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(GMT+08:00) 2006-04-28 15:06:39    
सिन्चांग का तावाज सर्कस सितारा अबुलेती मैजन

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तावाज चीन के सिन्चांग वेवूर स्वायत्त प्रदेश में प्रचलित एक प्रकार का प्राचीन सर्कस है , जिस में कलाकार ऊंची हवा में झूलती लम्बी रस्सी पर करतब करते दिखाई देता है । इस करतब को दिखाने के लिए कलाकार के कमर में सुरक्षा की रस्सी नहीं बंधती है और हाथों में थामा लम्बा डंडा जमीन से ऊपर दसियों मीटर ऊंचा होता है । ऊंची खुली हवा में झूलती रस्सी पर कठिन करतब करना बेहद जोखिम भरा काम है । लेकिन तावाज नाम के वेवूर जाति का यह सर्कस खतरनाक , उत्तेजनात्मक तथा कठिन होने की वजह से सदियों से वेवूर लोगों को आकर्षित करता आया है और उसे बहादुरी का खेल माना जाता है ।

अब प्रस्तुत है तावाज सर्कस के मंजे हुए वेवूर कलाकार अबुलेती मैजन की कहानी।

दोस्तो , तावाज सर्कस के युवा कलाकार अबुलेती .मैजन का नाम इसलिए चीन में मशहूर हो गया है , क्योंकि उन्हों ने जमीन से 28 मीटर ऊंची हवा में झूलती इस्पाती रस्सी पर करतब दिखाते हुए कुल 38 दिन रात गुजारे थे और इस खेल के विश्व गाइनेस बुक के सात रिकार्ड तोड़े हैं ।

हवा में झूलती रस्सी पर सर्कस का करतब दिखाने का खेल चीन में तीन हजार वर्ष ज्यादा पुरानी एक परम्परागत कला है । सिन्चांग में वह तावाज के नाम से जाना जाता है । लेकिन कालांतर में चीन के अन्य स्थानों में यह खेल तकरीबन लुप्त हुआ है , केवल सिन्चांग में खानदानी कला के रूप में सुरक्षित रही और इधर के सालों में तावाज प्रेमी कलाकारों के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप वह विकसित भी हो गया । इस प्राचीन परम्परागत लोक कला के पुनर्जीवित होने से लोगों को बरबस आकृष्ट कर लिया गया । इस विशेष सर्कस के विकास में श्री आबुलेती .मैजन ने अपने नाम को शोभा दे दिया ।

श्री आबुलेती के साथ बातचीत का सिलसिला छिड़ा , तो वे बहुत प्रसन्न हुए , हमारे स्वागत में उन्हों ने वूवेर वाद्य रेवाप बजा कर सिन्चांग में प्रचलित लोक गीत मुकाम का एक अंश पेश किया । रेवाप वेवूर जाति का एक लोकप्रिय परम्परागत वाद्य है , 130 सेंटीमीटर लम्बे इस तंतु वाले वाद्य पर बड़ी मधुर धुनि बज कर सुनाई देती है ।

सुरीली संगीत की धुनि सिन्चांग सर्कस मंडली के विशाल अभ्यास होल में गूंज रही है , इसी मधुर धुनि के बीच सिन्चांग सर्कस कलाकार संघ के उपाध्यक्ष श्री यु त्येन यङ ने श्री आबुलेती मैजन की कहानी बतायी । उन्हों ने कहा कि आबुलेती ने इसी विशाल अभ्यास होल में सर्कस सीखा , अब वे न केवल भूमि पर रेवाप से मधुर धुनि बजा सकते हैं , बल्कि हवा में अधर झूलती इस्पाती रस्सी पर भी रेवाप बजा सकते हैं । पिछले साल आबुलेती ने सिन्चांग में रस्सी पर सर्कस का नया विश्व रिकार्ड कायम किया , इस के दौरान वे रोज रस्सी पर छह घंटे चलते रहे , साथ ही उस पर रूपांतरित किए गए रेवाप से लोक गीत बजाये । उन का रूपांतरित रेवाप बहुत लम्बा है , जिस का हवा में झूलती रस्सी पर चलते वक्त संतुलन के लिए इस्तेमाल भी किया जा सकता है । इस अद्भुत जोखिम से भरे सर्कस करतब को देख कर बहुत से दर्शकों को इतना तनाव आया कि डर के मारे उन्हों ने अपनी आंखें भी मूंद रखीं ।

