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(GMT+08:00) 2007-02-09 08:58:31    
अंग्रेजी में लोक गीत गाने वाली सिन्चांग कलाकार सेयाला

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चीन के सिन्चांग में विविध जातीय संगीत सुनने को मिलते हैं , अपनी अलग पहचान रखने वाले सिन्चांग के लोक गीत कलाकारों व गायक गायिकाओं की आवाज के साथ विश्व की विभिन्न जगहों तक पहुंचाये गए हैं । सिन्चांग कला कालेज के असिसटेंड प्रोफेसर सुश्री सेयाला ऐसे कलाकारों में से एक है , जिन्हों ने अंग्रेजी भाषा में सिन्चांग के लोक गीत गाने के जरिए विश्व को सिन्चांग के जातीय संगीत से अवगत कराया है ।

सिन्चांग कला कालेज में सेयाला की संगीत कक्षा में एक प्यानो बड़ा ध्यानाकर्षक है , शिक्षार्थी बड़े लगन से सेयाला को श्वेत मत्स्य युवती नामक गीत बजाते सुनते हैं । सुश्री सेयाला की आयु इस साल 40 वर्ष से ज्यादा है । लेकिन उन के भाव हाव में कलाकार का विशेष व्यक्तित्व झलकता है और जातीय विशेष पोशाक में वे बड़ी सुशील और आकर्षक दिखती है । पिछले कई दशकों में सिन्चांग लोक गीतों का गायन उन के जीवन का एक अभिन्न भाग बना है। इस पर चर्चा करते हुए उन्हों ने कहाः

जब मैं एक छोटी लड़की थी , मेरे माता पिता केन्द्रीय जातीय प्रकाशन गृह में काम करते थे , मां जी कभी नृत्यगान मंडली में भी काम कर चुकी थी, वे नाच गान में पारंगत है , घर में हमेशा गाने की आवाज सुनाई देती थी , पिता जी भी संगीत के उस्ताद है , वे अकसर हमारे गायन में आयी गलती इंगित कर बताते थे । इस प्रकार के माहौल में मैं और मेरे भाई बहन सभी गाने के शौकिन हो गए ।

वर्ष 1971 में 16 वर्षीय सेयाला तत्कालीन नीति के मुताबिक सिन्चांग के थुरूफान बेसिन के ग्रामीन क्षेत्र में कृषि श्रम के लिए गयी , हालांकि वहां की जीवन स्थिति कठिन थी , लेकिन लोक गीत गाने से उन्हें बड़ा आनंद भी मिलता था ।

18 साल की उम्र में सेयाला के पिता का देहांत हुआ , पिता की यह आधूरी उम्मीद थी कि सेयाला को विश्वविद्यालय में पढ़ने का मौका मिले । पिता की उम्मीद को साकार करने के लिए सेयाला ने संगीत कालेज में दाखिला करने के लिए कोशिश करने की ठान ली । उन्हों ने कहाः

यह सपना बराबर मुझे प्रेरित करता रहा । मेरे घर के पीछे एक भोजनालय में उस समय बहुत सी पुरानी किताबें रखी हुई थी , मौका पाते ही मैं वहां जाकर परीक्षा के लिए संबद्ध किताबें पढ़ती थी । दिन में मैं नौकरी करती थी , गीत गाती थी , रात में मैं पाठ्यपुस्तकें पढ़ती थी । मेरे स्वास्थ्य के ख्याल से मां और बड़े भाई मुझे इस कदर परिश्रम करने से मनाते थे , पर मैं अपने इरादे पर कायम रही ।

गायन सुश्री सेयाला के जीवन का एक भाग बन गया और उस ने उन के केरियर के लिए द्वार भी खोला । वर्ष 1978 में सिआन संगीत कालेज ने छात्रों का दाखिला आरंभ किया , सुश्री सेयाला ने अपनी सुरीली आवाज , श्रेष्ठ गायन शैली और सुशील व्यक्तित्व तथा अतूल्य कलात्मक मौह शक्ति के जरिए परीक्षकों को वशीभूत कर दिया , उन्हों ने पक्के विश्वास के साथ दावा किया कि प्रतिभाशाली सेयाला भविष्य में चीन के संगीत मंच पर एक असाधारण कलाकार के रूप में उभरेगी ।

सुश्री सेयाला सिआन संगीत कालेज की छात्रा बनी । वे इस मुश्किल से मिले अवसर को बहुत कीमती समझती थी और कड़ी मेहनत से अध्ययन करती थी । अस्सी वाले दशक के शुरू में वे स्नातक हुई और उन की गायन प्रतिभा भी अल्प समय में ही चीनी संगीत क्षेत्र में मान्य हो गयी।

