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वेइ राज्य के एक अफसर शीमन पाओ ने एक नहर बनवाई, जिससे चाङहो नदी के पानी का सिंचाई के लिए उपयोग होने लगा और उसके राज्य के कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिला।
सछ्वान में तूच्याङ बांध और क्वान-चुङ में चङक्वो नहर छिन राज्य की सब से बड़ी जल-संरक्षण परियोजनाएं थीं।
कृषि और दस्तकारी का उल्लेखनीय विकास हुआ। वाणिज्य और शहरी निर्माण का भी भरपूर विकास हुआ।
छी राज्य का लिनचि, चाओ राज्य का हानतान, चओ राज्य का ल्वोयाङ, छू राज्य का इङ, येन राज्य का ची और छिन राज्य का शेनयाङ उस समय के सुप्रसिद्ध नगर थे।
छी राज्य की राजधानी लिनचि में अनेक शाही महल और बाजार थे, सड़कों पर आदमियों और गाड़ियों की भीड़ रहती थी। प्राचीन लिनचि नगर की खुदाई से पता चला है कि यह नगर 20 किलोमीटर से अधिक की परिधि में फैला हुआ था।
यहां लोहा गलाने की 6 तथा कांसा गलाने और हड्डी की वस्तुएं बनाने की अनेक कर्मशालाएं थीं। मुद्रा का बड़े पैमाने पर प्रचलन शुरू हुआ और विभिन्न राज्यों की अपनी-अपनी मुद्राएं हो गईं।
युद्धरत-राज्य काल में विचारधारा के क्षेत्र में एक फलता-फूलता वातावरण पैदा हुआ और मोचिवादी, कनफ्यूशियसवादी, विधानवादी तथा ताओवादी विचारशाखाओं का प्रादुर्भाव हुआ।
विभिन्न विचारशाखाओं के विचारक अपने विचारों को लिपिबद्ध कर उनका प्रचार करते थे और दूसरी विचारशाखाओं की आलोचना करते थे, इस प्रकार"सौ विचारशाखाओं में होड़ होने"की स्थिति पैदा हो गई।
मोचिवादी विचारशाखा के प्रवर्तक मो चि (लगभग 478 – 392 ई. पू.) थे। उन का असली नाम मो ती था। वे लू राज्य (कुछ इतिहासकारों के अनुसार सुङ राज्य) के रहने वाले थे। वे कभी कारीगर रह चुके थे।
उन्होंने "विश्वप्रेम","शान्तिवाद"और "गुणवान व्यक्तियों को सम्मानित करने"की धारणाओं व विचारों का प्रतिपादन किया। उनके विचार छोटे-छोटे उत्पादकों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते थे। उनके बहुत से शिष्य थे और समाज में उनका बहुत असर था।"मो चि"नामक ग्रन्थ के रूप में मोचिवादी विचारकों की रचनाएं संगृहीत हैं।

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