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(GMT+08:00) 2006-11-03 15:56:02    
छिन-हान काल के विदेशों के संबंध

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चिकित्सा के क्षेत्र में, चाङ चुङचिङ के ग्रन्थ"शाङ हान चा पिन लुन"(बुखारों व अन्य रोगों के बारे में) का प्राचीन चिकित्सा पर गहरा प्रभाव पड़ा था।

उन्हें अपने समय में चिकित्सक सन्त के रूप में अत्यधिक सम्मान व गौरव प्राप्त हुआ।

उनके जमाने के एक अन्य ख्यातिप्राप्त चिकित्सक ह्वा थ्वो चिकित्सा विज्ञान की बहुमुखी प्रतिभा रखने के साथ साथ एक्यूपंक्चर और शल्य चिकित्सा में विशेष रूप से निपुण थे।

उन्होंने दुनिया में सबसे पहले आपरेशन में मरीज को संवेदनाशून्य

छिन-हान काल में चीन और विदेशों के बीच सांस्कृतिक व आर्थिक आदान-प्रदान में उल्लेखनीय प्रगति हुई थी। सम्राट ऊती के शासनकाल में ही द्वीपीय देश जापान के साथ सम्पर्क कायम करना शुरू हो गया था।

57 ईसवी में यामातो नामक एक जापानी राज्य ने अपना एक दूत उपहारसहित चीन भेजा था।

पूर्वी हान राजवंश के सम्राट क्वाङऊ ने उसके राजा को एक सोने की मुहर भेंट की थी, जिसका पता 1784 में जापान के क्यूशू द्वीप में लगा था।

चीन में तैयार कांसे, लोहे और रेशम की चीज़ें जापान भेजी जाती रहीं और जापान के हथियार व दूसरे उत्पाद चीन लाए जाते रहे।

पश्चिमी हान राजवंश के काल में चीन ने दक्षिणपूर्वी एशिया और दक्षिणी एशिया के अनेक देशों के साथ सम्पर्क कायम किया।

उस समय लोग समुद्री रास्ते से आज के क्वाङतुङ प्रान्त की श्वीवन काउन्टी या आज के क्वाङशी स्वायत्त प्रदेश की हफू काउन्टी से रवाना होकर, दक्षिणी चीन सागर (नानहाए सागर) के द्वीपों से होते हुए, मलय प्रायद्वीप और बर्मी समुद्रतट के किनारे के कई देशों या भारत के कांची राज्य तक जाया करते थे।

चीन के पश्चिमी क्षेत्रों के स्थलमार्गों से पश्चिमी एशिया के अनेक देशों के साथ भी सम्पर्क कायम किए गए थे।