वर्ष 1988 में उन का प्रथम एल्बम निकला , जिस में सभी सिन्चांग के लोक गीत हैं । चीन के शांगहाई संगीत कालेज के एक प्रोफेसर ने सेयाला की कला पर समीक्षा करते हुए कहा कि उन की घंटी जैसी सुरीली आवाज से सिन्चांग के लोक गीतों को पूरी दुनिया में फैलाने देना चाहिए । सेयाला का गाया याद नामक गीत टेप करके रेडियो पर प्रसारित किया गया , ज्यादा देर नहीं चली कि उन के गीत पूरे सिन्चांग में लोकप्रिय हो गए और स्थानीय लोगों ने बड़े स्नेह से उन्हें बुलबुल कह कर संबोधित किया ।

इस के बाद सुश्री सेयाला ने इटाली , ट्यूनिशिया और मोरोक्को आदि दसेक देशों व क्षेत्रों का दौरा किया और सिन्चांग के लोक गीतों को दुनिया के कोने कोने तक पहुंचाया । विश्व यात्रा से सेयाला का दृष्टिकोण और विस्तृत हुआ और कला जीवन पर उन की नयी समझ उत्पन्न हुई । उन का सिन्चांग लोक गीतों को पूरी दुनिया में लाने का संकल्प और पक्का हो गया ।

अस्सी वाले दशक में सुश्री सेयाला को चीन के विख्यात लोक गीत बादशाह श्री वांग लो पीन से मिलने का सौभाग्य मिला था । लोक गीत के इस बुजुर्ग उस्ताद ने उन्हें अंग्रेजी में सिन्चांग लोक गीत प्रस्तुत करने की सलाह दी । इस की याद करते हुए सुश्री सेयाला ने कहाः

श्री वांग ने मुझे सिन्चांग लोक गीतों को अंग्रेजी में अनुवाद कर गाने की सलाह दी , यह काम पहले किसी चीनी ने नहीं किया था । उन्हों ने मुझे कुछ अंग्रेजी भाषा के प्रोफेसरों तथा ब्रिटिश विशेषज्ञों से मिलवाया और उन से लोक गीतों को अंग्रेजी में अनुवादित करवाया ,मैं अंग्रेजी में गाना गाने का अभ्यास करने लगी , शुरू शुरू में मैं इस की आदि नहीं थी , लेकिन बारंबार अभ्यास करने से मैं ने इस गायन पर महारत हासिल की है ।

अंग्रेगी में गीत गाना सुश्री सेयाला के लिए एक परिश्रम का काम था , वे रोज पो फटते ही उठती थी और अभ्यास करती थी , रात को घर वालों के सोने के बाद वे अकेली प्यानो पर संगीत बजाती थी । श्री वांग लो पीन भी उन की मदद करने के लिए साइकिल पर दस से ज्यादा किलोमीटर रास्ता तय कर आते थे । कड़ी मेहनत का रंग आया और सुश्री सेयाला अंग्रेजी में सिन्चांग लोक गीत गाने में कुशल हो गयी ।

आगे सुश्री सेयाला सिन्चांग कला कालेज की संगीत शिक्षक बनी , उन्हों ने अवकाश समय में अंग्रेजी में गाये सिन्चांग लोक गीतों का एक एल्बम निकाला और रोछिलान नामक अंग्रेजी लोक गीत संग्रह प्रकाशित हुआ।

वर्ष 1995 में सेयाला ने इटाली के अन्तरराष्ट्रीय जातीय कला उत्सव में अंग्रेजी में सिन्चांग लोक गीत पेश किए , जिसे असाधारण सफलता मिली । बहुत से विदेशी कला मंडलियों ने उन्हें कला प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया । लेकिन उन्हों ने सिन्चांग लौटने का निश्चय किया और क्लासिक संगीतों और लोक गीतों को संकलित कर अपने अनुभवों को अपने छात्रों को सिखाया । उन के छात्र मामाती ने कहाः

अध्यापिका सेयाला हर काम को संजिदगी से बरतती है ,वे हरेक छात्र की विशेषता के मुताबित सिखाती है और उन्हें अपनी अलग पहचान कायम करने को प्रेरित करती है ,यह एक अतूल्य काम है ।

सेयाला ने अपने अध्यापन जीवन में अनेक श्रेष्ठ छात्रों को प्रशिक्षित किया है और बहुत से लोग स्नातक होने के बाद मशहूर कलाकार बने हैं और कुछ डाक्टर डिग्री के हकदार भी हो गए हैं । सुश्री सेयाला को इस पर बड़ी खुशी महसूस हुई और नयी पीढी को प्रशिक्षित करने का ऊंचा लक्ष्य भी बनाया ।