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(GMT+08:00) 2006-08-11 15:16:31    
युद्धरत-राज्य काल और छिन की एकीकरण

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युद्धरत-राज्य काल की साहित्यिक उपलब्धियों में छ्वी य्वान (340 – 278 ई. पू.) का काव्य सर्वप्रमुख है। चीन के साहित्यिक जगत को अपनी ओजपूर्ण रचनाओं से आलोकित करने वाले अमर कवि छ्वी य्वान छू राज्य के नागरिक थे।

उन्हें अनेक बार अपने राज्य से निर्वासित किया गया था। उन्होंने "ली साओ"(विलाप) और अन्य बहुत सी कविताओं की रचना की तथा लोकगीतों की शैली अपनाकर काव्यरचना की एक नई शैली को जन्म दिया, जिसे "छू छि"(छू राज्य का गाथाकाव्य) नाम दिया गया।

इस शैली की बाद के कवियों पर गहरी छाप पड़ी।

युद्धरत-राज्य काल में, चीन का एकीकरण विभिन्न राज्यों द्वारा एक दूसरे को हड़पने के लिये अनवरत रूप से चलाए गए युद्धों के जरिए कदम-ब-कदम पूरा हो चुका था।

युद्धरत-राज्य काल के पूर्वार्ध में अपेक्षाकृत बड़े राज्यों ने अपने से छोटे पड़ोसी राज्यों को जीतकर अपने में मिला लिया और केवल सात बड़े राज्य बाकी रह गए।

युद्धरत-राज्य काल के उत्तरार्ध में इन "सात शक्तिशाली राज्यों"के बीच भी बराबर युद्ध होते रहे।

छिन राज्य के राजा इङ चङ ( शासनकाल 246 – 210 ई. पू.) ने गद्दी पर बैठने के बाद युद्ध की तैयारी की तथा क्रमशः हान, चाओ, वेई, छू, येन और छी राज्यों को जीतकर अपने राज्य में मिला लिया और ईसापूर्व 221 में समूचे चीन को एक कर दिया।

चीन का एकीकरण करने के बाद छिन राजा ने चीन के इतिहास में प्रथम केन्द्रीकृत सामन्तवादी राज्य की स्थापना की। राजा की शक्ति और सम्मान वृद्धि के लिये इङ चङ ने "ह्वाङती"की उपाधि ग्रहण कर ली।

यह नई उपाधि दन्तकथाओं पर आधारित थी, इस का अनुवाद "सम्राट"है।

उसने अपने को"प्रथम सम्राट"घोषित कर दिया और कहा कि उसके उत्तराधिकारी "द्वितीय सम्राट","तृतीय सम्राट"इत्यादि के रूप में यह सिलसिला"अनन्तकाल तक जारी रखें"।