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(GMT+08:00) 2006-09-29 15:24:39    
पश्चिमी हान राजवंश में विभिन्न जातियों की स्थिति

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पश्चिमी हान राजवंश के प्रारम्भिक काल में, श्युङनू जाति के लोग उत्तरी चीन के विशाल इलाकों में काफी क्रियाशील थे।

वे हान जाति के लोगों को घोड़े और जानवरों के फर देकर उनसे कृषि व दस्तकारी की चीज़ें लेते थे।

किन्तु, श्युङनू दास-मालिकों के अभिजात वर्ग और हान राज-घराने के बीच अक्सर फौजी मुठभेड़ें भी होती रहती थीं।

ईसापूर्व 127, 121 और फिर 119 में सम्राट ऊती ने श्युङनू को पछाड़ने के लिये वेइ छिङ और ह्वो छ्वीपिङ जैसे सेनापतियों को विशाल फौजों के साथ भेजा था।

बाद में श्युङनू के मुखिया हूहानये ने पश्चिमी हान के साथ मैत्री बढ़ाने का निश्चय किया, और फिर पश्चिमी हान सम्राट य्वानती ने राजकुमारी वाङ चाओच्युन की शादी उससे कर दी।

इस शादी के बाद श्युङनू और हान राजघराने के बीच दूतों का अक्सर आवागमन होने लगा तथा दोनों जनता के बीच के सम्बन्ध घनिष्ठ से घनिष्ठतर होते गए।

पश्चिमी हान राजवंशकाल में चीन के उत्तरपूर्वी क्षेत्रों में ईलओ, फ़ूय्वी, श्येनपेइ और ऊय्वान आदि अल्पसंख्यक जातियां रहा करती थीं।

वर्तमान चच्याङ, फ़ूच्येन, क्वाङतुङ और क्वाङशी के इलाकों में रहने वाली अल्पसंख्यक जातियों को पाएय्वे के नाम से पुकारा जाता था।

आज के युननान और क्वेइचओ के क्षेत्रों की अल्पसंख्यक जातियां सामूहिक रूप से "दक्षिणपश्चिमी ई"कहलाती थीं।

उत्तरपश्चिमी क्षेत्रों में मुख्य रूप से ती और छ्याङ आदि अल्पसंख्यक जातियां बसती थीं। ये सभी अल्पसंख्यक जातियां लम्बे अरसे से भीतरी इलाकों की जनता के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध रखती आ रही थीं।

उन्होंने मातृभूमि के सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए हान जाति की जनता के साथ मिलकर मेहनत से काम किया था।

बालकश झील के दक्षिण और पूर्व के क्षेत्र, अर्थात आज के शिनच्याङ के क्षेत्र, प्राचीन काल में पश्चिमी क्षेत्रों के नाम से मशहूर थे।

 

ईसापूर्व 138 और 119 में सम्राट ऊती ने चाङ छ्येन के नेतृत्व में कान फ़ू सहित एक प्रतिनिधिमण्डल इन क्षेत्रों की यात्रा पर भेजा था, जिन में से केवल चाङ छ्येन और उनके सहायक कान फ़ू ही भाग कर जीवित लौटे थे।

 

ये यात्राएं हान जाति और इन क्षेत्रों की जातियों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध हुई थीं।

 

तब से पश्चिमी हान सरकार पश्चिमी क्षेत्रों में अक्सर अपने दूत भेजती रही और बदले में इन क्षेत्रों के प्रतिनिधि भी छाङआन आते रहे। इन क्षेत्रों से अंगूर, लहसुन, अखरोट और तिल जैसी उपजें तथा वहां का नृत्य व संगीत भीतरी इलाकों में लाया गया।