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(GMT+08:00) 2006-12-22 09:49:39    
सिन्चांग की विविध लोक सांस्कृतिक कलाएं

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विशेष भौगोलिक स्थान होने के कारण चीन का सिन्चांग वेवूर स्वायत्त प्रदेश प्राचीन काल से चीन और पश्चिम के बीच सांस्कृतिक आदान प्रदान का संगम स्थल रहा है । इस से लम्बे अरसे में सिन्चांग में प्रचूर विविध सांस्कृतिक कलाएं उत्पन्न हुईं , जो आज वहां की विभिन्न जातियों में फिर से विकसित हो गई हैं । इस साल के सितम्बर में सिन्चांग में आयोजित प्रथम लोक सांस्कृतिक कला उत्सव में बहुत से लोक कलाकारों ने अपनी अपनी अनोखी कला का प्रदर्शन किया , जिस ने दर्शकों को बेहद मोहित कर लिया ।

25 से 29 सितन्बर तक सिन्चांग का प्रथम लोक सांस्कृतिक कला उत्सव सिन्चांग वेवूर स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ऊरूमुची में आयोजित हुआ । समारोह में सिन्चांग के 14 प्रिफेक्चरों से आए तीन सौ से ज्यादा लोक कलाकारों ने भी भाग लिया और अनेक मन मोहक परम्परागत लोक कलाओं का प्रदर्शन किया , जिन में विभिन्न जातियों के लोक संगीत , नृत्य , वाचन कला तथा ओपेरा शामिल है ।

सिन्चांग की विभिन्न जातियों द्वारा प्रस्तुत शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रमों में वेवूर जाति का बारह मुकाम नामक लोक गीत नृत्य अपनी विशेषता के कारण सब से आकर्षक है । बारह मुकाम 12 नृत्य गान भागों से गठित है , जो संगीत , साहित्य , नृत्य और लोक प्रथा से मिश्रित एक बड़ा आकार वाला सांस्कृतिक कार्यक्रम है । बारह मुकाम वेवूर जाति के जीवन का विश्व कोष और जीवित कला धरोहर माना जाता है । वर्ष 2005 में युनेस्को ने उसे मानव के मौखिक व गैर भौतिक सांस्कृतिक धरोहरों की सूची में शामिल किया । प्रथम सिन्चांग लोक सांस्कृतिक कला उत्सव में बारह मुकाम का प्रदर्शन किया गया । समारोह के उद्घाषक ने परिचय देते हुए कहाः

मैगाईती काऊंटी के लोक कलाकार जब मुकाम के गीत गाने लगे , तो वे इतना मस्त होते हैं कि सब कुछ भूल जाते है । उन का पूरा मन इस परम्परागत कला की लहर में बह रहा है । उन्हों ने वर्ष 2003 में फ्रांस , जापान और ब्रिटेन में मुकाम का प्रदर्शन किया , जिस ने वहां के व्यापक दर्शकों का जोशीला स्वागत प्राप्त किया । इन लोक कलाकारों ने मुकाम के प्रचार प्रसार के लिए असाधारण योगदान किया है । ताओलांग का मुकाम और बड़ी मोहक शक्ति रखता है ।

मैगाईती काऊंटी ताओलांग मुकाम का जन्म स्थल है । ताओलांग मुकाम सिन्चांग के अन्य स्थानों में प्रचलित मुकाम की तूलना में ज्यादा तेजस्वी और जोशखरोश लगता है । वर्तमान में ताओलांग मुकाम जानने वाले बुजुर्ग कलाकारों की संख्या तीन सौ से भी कम रह गयी है और इस के पूरे नौ भागों की धुन बजाने में सक्षम लोगों की संख्या और कम है । इन मूल्यवान बुजुर्ग लोक कलाकारों के संरक्षण के लिए मैगाइती काऊंटी ने उन का इतिहास फाइल बनाया और हर पहलु में उन की देखभाग की जाती है , ताकि उन्हें ताओलांग मुकाम के संकलन व विकास के लिए ज्यादा समय और शक्ति मिल सके ।

सिर पर कटोरी लदाते हुए नाचने की कला भी सिन्चांग की विभिन्न अल्पसंख्यक जातियों में लोकप्रिय कला विशेष रही है । कटोरी नृत्य नृत्य कला और कलाबाजी का मिश्रित कला विधा होती है । कलाकार को नाचने तथा सिर पर कटोरी लदाने की कलाबाजी दोनों पर महारत हासिल होना चाहिए । काश्गर से आए बुजुर्ग वेवूर लोक कलाकार रोजी एयीफ ने जो सिर पर कटोरी का नृत्य प्रस्तुत किया , उस ने दर्शकों का मन बरबस जीत लिया । सफेद बालों वाले इस बुजुर्ग ने गाते नाचते हुए सिर पर कटोरी की जगह गोलाकार खरबूज रख कर कला प्रदर्शन किया , वे दोनों पैरों को झुकाए बाहों को फैला कर हवा की चक्की की भांति पांवों के बल पर तेज गति से घूम रहे हैं कि सिर पर रखा गया खरबूज भी जस का तस अडिग रहा । उन की इस अनोखी कलाबाजी के लिए दर्शकों ने बारंबार ताली बजा कर वाहवाही दी ।

