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(GMT+08:00) 2006-05-19 09:36:53    
सिन्चांग का मशहूर कथक चाओ क्वो चु

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सिन्चांग अपनी विशेष प्राकृतिक स्थिति और अनोखे जातीय रीति रिवाजों से देश भर में असाधारण मशहूर है , साथ ही वहां के साहित्य , ललित कला , नृत्य गान तथा फिल्म टी वी ने भी उस की मोहकता पाठकों व दर्शकों के सामने रख दी। वहां प्रचलित कथा वाचन की कला शैली भी एक विशेष स्थानीय कला के रूप में लोकप्रिय है , जिस में स्थानीय बोली में छोटी मोटी कथाएं , कहावत और चुटकुलें सुना कर लोगों को मनोरंजन दिया जाता है । अब आप को सिन्चांग की कथा वाचन कला के बारे में कुछ परिचय दिया जाएगा ।

सिन्चांग की कथा वाचन कला की चर्चा पर चीनी लोक कलाकार संघ की परिषद के सदस्य और सिन्चांग के ऊरूमुची शहर के लोक कलाकार संघ के अध्यक्ष श्री चाओ क्वोचु का उल्लेख करना लाजिमी है । वे इस समय सिन्चांग के सब से मशहूर कथाकार हैं , उन्हों ने जो कथा वाचन के लिए रचनाएं लिखी हैं , वह सिन्चांग निवासियों में काफी लोकप्रिय हैं ।

दोस्तो , अभी आप जो कथा वाचन सुन रहे है , वह श्री चाओ क्वो चु द्वारा प्रस्तुत एक रचना है । ठेठ स्थानीय बोली और शैली में प्रस्तुत यह कला विशेष इधर के सालों में सिन्चांग के शहरों और देहातों में बहुत प्रचलित रहा है और असाधारण लोकप्रिय भी हुआ है ।

सिन्चांग में सर्दी की अवधि बहुत लम्बी है और मौसम भी हड्डी को चुभोने वाला ठंडा होता है । इस प्रकार की लम्बी और सर्द मौसम बिताने के लिए स्थानीय लोगों में शराब पीने तथा गप्पशप मारने की प्रथा चल रही है । ऐसे मौके पर कुछ न कुछ लघु कथाएं , कहावत और चुटकुले सुना कर मनोरंजन भी किया जाता है । इस के अलावा सिन्चांग की भूमि विशाल है , आबादी कम है , बहुत से जगहों पर रेगिस्तान फैले हुए हैं, वहां सफर करने में समय ज्यादा लगता है , इस बीच मुसाफर अकसर कुछ चुटकुलें या कथाएं बता कर निरस सफर को आसान बना देते हैं । कालांतर में इस प्रदेश में एक प्रकार की लोक कला यानी कथा वाचन की कला अस्तित्व में आ गयी और प्रचलित भी हुई ।

श्री चाओ क्वो चु का जन्म वर्ष 1946 में सिन्चांग में हुआ , बालावस्था में उन्हों ने गांव के एक बूढ़े कथक से बहुत सी कथा कहावत सुने । स्थानीय बोली में सुनाई गई इन कथा कहावतों के विषय सुबौध , विनोदपूर्ण और मनोरंजनक थे , जिन्हों ने चाओ क्वो चु को बहुत मनमुग्ध कर दिया , इस तरह चाओ क्वो चु धीरे धीरे सिन्चांग की कथा वाचन की कला के प्रेमी बन गए । इस की चर्चा करते हुए उन्हों ने कहाः

मुझे बचपन में ही कथा वाचन पसंद आया था , उस समय मैं अनेक स्थानीय कथाकारों से कथाएं सुनी थीं , उन का कथा वाचन छंद युक्त , धारावाहक और रोचक था , जिस ने मुझे बरबस आकर्षित कर दिया ।

पिछली शताब्दी के 70 वाले दशक में श्री चाओ क्वो चु सिन्चांग के ऊरूमुची शहर में कला साहित्य संस्था में काम करते थे । एक बार किसी काम के लिए एक चरगाह में गए , तो उन्हों ने फिर एक बार स्थानीय चरवाहों में प्रचलित कुछ कथा चुटकुलें सुनीं , छद व ताल युक्त इन विनोदों और कथाओं ने पुनः चाओ क्वो चु की बालावस्था की याद जगायी । धीरे धीरे इस कथा वाचन कला ने चाओ क्वो चु को इतना प्रभावित कर दिया कि उन्हों ने स्थानीय कथा कहावतों को संकलित और संपादित करने की ठान ली । उन्हों ने कहाः

स्थानीय लोगों में प्रचलित विनोदपूर्ण कथाओं और चुटकुलों के अध्ययन से मुझे गहरा अनुभव हुआ है कि इस किस्म की लोक कथाओं में सांस्कृतिक परम्परा गर्भित है , जो बहुत मूल्यवान है । सिन्चांग की अन्य किस्मों की लोक संस्कृतियों की भांति उसे भी उजागर कर लोगों को अवगत करा दूंगा ।

