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(GMT+08:00) 2006-09-01 15:31:39    
संगीत की स्वप्न दुनिया में जुटा सिन्चांग गायक पाल्यांग

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आप को मालूम हुआ होगा कि चीन का सिन्चांग देश का एक ऐसा अल्पसंख्यक जाति बहुल क्षेत्र हैं , जहां विभिन्न जातियों की गायन कला अत्यन्त मशहूर है । सिन्चांग के संगीत बादशाह के नाम से मशहूर संगीतकार स्वर्गीय वांग लो पिन ने अपने जीवन काल में अनेक शिष्यों को प्रशिक्षित किया था , उन का अंतिम शिष्य छन पाई छ्वान है , जो पाल्यांग से सिन्चांग में मशहूर है ।

सिन्चांग की राजधानी ऊरूमुची शहर के एक होटल में हमारे संवाददाता की छन पाई छ्वान से मुलाकात हुई । वे फिलहाल सिन्चांग के एक संगीत रेडियो स्टेशन के संपादक हैं । वे लम्बे नहीं है, पर बहुत तंदरूस्द नजर आए और बहुत मिलनसार है ।

श्री छन पाई छवान का जन्म वर्ष 1971 में सिन्चांग वेवूर स्वायत्त प्रदेश के बोलतारा मंगोल जातीय स्वायत्त प्रिफैक्चर में हुआ , बचपन में ही वे संगीत प्रसारण सुनने के शौकिन था और दस साल की उम्र में स्कूल के अवकाश समय में शारीरिक श्रम कर पैसा कमाया और एक गिटार खरीदा।

उस जमाने में सिन्चांग में गिटार लोकप्रिय नहीं था , छन पाई छ्वान के मां बाप उस के गिटार बजाने का विरोध करते थे । एक शाम जब वह मछली पालन तालाब के किनारे बैठे गिटार बजा रहा था , तो गुस्से में आ कर उन के पिता ने गिटार छीन कर इस के दो टुकड़े कर तोड़े , बड़ी दुख से छोटे छन पाई छ्वान की आंखों में आंसू बही । 15 साल की उम्र में वे घर से निकल कर स्वतंत्र जीवन बिताने लगे ।

इस के दौरान उन की एक बुजुर्ग कजाख चरवाह से मुलाकात हुई , जो तबला बजाने में पारंगत थे । तबला की धुन से मोहित हो कर छन पाईछ्वान उस बुजुर्ग के साथ सेलीमू झील के पास पशु चराने का काम करने लगे।

इस नए जीवन में उन्हों ने चरवाहों से बहुत कुछ सीखे और कजाख जाति के रीति रिवाज और संगीत के बारे में काफी जानकारी मिली । सेलीमू झील के पास छन पाईछ्वान एक सुन्दर कजाख युवती ऊरेना से मिले, दोनों एक साथ पशु चराते थे , छन पाई छवान गिटार बजाते थे और ऊरेना मधुर गाना गाती थी । छन पाईछ्वान ने ऊरेना के लिए सेलीमू का प्रेम नामक गीत भी लिखा।

सेलीमू का प्रेम गीत बहुत सुरीली और मनमोहक है , सुश्री ऊरेना को बहुत पसंद आया । लेकिन वह यह समझती थी कि इतना सुन्दर गीत महज पहाड़ , झील और मैदान पर गाया जाना बहुत खेदजनक है , उस ने छन को सिन्चांग के जातीय गीत संगीत को बाह्य दुनिया में ले जाने की प्रेरणा दी । इस तरह छन पाईछ्वान अपने गिटार ले कर ऊरूमुची आये । इस पर उन्हों ने कहाः

17 साल की उम्र में मैं पग बार में गायक बन गया और पोप गीत गाना पड़ा , क्योंकि उस समय सिन्चांग के जातीय गीतों का बाजार सीमित था ।

पग बार में गायक का काम कठिन था , जब वे नाचार हुआ , तो संयोग से एक संगीत प्रेमी बहन से मुलाकात हुई, उस ने छनपाईछ्वान की प्रतिभा पहचान कर उन्हें सिन्चांग संगीत के बादशाह वांग लो पिन से सिफारिश की । वर्ष 1993 में छन पाईछ्वान ने अपने स्वरचित दो गीत ले कर वांग लो पिन से भेंट की । वांग ने प्यानो पर इन दो गीत को बजाया और कहा कि तुम्हारी प्रतिभा है , तुम एक पाल्यांग है , सिन्चांग में पाल्यांग का मतलब लोकप्रिय प्रतिभाशाली युवा है । इस के बाद श्री छन पाईछ्वान पाल्यांग के नाम से मशहूर हो गया।

