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आज के इस कार्यक्रम में मऊ उत्तर प्रदेश के आरिफ उसमान फ़ारूकी,बिलासपुर छत्तीसगढ़ के चुन्नीलाल कैवर्त,आज़मगढ़ उत्तर प्रदेश के काजी मनजिल हैदरावाद,रामपुरफुल पंजाब के बलवीर सिंह,कोआथ बिहार के सुनील केशरी औऱ उन के साथियों के पत्र शामिल हैं।
मऊ उत्तर प्रदेश के आरिफ उसमान फ़ारूकी और बिलासपुर छत्तीसगढ़ के चुन्नीलाल कैवर्त ने अपने पत्रों में क्रमश:पूछा है कि चीन की साक्षरता दर कितनी है और चीन की ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में साक्षरता कितने प्रतिशत है?
भैय्या,वर्ष 1949 में चीन लोक गणराज्य की स्थापना के समय पूरे चीन की 80 प्रतिशत जनसंख्या निरक्षर थी.इतनी अधिक जनसंख्या को साक्षर बनाना कोई आसान काम नहीं है.फिर भी चीन सरकार के अथक प्रयासों के फलस्वरूप आज चीन की 93.6 प्रतिशत आबादी पढी-लिखी हो गयी है.चीन में करीब 10 साल पहले साक्षरता-अभियान मुख्यत:15 से 50 साल की उम्र वाले लोगों में चलाया गया.ऐसे लोगों में अनपढ़ों की तादाद लगभग 3 करोड़ 75 लाख थी.उन्हें साक्षर करने के लिए सभी स्तरों पर प्रयास किए गए.वर्ष 2001 के अंत तक इस आयु-सीमा के लोगों में एक भी अनपढ शेष नहीं रह गया.2001 से 2004 तक चीन में हर साल 20 लाख से अधिक निरक्षर लोगों को साक्षर बनाया गया.अब चीन के शहरी इलाके में निरक्षरता नहीं रह गयी है.जो 6.4 प्रतिशत लोग अनपढ़ हैं,वे सब ग्रामीण इलाके में बसे हैं और उन की संख्या कम होती जा रही है.इस के अलावा चीन में लगभग सभी स्कूली उम्र वाली लड़कियों को स्कूलों में दाखिला मिल सका है.साक्षरता के क्षेत्र में चीन विश्व में विकासशील देशों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा हो गया है. चीन में निरक्षरता-निवारण अभियान में प्राप्त उपलब्धियों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने चीन को कुल 13 पुरस्कारों से सम्मानित किया है.
21वीं शताब्दी के पहले 20 वर्षों में चीन की आम शिक्षा का लक्ष्य था कि 2010 तक देश भर में नौ वर्षीय अनिवार्य शिक्षा सर्वांगींण रूप से बखूबी लागू की जाएगी और ग्रामीण इलाके में अनपढ़ लोगों का अनुपात 4 प्रतिशत से कम किया जाएगा.
आज़मगढ़ उत्तर प्रदेश के काजी मनजिल हैदरावाद और रामपुरफुल पंजाब के बलवीर सिंह पूछते हैं कि चीनी जनता का मुख्य आहार क्या है?
मित्रो,जैसा कि आप जानते हैं कि चीन एक बहुजातीय देश है.इस की विभिन्न जातियों के अपने-अपने मुख्य आहार हैं.हां,लगभग सभी चीनी लोग मांसाहारी होते हैं.यह मेरे ख्याल में पर्यावरण,मौसम औऱ खाने की आदत से संबंधित है.चीन का अधिकांश भाग शीतोष्णकटिबंध में अवस्थित है.सर्दी से बचने के लिए चरबी की बहुत जरूरत है और चरबी का एक महत्वपूर्ण स्रोत पशुओं का मांस है.
चीन में बहुसंख्यक हान लोगों को सुअर का मांस खाना पसंद है.ऐसा इसलिए क्योंकि हान लोगों में सुअर-पालन की परम्परा है.चीनी मुसलमान मटन और गोश्त खाते हैं.इस का मतलब यह नहीं है कि चीनी लोग मांस के अलावा अन्य कुछ भी नहीं खाते.चीनी लोग चावल,आटा,सब्जियां ज्यादा खाते हैं और केवल तरकारियों में थोड़ा सा मांस डालते हैं.जहां तक चीनियों में कुत्ते,सांप और अन्य पशुओं के मांस के सेवन का सवाल है,उस का बहुत कम चीनियों से ताल्लुक है.दरअसल चीन में बहुत कम ही लोग इन का मांस खाते हैं.इधर के सालों में चिकित्सकों ने बारंबार चेतावनी दी है कि मांस में ज्यादा चरबी होती है,जो स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है.ज्यादा मांसाहार से कई तरह के रोग हो जाते हैं,अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए बहुत से चीनी लोग मांस कम खाने लगे हैं,लेकिन मांस में चरबी के अलावा अनेक पौष्टिक तत्व भी होते हैं.लिहाज़ा मेरे विचार में उसे बिल्कुल न खाना भी उचित नहीं है.
यह भी बताना जरूरी है कि उत्तरी चीन के निवासियों को आटे से बनी खाद्य चीजें बहुत भाती हैं,विशेषकर समौसे जैसा च्याओ-त्ज ,जो मुख्य रूप से पानी में उबाल कर पकाया जाता है,उन्हें सब से अधिक पसंद है.दक्षिणी चीन के निवासी चावल खाने के आदी हैं.रोटियों जैसी आटे से बनी खाद्य वस्तुएं उन के लिए किसी केक की तरह होती हैं,औपचारिक भोजन नहीं.इसलिए चावल के बिना उन का पेट भरना मुश्किल है.इस का कारण यह है कि उत्तरी चीन में गेहू की पैदावार अधिक होती हैं और दक्षिणी चीन में शुद्ध रूप से धान की पैदावार.इस तरह दोनों भागों के निवासियों को अपने-अपने खाद्य पदार्थ खाने की आदत है.हां,उत्तरी लोगों के स्वाद में ज्यादा नमक और दक्षिणी लोगों के स्वाद में थोड़ा मीठा होने की जरूरत है.
कोआथ बिहार के सुनील केशरी औऱ उन के साथियों का सवाल है कि चीन में सांस्कृतिक विरासत उत्सव दिवस किस दिन मनाया जाता है?
मित्रो,चीन में हर साल जून माह के दूसरे शनिवार को सांस्कृतिक विरासत उत्सव मनाया जाता है।

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