वैशाली बिहार के रंजय कुमार ने हमें लिख कर कहा कि श्रोता वाटिका के प्रभारी संपादक चंद्रिमा और शाओ थांग जी से आग्रह करता हूं कि श्रोता वाटिका का एक कॉलम श्रोता दोस्तों के पत्रों के उद्धरण कालम बनाए , जिस में हमारे पत्रों को शामिल करने की कोशिश कीजिए , इस से हम लोगों को खुशी होगी कि हमारे पत्रों को भी स्थान दिया गया है ।
मैं एवं मेरे क्लब के सभी सदस्य आप के प्रसारण को बड़ी ध्यानपूर्वक सुनते हैं । हमारे क्लब की एक बैठक में सी .आर .आई से प्रसारित कार्यक्रमों पर विचार विमर्श हुआ । जिस में सदस्यों ने एक स्वर में सभी कार्यक्रम को अच्छे बताये . सुझाव के प्रस्ताव पर रंजय श्रोता संघ के अधिकांश सदस्यों की राय थी कि चाइना रेडियो से रोज चार सभाओं का प्रसारण होता है , उन में से एक या दो कार्यक्रम का प्रसारण सुबह के समय कर दिया जाए , तो काफी अच्छा होगा । इस से श्रोताओं को सुबह शाम दोनों समय सी .आर .आई का प्रसारण सुनने को मिलेगा , जो श्रोताओं के लिए काफी लाभकारी होगा । रोज चार कार्यक्रम में एक ही साप्ताहिक कार्यक्रम का प्रसारण होता है । अगर एक साप्ताहिक कार्यक्रम ज्यादा से ज्यादा दो कार्यक्रम में प्रसारित हो , तो श्रोताओं को रोज दो कार्यक्रम में अन्य साप्ताहिक कार्यक्रम का आनंद उठा पाएंगे ।
रंजय कुमार को हम बहुत बहुत धन्यावाद देते हैं कि आप ने हमारे हिन्दी कार्यक्रम और श्रोता वाटिका के बारे में सुझाव पेश किये , जिस पर हमारा ध्यान हुआ है । आइंदे में अगर हमारी शक्ति और स्थिति अनुकूल हो , तो हम आप लोगों की आशा को निराशा नहीं करेंगे । इस समय तो हमें अपने वर्तमान रूप को बरकरार रखना पड़ेगा ।
आजमगढ़ उत्तर प्रदेश के वसीम हैदर ने सी .आर .आई के हिन्दी सेवा के नाम भेजे पत्र में कहा कि श्रोता वाटिका का एक नया अंक मिला , इसे पढ़ कर बहुत ही अच्छा लगा , सच कहें, तो श्रोता वाटिका सी .आर .आई की एक सची और उभरती तस्वीर है । इस पत्रिका के द्वारा सी .आर .आई को बहुत ही नजदीक से जानने एवं समझने को मिलता है । हमारे क्लब के सभी सदस्य इस पत्रिका की बहुत तारीफ करते हैं । इस पत्रिका के नए अंक का हम बेसब्री से इंतजार करते हैं ।
आजमगढ़ के अनीस हैदर ने तो हमें यो लिखा है कि जीवन और समाज कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रसारित किशोर और किशोरियों की इंटरनेट में दिलचस्पी और बाल अदालत के बारे में रिपोर्ट सुनी , बहुत अच्छा लगा है ।
और रोर्केला उड़ीसा के आकिब निहाल खान ने अपने पत्र में कहा कि जीवन और समाज कार्यक्रम में चिन शान सान के बारे में सुना , उन्हें भारत से प्यार है , और वह एक नृत्यांगना है , वह कई बार भारत नृत्य सीखने आ चुकी हैं । यह जान कर बहुत आश्चर्य हुआ कि उन्हों ने साल भर का कोर्स को छै महीनों में सीख लिया ।
चीन की अल्पसंख्यक जाति के कार्यक्रम में वा जाति की युवतियों और उन की खुबसूरत नृत्य के बारे में बताया गया था , किस प्रकार वह लकड़ी के ढोलक पर युवतियां भाव विभोर नाच करती हैं , वह बहुत सुन्दर भी होती हैं ,उन के बाल भी बड़े होते हैं और वा जाति एक नाचने गाने वाली जाति से मशहूर है ।

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