सिन्चांग संगीत के बादशाह वांग लो पिन को छन पाईछ्वान की प्रतिभा बहुत भायी और उन्हों ने खुद उसे तीन साल तक गायन कला सिखायी और अपने जीवन भर में संजोए कला कौशल और अनुभव अवगत कराया । वांग के माध्यम से छन पाईछ्वान को दूसरे प्रसिद्ध संगीतकारों और गायकों से भी शिक्षा प्राप्त हुई। उन्हों ने कहा कि उस समय की शिक्षा उन के संगीत जीवन के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है ।

वर्ष 1996 में वांग लो पिन को शांगहाई में एक संगीत समारोह में भाग लेना था , वे अपने शिष्य छनपाईछ्वान को साथ लेना भी चाहते थे । लेकिन बड़ी खेद की बात थी कि व्युवृद्ध वांगलोपिन का रवाना होने से पहले निधन हुआ । वांग लो पिन के निधन के बाद श्री छन पाईछ्वान को संगीत कला के अध्ययन के बेहतर मौके से वंचित हो कर अकेले पेइचिंग में कैरियर का विकास करने आना पड़ा । पेइचिंग में वे एक सी डी कंपनी में एजेंट का काम करने लगे और संगीत विज्ञान पर गहन अध्ययन करते रहे ।

वांग लो पिन के स्वर्गवास के बाद भी उन की याद हमेशा छन पाईछ्वान के दिल में मजबूत रही । वर्ष 2006 वांग लो पिन की दसवीं बरसी है , उन की समृत्ति में श्री छन पाईछ्वान ने अपने गुरू जी की संगीत सामग्रियों के आधार पर गीत बनाने की योजना बनायी । सामग्री का संकलन संपादन करने में वे एक बार इतने थके हुए थे कि टेबल पर सिर थमे सो गये , नींद में उन्हों ने यह सपना देखा कि वांग लो पिन अभी उन्हें पढा रहे है। श्री छन ने कहाः

मेरे गुरू जी ने कहा कि ओ, पाल्यांग , तुम मुझे वह गिटार थाम दे, मैं ने गिटार उन की ओर बढाया , लेकिन गिटार पकड़ने में उन का हाथ खाली पड़ा , जिस से मैं नींद से जाग उठा । उसी वक्त मैं गिटार उठा कर गीत बनाने लगा, मुझे अहसास हुआ कि मेरा गीत स्वप्व में उड़ान भर रहा हैः दिल के स्वप्न के लिए आप अकेले अजनबी भूमि आए,सिन्चांग का नृत्य गान महकता है , जिस पर कभी ही दिल का तरंग बजा है , आप वीर चील की भांति स्वच्छंद से उड़ी ,इस प्राचीन ताल लय को उत्तराधिकारी मिली ।

श्री छन पाईछवान ने एक सांस में यह गीत लिख डाला, उन्हें महसूस हुआ कि उन्हों ने गुरू जी के लिए एक अधूरा काम पूरा किया। वांग लो पिन ने जीवन भर संगीत का काम किया , इसलिए छन पाईछ्वान ने अपने नए गीत का नाम सिन्चांग का संगीत विरासत रखा । गीत के बोल हैः रेगिस्तान की रेतीली हवा से आप के कदम नहीं रूके , सदियों से उगे पेड़ की छाया में आप थोड़े विश्राम के बैठे , खांगपाल खान का अंगूर शीतल और रसदार , आप के कदम को रोका है , तापानछङ की युवती नामक गीत ने ।

श्री छनपाईछ्वान ने गुरू वांग लो पिन के बारे में दस से ज्यादा गीत लिखे , जो उन के विशेष एलबम शताब्दी की समृत्ति में शामिल है । सिन्चांग के संगीत बादशाह वांग लो पिन की शानदार रचनाओं का प्रचार उन के अंतिम शिष्य के सृजन से आगे विकसित हो रहा है।

फिलहाल श्री छन पाई छ्वान रेडियो में संगीत कार्यक्रम के होस्ट हैं, अवकाश समय वे अकसर सिन्चांग के विभिन्न जातीय क्षेत्रों में दौरा करते हैं और लोक संगीत व गाना संकलित करते हैं , वे चाहते है कि अपनी कोशिशों से सिन्चांग के जातीय गीत संगीत देश के अन्य स्थानों और यहां तक दुनिया में प्रसारित प्रचलित हो जाएंगे ।