शुरू शुरू में श्री चाओ क्वो चु ने केवल स्थानीय लोगों में प्रचलित कथा वाचन की कृतियों का संकलन संपादन किया , बाद में उन्हें अनुभव हुआ कि उन्हें खुद भी कुछ रचनाओं का सृजन करना चाहिए । अपनी 44 साल की उम्र में उन्हों ने अपनी प्रथम रचना लिख कर प्रकाशित की , जिस का सिन्चांग में खूब स्वागत किया गया । श्री चाओ क्वो चु ने कथा वाचन के रूप में स्थानीय लोगों के ध्यानाकर्षक विषयों पर रचनाएं लिखीं , जो विनोद प्रमोद के साथ बहुत शिक्षाप्रद है और लोगों में बहुत लोकप्रिय हो गयी हैं ।

इस सफलता के बाद उन्हों ने लोक कथा वाचन संकलन और लोक चुटकुला संकलन शीषर्क दो पुस्तकें निकालीं , जिन में उन की खुद की 18 रचनाएं शामिल हैं ।

लोक साहित्य के प्रेमी होने के नाते श्री चाओ क्वो चु ने अपनी कोशिश कभी नहीं रोकी , उन्हों ने अनेक बार बुजुर्ग स्थानीय कथाकारों से साक्षात्कार किया और उन के बारे में मूल्यवान संदर्भ सामग्री जुटाई , ताकि उन की कथा वाचन की परम्परा सुरक्षित रखी जाए ।

उन्हों ने सिन्चांग के हामी क्षेत्र में रहने वाले एक स्थानीय आपेरा छ्यु ची के बुजुर्ग लोक कलाकार से साक्षात्कार किया । इस के बारे में उन्हों ने कहाः

हामी के इस बुजुर्ग लोक कथक का नाम स्वांग चा ई है , उन के पास स्थानीय संस्करण का सिन्चांग छ्यु ची संग्रह सुरक्षित है । इस संग्रह के अधिकांश आपेरा उन्हें खुद गाना आता है । उन के पास ऐसी दर्जनों अन्य छ्यु ची आपेरा संग्रह भी हैं । लेकिन अब उन की दोनों आंखें अंधा हो गयीं , उन्हों ने हमें टेपरिकार्डर पर अपनी पुरानी टेप बजा कर सुनायी , पर वे खुद गाने में अक्षम हो गए । इस बात से मुझे गहरा अनुभव हुआ कि लोक संस्कृति बचा कर संरक्षित करना एक अत्यन्त फौरी काम है।

इस घटना के बाद श्री चाओ क्वो चु ने स्थानीय लोक संस्कृति का संकलन करने की गति तेज कर दी और इस काम के लिए वे जहां भी गए , वहां जो सृजन के लिए लायक वस्तु पायी , तो तुरंत कागज पर नोट कर दिया । जब फुरसत मिली , तो उन्हें वर्गबद्ध व संकलित कर संपादित करते हैं । इस प्रकार संकलित और संपादित की गई नई रचनाएं बहुत सजीव और मनमोहक है ।

श्री चाओ क्वो चु की रचनाओं के विषय जन साधारण से जुड़े हुए और रचनाओं की कला शैली रोचक और लोकप्रिय है , बहुत सी रचनाओं में नयापन भरा हुआ है , इसलिए उन की रचनाएं लोगों के मन को छू लेती हैं । चीनी जन संस्कृति सोसाइटी के सदस्य और सुप्रसिद्ध नाटककार श्री छङ वान ली ने चाओं की कथा वाचन रचनाओं का मूल्यांकन करते हुए कहाः

श्री चाओ क्वो चु की कथा वाचन रचना कला का सृजन है , जो उन के स्वयं द्वारा रची गयी है , न कि रू ब रू पुरानी लोक कथाओं का संकलन व प्रकाशन है । श्री चाओ क्वो चु ने बड़ी मात्रा में सिन्चांग के लोक कथा कहावत और चुटकुलें संकलित की हैं , और उन में से श्रेष्ठ कला कृतियों के आधार पर आधुनिक युग से अनुकूल विषयों की रचनाएं तैयार की हैं , इस क्षेत्र में उन की कोशिश कामयाब हुई है और सिन्चांग के परम्परागत कथा वाचन के विकास के लिए एक योगदान भी है ।

सिन्चांग की लोक वाचन संस्कृति का विकास करने के उद्देश्य में श्री चाओ क्वो चु इधर के सालों में विभिन्न विश्वविद्यालयों में सिन्चांग की कथा वाचन कला के बारे में लेक्चर भी देने लगे । उन्हों ने कहाः

मैं आशा करता हूं कि अधिक से अधिक लोग सिन्चांग की लोक संस्कृति पर ध्यान देंगे , खास कर विश्वविद्यालय के अध्यापक और छात्र सिन्चांग की लोक संस्कृति में रूचि लेंगे और उन के संकलन और संपादन में भाग लेंगे । इस से इस काम के लिए शक्ति और ज्यादा बढ़ सकेगी और इस काम को भी ज्यादा बेहतर किया जा सकेगा ।

उन्हों ने कहा कि वे सिन्चांग की कथा वाचन परम्परा का विकास करने की निरंतर कोशिस करेंगे और ज्यादा से ज्यादा रचनाओं का संपादन व प्रकाशन कर लोगों के मनोरंजन के लिए प्रदान करेंगे ।