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चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता श्री ल्यू च्येन शाओ ने पहली अगस्त को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पारित ईरान की नाभिकीय समस्या संबंधी नये प्रस्ताव पर समीक्षा करते हुए कहा कि चीन यह आशा करता है कि मध्य पूर्व क्षेत्र की स्थिति में नया उतार चढ़ाव नहीं होगा और यह प्रस्ताव राजनयिक प्रयास के लिए मददगार सिद्ध होगा।
श्री ल्यू च्येन शाओ ने कहा कि चीन हमेशा से अंतरराष्ट्रीय नाभिकीय अप्रसार व्यवस्था की रक्षा करने का समर्थन करने के साथ नाभिकीय हथियारों के प्रसार का विरोध करता आया है। चीन आशा करता है कि मध्य पूर्व क्षेत्र में कोई नया उतार चढ़ाव उत्पन्न नहीं होगा और राजनीतिक व राजनयिक प्रयास से वार्ता के तरीकों से ईरानी नाभिकीय समस्या का शांतिपूर्ण समाधान किया जाएगा। चीन ने संबंधित विभिन्न पक्षों से संयम रखने और यथाशीघ्र ही वार्ता की बहाली करने की अपील की। चीन पहले की ही तरह रचनात्मक भूमिका अदा करता रहेगा।
31 जुलाई को सुरक्षा परिषद ने ईरान की नाभिकीय समस्या के नम्बर 1696 प्रस्ताव को पारित किया। इस प्रस्ताव ने ईरान से 31 अगस्त से पहले यूरेनियम संवर्द्धन संबंधी सभी कार्यवाइयों को अस्थायी रुप से बंद करने की मांग की और ईरान से अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा संस्था के साथ सहयोग करने की अपील भी की।
उसी दिन ,अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि इस से जाहिर है कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय इरान को नाभिकीय हथियार बनाने तथा नाभिकीय तकनीक हासिल करने से रोकने की समान कोशिश कर रहा है ।
सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर इरानी प्रतिनिधि जारिफ ने कहा कि इरान की नाभिकीय योजना शांति के लिए है , वह अन्तरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा के प्रति खतरा नहीं है ,इसलिए सुरक्षा परिषद द्वारा इस सवाल का समाधान करना युक्तिसंगत और व्यवहारिक नहीं है और इस का कानूनी आधार भी नहीं है ।
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