• हिन्दी सेवा• चाइना रेडियो इंटरनेशनल
China Radio International
चीन की खबरें
विश्व समाचार
  आर्थिक समाचार
  संस्कृति
  विज्ञान व तकनीक
  खेल
  समाज

कारोबार-व्यापार

खेल और खिलाडी

चीन की अल्पसंख्यक जाति

विज्ञान, शिक्षा व स्वास्थ्य

सांस्कृतिक जीवन
(GMT+08:00) 2006-08-18 16:15:43    
चीन के प्रथम सम्राट

cri

प्रथम सम्राट ने राजसत्ता के सब अधिकार अपने हाथ में ले लिये और सम्राट को केन्द्र बनाकर एक सम्पूर्ण अफसरशाही व्यवस्था कायम की।

सम्राट के अधीन दो प्रधान मंत्री (बाएं और दाएं) थे, जो राजकाज चलाने में उसकी मदद करते थे। फौजी मामलों की देखभाल के लिये एक प्रधान चांसलर नियुक्त किया गया था।

भी ओहदों के अफसरों के काम की जांच करने और राजकीय दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिये एक प्रधान निरीक्षक नियुक्त किया गया था। प्रधान मंत्री, प्रधान चांसलर और प्रधान निरीक्षक - इन तीन सर्वोच्च ओहदों वाले अफसरों को मिलाकर"तीन ड्यूक"कहा जाता था।

इनके अलावा, "नौ राज्य-सचिव"नियुक्त किए गए थे, जो केन्द्रीय सरकार के विभिन्न विभागों के इनचार्ज थे। राजदरबार के सभी प्रमुख अफसरों की नियुक्ति, तबादला या बर्खास्तगी सम्राट ही करता था।

प्रथम सम्राट ने समूचे देश में सूबे (प्रिफेक्चर) व काउन्टी वाली प्रशासनिक व्यवस्था लागू की। उस ने देश को शुरू-शुरू में 36 सूबों में और कुछ समय बाद 40 से कुछ अधिक सूबों में बांट दिया।

सूबे का प्रशासन सूबेदार चलाता था। सूबे में फौजी मामलों की देखभाल और निरीक्षण का काम करने के लिये दो अन्य अफसर नियुक्त किए जाते थे। सूबे को काउन्टियों में बांटा गया था, जिन का प्रशासन मजिस्ट्रेट चलाता था।

काउन्टी के नीचे "श्याङ"और "श्याङ"के नीचे "थिङ"थे। "श्याङ"का शासन चलाने के लिये "तीन जेठे"और "थिङ"के लिये एक मुखिया नियुक्त किया जाता था।

सूबेदारों व मजिस्ट्रेटों को खुद सम्राट नियुक्त करता था और वह इच्छानुसार उन्हें हटा भी सकता था। सभी स्तरों के अफसर सम्राट के प्रति जवाबदेह थे तथा उसके आदेशों का पालन करना और उसके द्वारा निर्धारित कानूनों व नीतियों को कार्यान्वित करना उनके लिये अनिवार्य था।

छिन राजवंश के प्रथम सम्राट द्वारा अपनाई गई तानाशाही की इस केन्द्रीकृत व्यवस्था का चीन के दो हजार वर्ष लम्बे सामन्ती समाज पर दूरगामी प्रभाव पड़ा। छिन के बाद के सभी राजवंश आम तौर पर यही व्यवस्था लागू करते रहे।