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(GMT+08:00) 2007-04-16 14:02:17    
सुप्रसिद्ध चीनी फिल्म-अभिनेत्री लू-यान की कहानी

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सुश्री लू-यान अमरीकी ऑस्कर पुरस्कार चयन-कमेटी की एकमात्र पूर्वी सदस्या हैं। हालांकि वह 80 वर्ष की हो चली हैं,पर एक सुप्रसिद्ध चीनी फिल्म स्टार रह चुकी वह आज भी सुन्दर दिखाई देती हैं।मीडिया ने इस तरह उन का चित्रण किया है कि वह आज भी वैसी ही सुन्दर हैं,जैसी दशकों पहले थीं,बल्कि उन की बोलचाल में पहले से कहीं अधिक परिष्कृति आई है।

सुश्री लू-यान का जन्म चीन की राजधानी पेइचिंग में हुआ था। 1947 में वह मां-बाप के साथ अमरीका के सेन फ़्रांसिस्को चली गयीं ।लम्बे समय से वह चीन और अमरीका के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और दोनों देशों की जनता के बीच समझ को बढ़ाने के लिए काम करती रही हैं। चीन और अमरीका की बहुत सी श्रेष्ठ फिल्में,टीवी धारावाहिक,परंपरागत नाटक और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम उन्हीं की कोशिशों से एक दूसरे की जनता तक पहुंचे हैं। अमरीका का कार्टून《मिकी माउस एड डोनाक्डक》उन्हीं के द्वारा चीनी में अनुवादित किए जाने के बाद चीन में आयातित किया गया है। चीन के बहुत से अभिनेता और अभिनेत्रियों को उन के ही जरिए अमरीका जाकर फिल्म-शूटिंग के मौके मिले हैं। मिसाल के लिए चीनी फिल्म अभिनेत्री चांग ज़ी-ई और कुंग-ली की विश्वख्याति उन से अलग नहीं हो सकती है। उन का कहना हैः

"इस समय मैं सिर्फ पुल की भूमिका निभानी चाहती हूं, ताकि चीनी संस्कृति को पश्चिम तक पहुंचाया जा सके और अधिक से अधिक लोग अमरीका, चीन में फिल्में बनाएं।चीनी फिल्मकार उन के साथ सहयोग कर के उन की प्रगतिशील व्यवस्था सीख सकते हैं। और विदेशियों के चीन में आने से चीन को बड़ा आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो सकता है और साथ ही विदेशी अपनी आंखों से चीन की वास्तविकता देख सकते हैं एवं चीनी जनता की भावना महसूस कर सकते हैं। "

अमरीका जा कर बसने से पहले लू-यान को पेइचिंग में पेइचिंग ऑपेरा के सुप्रसिद्ध कलाकार मई लान-फांग और खुन-छ्वु शैली के ऑपेरा के सुप्रसिद्ध कलाकार य्वी जंग-फेई से कला सीखने का मौका मिला। उन के कलात्मक निर्देशन में लु-यान ने इन दो शैलियों के ऑपेराओं की अभिनय-कला पर महारत हासिल की थी। विभिन्न विषयों के ऑपेराओं में भूमिका निभाने के दौरान उन्हों ने अपने अभिनय का अदभुत कौशल दिखा कर दर्शकों की उत्साहपूर्ण तालियां और वाह-वाह हासिल की। 1980 में लू-यान ने अमरीका में 《पेइचिंग ऑपेरा कृतियों का संग्रह》संपादित कर प्रकाशित किया। इस संग्रह के जरिए उन्हों ने पश्चिमी दर्शकों में चीनी जनता की सही छवि स्थापित करने की कोशिश की। अमरीका में बसी होने के बावजूद लू-यान हमेशा अपनी चीनी पहचान को याद रखती हैं।

अक्तूबर 1979 में लु-यान अमरीका से पहली बार चीन की मुख्यभूमि लौटीं। उन्हों ने चीन के सभी पर्यटन-स्थलों का दौरा किया। तिब्बत की अद्वितीय सुन्दरता से प्रभावित होकर वे 1984 में एक विशेष फिल्म निर्माण दल के साथ तीन बार तिब्बत गईं। इस दल ने वहां की सुरम्य प्रकृति,तिब्बतियों के रहन-सहन,स्थानीय संस्कृति व कला एवं धार्मिक रीति-रिवाज पर एक लम्बी टीवी फिल्म बनाई। इस फिल्म को न्यूयॉर्क के 28वें अतर्राष्ट्रीय टीवी समारोह में तीसरा पुरस्कार प्राप्त हुआ।

सितम्बर 1988 में लु-यान ने "वाइस ऑफ़ अमरीका" के विशेष कार्यक्रम के निदेशक की हैसियत से चीन की यात्रा की। यात्रा के दौरान उन्हों ने एक तरफ़ चीनी लोगों को अमरीका में रह रहे चीनियों के जीवन और कार्यों के बारे में जानकारी दी और दूसरी तरफ समय रहते अमरीकी श्रोताओं को चीन में कलाकारों के जीवन और कार्यों से अवगत कराया। उन के कार्यक्रमों की चीनी और अमरीकी जनता ने खूब सराहना की। उसी साल वह अमरीकी ऑस्कर पुरस्कार चयन कमेटी की सदस्य बनीं और उस के बाद उन्हें लोस एंजलिस के महापौर ने अमरीकी नागरिकता वाले एशियाइयों का असाधारण अभिनय-कला पुरस्कार प्रदान किया।

वर्ष 2000 में लु-यान को संयुक्त राष्ट्र एसोसिएशन के अंतर्राष्ट्रीय शांति संस्कृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस ने उन की जिन्दगी में चार चांद लगा दिए हैं। उन का कहना है कि चाहे उन की जिन्दगी में कोई भी परिवर्तन क्यों न आए, चीन की परंपरा,संस्कृति, दुख-सुख और इज्जत- बेइज्जती हमेशा उन के ख्याल में है।