुत से चश्मे ,घास मौदान और उपजाऊ भूमि मिल सकती थी , अंततः मेरा परिवार चार पीढ़ियों तक वहां रह गया । वर्ष 1960 में दादा जी के साथ हम डिकेर में आये।

पता चला है कि डिकेर गांव का इतिहास 500 साल से अधिक रहा है । तत्काल लोनान शहर के लोगों को स्थानांतरण के लिए यहां से गुजरना पड़ता था । साथ ही डिकेर लोनान से सब से नजदीकी गांव भी है । स्थानीय कथन के मुताबिक यहां के निवासी पीढियों से अनेक बार हेर फेर कर अंत में डिकेर आ बसे हैं । पुरानी पीढी के डिकेर वासियों का लोनान निवासियों से जरूर किसी न किसी का नाता हुआ होगा । इस साल 82 साल के बुजुर्ग डिकेर वासी बयाजी.अजी ने इस के बारे में कहाः

मेरे सभी रिश्तेदार रोबुपो झील के नजदीक व्येली काऊंटी में रहते हैं । मेरी उम्र 16 साल के वर्ष में मेरे ताउ के साथ मैं पहली बार रोबुपो से गुजरा और व्येली काऊंटी पहुंच कर ताउ के घर वालों से मिले। उस साल से अब तक मैं कुल 33 बार रोबुपो गांव गया था । तत्काल में रोबुपो से गुजरने के लिए गधे की सवारी की आवश्यकता थी , जिस के पीठ पर पानी और नाउं जैसे खाने की चीजें लदी थी और एक निश्चित फासला चलने के बाद रास्ते पर पहचानने के लिए एक चिंह लगाना था , ताकि लौटने के समय गुमराह नहीं हो जाए । उस जमाने में रोबुपो गांव तक पहुंचने में बारह तैरह दिन लगते थे , तेज से तेज चलने पर भी दस दिन की जरूरत थी । रास्ता दस दिन से ज्यादा था , पर रास्ते पर घने घास पौधे उगते थे , जंगली जानवर बहुत ज्यादा थे , अकसर 50 से सौ तक के हिरण , जंगली ऊंट और जंगली घोड़े पास दौड़ते हुए गुजरते दिखाई देते थे ।

अब भी यह प्राचीन डिकेर गांव रहस्यों से भरा हुआ है , जो अधिक से अधिक चीनी और विदेशी पर्यटकों , पुरातत्वविदों और अन्वेषकों को रहस्योद्घाटन के लिए आकर्षित करता है । जब हमारे संवाददाता डिकेर आए , तो उस समय सौ से अधिक गवेषण प्रेमी यात्रियों ने डिकेर गांव में सिन्चांग के प्रथम खुमताग रेगिस्तार पार मैदानी दौड़ की प्रतियोगिता की रवानी रस्म में भाल लिया । डिकेर गांव के निकट स्थित खुमताग रेगिस्तान आकार में पक्षी पंख जैसा लगता है , जो बहुत अद्भुत और अनोखा है । ये गवेषण प्रेमी न केवल रेगिस्तान पार दौड़ में भाग ले रहे थे और उन की भूमि के अन्दर नष्ट हुए प्राचीन लोनान नगर के रहस्य का पता लगाने की भी योजना थी । प्रतियोगिता आयोजन कमेटी के अधिकारी तुंग वुचांग ने कहाः

श्यांश्यान काऊंटी के क्षेत्र में समृद्ध ऐतिहासिक अवशेष उपलब्ध होता है । डिकेर का अर्थ है दस तपस्या गुफाएं है । समुद्र तल की बराबर ऊंचाई पर अवस्थित होने के कारण इस गांव को शून्य डिग्री का गांव भी कहलाता है। चीन के हान राजवंश यानी ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से डिकेर गांव लोनान राज्य जाने का सुगम रास्ता था और लोनान शहर से सब से नजदीकी गांव भी है । श्यांश्यान में लम्बी पुरानी स्थानीय विशेषता वाली मानव संस्कृति देखने को मिलती है । वहां तुयोगो पहा़ड़ी घाटी में निर्मित सहस्त्र बुद्ध गुफा समूह श्यांश्यान और तुरूफान क्षेत्र में सब से पहले खोदा गया बौद्ध गुफा समूह है । गुफा समूह के आसपास प्राचीन ल्योचुंग नगर , पन्दरह किलोमीटर लम्बा विशाल युद्ध की सूचना देने वाला अग्नि बुर्ग और राजा लुकछिन का महल जैसे ऐतिहासिक अवशेष सुरक्षित है । नाना प्रकार के धर्मों ने विभिन्न ऐतिहासिक काल में इस क्षेत्र पर अपना अपना चिंग भी छोड़ कर रखा है ।

पांच सौ साल पुराना डिकेर गांव अब भी रेगिस्तान की रेतीली हवा में सिर ऊंचा करते हुए प्राचीन लोनान नगर की पहरी में खड़ा हुआ है , कई सदियों के समय के मार थपड़ से भी वह नष्ट नहीं हुआ , उलटे उस ने इस क्षेत्र को और अधिक रहस्यमय और पुरातन बनाया । दोस्तो , यदि आप को मौका मिला . तो जरूर डिकेर गांव जा कर खुद आंखों से देखें और रेगिस्तान के अन्दर दफनाए बीते वक्त के रहस्य को महसूस करें , यकीनन् है कि आप को अलग का अनुभव मिल जाएगा ।