श्री रोजी ने कहा कि मैं 12 साल की उम्र में ही सिर पर कटोरी रख कर नाचना सीखने लगा , धीरे धीरे मेरी कलाबाजी परिक्कव हो गयी , तब सिर पर तरबूजा या खरबूज रख कर नाचने की कोशिश करता रहा । बाद में मैं इस कला में माहिर हो गया और इस विशेष कला को संरक्षित करने के लिए मैं नयी पीढियों को सिखाना चाहता हूं । इसलिए मैं गांव से दो बार काश्गर और एक बार ऊंरूमुची आया ।

पहली बार ऊरूमुची आए रोजी एयीफ आधुनिक जीवन से बहुत प्रभावित हो गये , वे दुर्गम और पिछड़े हुए सरहदी गांव में रहते हैं , आधुनिक जीवन से ओतप्रोत ऊरूमुची उन के लिए एक बिलकुल नयी दुनिया जैसी है । प्रथम ऊरुमुची सांस्कृतिक कला उत्सव ने उन के जैसे लोक कलाकारों को स्थानीय लोक कला दिखाने का मौका प्रदान किया , इसी तरह के प्रयासों ने सिन्चांग के लोक कला और परम्परागत संस्कृति को नए जीवन के रक्त का संचार किया है ।

सिन्चांग के लोबुबो बेसिन में शेर नृत्य हजार सालों से प्रचलित आया है । वह शुद्ध स्थानीय लोक कला है । इस के प्रदर्शन के लिए कलाकार को शारीरिक शक्ति और बुद्धिमता की जरूरत है । यह कला विशेष भी राष्ट्रीय कला खजाने में सिन्चांग की अल्प संख्यक जातियों का एक दान है । इस साल 86 वर्षीय लोबुबो बुजुर्ग कलाकार श्री येसन साइपिदिन वीलि काऊंटी में इस कला में पारंगत एकमात्र व्यक्ति है । प्रथम कला उत्सव के समारोह में उन्हों ने एकल शेर नृत्य पेश किया, जिस ने दर्शकों की बारंबार वाहवाही लूटी ।

सफेद व लम्बी दाढी वाले बुजुर्ग कलाकार येसन ने विविध मुद्रा बना कर शेर का नाच सजीव प्रदर्शित किया है । वे 13 साल की उम्र में ही यह नृत्य सीखने लगे , अब तक नाचते नाचते 70 साल हो चुके हैं। उन्हों ने कहाः

शेर नृत्य हजारों साल पहले लोबु जाति द्वारा विकसित किया गया प्राचीनतम नृत्य है । कहा जाता है कि अतीत में एक लोबु वासी ने एक मां से छूटे नन्हीं शेर बच्चा पाया , उस ने शेर के बच्चे को लोबुबो नदी का पानी पिलाया , शेर का बच्चा धीरे धीरे बढ़ता गया और उस लोबु वासी ने उस के चाल भाव की नकली कर शेर नृत्य का आविष्कार किया , जो सदियों से अब तक विरासत में प्राप्त हो कर प्रचलित हो रहा । शेर नृत्य से शांति के लिए लोगों की मनसूबा अभिव्यक्त होती है ।

श्री येसन साइपिदिन लोबु वासियों में शेर नृत्य जानने वाले अंतिम लोक कलाकार है , इस कला विशेष को लुप्त होने से बचाने के लिए उन्हों ने दो शिल्य गृहित किया , जिन में एक उन का छोटा पोता है ।

सिन्चांग में विभिन्न किस्मों के नृत्य गान कलाओं के अलावा खादी वस्त्रों के प्रोसेंसिंग , प्राचीन रंग रूप के चीनी मिट्टि के बर्तन , सुन्दर मुर्ति कला और वेवूर परम्परागत औषधि व चिकित्सा पद्धति भी प्रथम सांस्कृतिक कला उत्सव के अहम भाग हैं । इन खात्मासन्न गैर भौतिक सांस्कृतिक धरोहरों ने दर्शकों को प्राचीन इतिहास की याद और पुरानी सभ्यता का आश्चर्य दिलाया है ।

इन महत्वपूर्ण सांस्कृतिक विरासतों के संरक्षण के लिए सिन्चांग के विभिन्न स्थानों में लोक कलाओं के आदान प्रदान की विविध गतिविधियां चलायी गयी और कला प्रदर्शन , वस्तु प्रदर्शनी तथा अकादमिक अनुसंधान बैठक आयोजित कर विभिन्न तबकों का ध्यान सिन्चांग के लोक कला की ओर खींचने की भरसक कोशिश की जा रही है ।

मुकाम जैसे विश्व महत्व वाली कला विरासत की रक्षा केलिए सिन्चांग की स्वायत्त प्रदेश सरकार ने छै बार अन्तरराष्ट्रीय कला अनुसंधान बैठक बुलायी है । प्रदेश सरकार के उपाध्यक्ष श्री कुरेशी मैहेसुती ने कहाः

मौजूदा कला उत्सव ने सिन्चांग की श्रेष्ठ कला संस्कृति के विकास को बढ़ावा दिया है और गैर भौतिक सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए योगदान किया है । मुझे विश्वास है कि कला उत्सव इतिहास को आधुनिक काल के साथ जोड़ने तथा विविध रूपों की संस्कृतियों को आपस में मिलाने वाले पुल का काम आएगा और व्यापक लोगों को सिन्चांग की लोक कला की श्रेष्ठता से अवगत कराएगा ।