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ईसापूर्व 60 में पश्चिमी हान सरकार ने खुनलुन पर्वतश्रृंखला के उत्तर में, थ्येनशान पर्वतश्रृंखला के दोनों ओर और दूर बालकश झील तक फैले विशाल क्षेत्र में अपना शासन चलाने के लिए बुगुर में पश्चिमी क्षेत्र-प्रशासन की स्थापना की थी।
पश्चिमी हान राजवंश के उत्तरकाल में कुलीन लोग, उच्च अफसर और बड़े जमींदार ज्यादा से ज्यादा जमीन हड़पने लगे थे, जिससे अधिकाधिक उपजाऊ जमीन उनके हाथ आती गई और व्यापक किसान समुदाय भूमिहीन बनता गया।
ये भूमिहीन किसान खानाबदोश होकर जगह-जगह मारे-मारे फिरने लगे या अपने को दासों के रूप में बेचने लगे। जैसे-जैसे सामाजिक अन्तरविरोध तीव्र से तीव्रतर होते गए, वैसे-वैसे किसान –विद्रोहों का तूफान प्रचण्ड रूप से उठता गया।
फलस्वरूप, पश्चिमी हान राजवंश के शासन की नींव खोखली हो गई। छै ईसवी में हान राजघराने के रिश्तेदार वाङ माङ ने सम्राट फिङती से सत्ता छीन ली।
9 ईसवी में उसने शिन के नाम से एक नए राजवंश की स्थापना की। सामाजिक अन्तरविरोधों को शिथिल बनाने के हेतु उसने अफसरशाही व्यवस्था, मुद्रा-प्रणाली, भूमि-व्यवस्था, कराधान और सरकारी इजारेदारी समेत अनेक क्षेत्रों में सुधार लागू किए। लेकिन उस के अधिकतर सुधार वास्तविकता के अनुरूप नहीं थे।
इस के अलावा, सुधारों के मुद्दे बहुत पेचीदा होते थे और उनका नियमन करने वाले कानूनों में निरन्तर परिवर्तन भी होते रहते थे।
इस सब के कारण जनता में असुरक्षा की भावना और पूरे समाज में अस्थिरता बढ़ती गई। गम्भीर सामाजिक संकट अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच गया और अन्त में बड़े पैमाने के किसान-विद्रोह जगह-जगह फूट पड़े।
लूलिन सेना हूपेइ प्रान्त की ताङयाङ काउन्टी की लूलिन पर्वतमाला को आधार-क्षेत्र बनाकर विकसित हुई थी। उस के नेता वाङ ख्वाङ और वाङ फ़ङ थे।
17 ईसवी में उन्होंने विद्रोह का झंडा बुलन्द कर दिया, जिसमें आसपास के इलाकों के किसान बड़े जोश से शामिल हो गए।
बाद में वे लूलिन पर्वतमाला को छोड़कर नानच्युन (वर्तमान हूपेइ प्रान्त के च्याङलिङ), नानयाङ (वर्तमान हनान प्रान्त के नानयाङ) और अन्य स्थानों में लड़ाइयां लड़ते रहे। खुनयाङ (वर्तमान हनान प्रान्त के येश्येन) में हुई एक घमासान लड़ाई में उन्होंने वाङ माङ की मुख्य सैन्यशक्ति को नष्ट कर दिया।
तत्पश्चात, उन्होंने छाङआन में प्रवेश किया और वाङ माङ के शासन को धराशायी करने में सफलता प्राप्त की।
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