यो देखने में श्री आबुलेती ने बड़ी आसानी से इस सर्कस करतब के साथ विश्व गाइनेस रिकार्डों को तोड़ कर अपना नया कीर्तिमान कायम किया है , लेकिन लोगों को पता नहीं था कि इस के लिए उन के शारीरिक वजन में 18 किलोग्राम की कटौती हुई थी । अपनी इस सफलता की याद में श्री आबुलेती बहुत प्रभावित हुए है , उन का कहना हैः

जब मैं हवा में झूलती रस्सी पर लगातार कई दिनों करतब दिखा रहा था , मैं इस्पाती रस्सी पर लेट जाता था , आंखें नहीं बन्द कर सकता , नींद नहीं ले सकता , पसीनें आंखों में घूस आईं, तो बड़ी पीड़ा महसूस हुई , रात के समय मैं रस्सी के छोर पर बने छोटे कमरे में आया ,तो पूरे बदन में दर्द हो रही थी , खास कर पांव के तलवे पर खूनी छाला पड़ा और सूजन भी आया, सोने की बड़ी कोशिश करते भी नहीं सो सकता।

आबुलेती की पत्नी ने कहा कि विश्व रिकार्ड को तोड़ने की कोशिश में जब वे हवा में करतब दिखा रहे थे , तो वे रोज हवा में झूलते एक छोटे कमरे में रहते थे , थकान से वे चूर चूर हो गए थे , फिर भी दूसरे दिन वे पक्के संकल्प के साथ चुस्तफुरस्त हुए कमरे से निकल कर नये रिकार्ड के लिए झूजने लगे ।

श्री आबुलेती मैजन ने कहा कि वे इसलिए इस कठिन व जोखिमी सर्कस पर कायम रह सकते हैं , क्योंकि वे बचपन से ही जोखिम से जूझना पसंद करते हैं । सात साल की उम्र में जब वह पिता के साथ एक स्थानीय तावाज कलाकार के प्रदर्शन को देखा , तो वे इस सर्कस करतब से काफी प्रभावित हुए , उन्हों ने एक तावाज कलाकार बनने की ठान ली ।

17 साल की उम्र में आबुलेती स्थानीय तावाज सर्कस मंडली का सदस्य बने और विभिन्न किस्मों के सर्कस करतब सीखने लगे । एक बुजुर्ग तावाज कलाकार के निर्देशन में उन का सर्कस प्रदर्शन जीवन आरंभ हुआ ।

आबुलेती मैजन का सर्कस जीवन आसान नहीं है । आज से सात साल पहले ऊरूमुची के एक पार्क में हवा में झूलती रस्सी पर करतब के प्रदर्शन के दौरान खेलने का साधन खराब हुआ , तो वह ऊंची रस्सी पर से नीचे गिरे , जिस से उन के टहनी और घुटनी कई अंगों की हड्डियां टूटीं और वे खुद भी बेहोश हो गए , डाक्टरों की कोशिश से आबुलेती की जान जो बच गई , तो गई, पर डाक्टरों का कहना था कि वे फिर तावाज सर्कस नहीं कर सकते ।

किन्तु आबुलेती मैजन ने अपने ऐसे भाग्य को नहीं माना , वे सोचते थे कि उन का सर्कस जीवन इतना जल्दी से समाप्त नहीं होना चाहिए। जब उन्हें पता चला कि उन के पैर बांह ठीक हो गए , तो उन के दिल में तावाज मंडली में लौटने का ख्याल और तीव्र हो गया। उन्होंने कहाः

मुझे मालूम है कि ऊंची हवा में झूलती रस्सी पर सर्कस करने का जीवन देर सबेरे समाप्त होगा , लेकिन इस कला मंच से सेवानिवृत्त होने से पहले मैं गाइनेस बुक के रिकार्डों को तोड़ कर नया विश्व कीर्तिमान कायम करके ही दूंगा , मुझे सिन्चांग सर्कस मंडली के लिए योगदान करना चाहिए और चीनी राष्ट्र को शोभा देना चाहिए ।

अंत में आबुलेती की हड्डियां तो सेहतमंद हुई , पर दर्द कभी कभार आयी करती थी , इसलिए उन की पत्नी इस बात का विरोध करती थी कि वे फिर तावाज का अभ्यास करें ।

लेकिन वे पत्नी से छुपे चोरी कर अभ्यास करने लगे , शुरू में सरल करतब का अभ्यास करते , फिर कठिन का अभ्यास , एक साल के निरंतर अभ्यास से वे फिर इस्पाती रस्सी पर खूब सूरती से विभिन्न करतब करने में सक्षम हो गए , उन के सहयोगियों के विचार में यह सच ही एक करिश्मा है ।

वर्ष 2005 सिन्चांग वेवूर स्वायत्त प्रदेश की स्थापना की 50 वर्षगांठ थी , इस की खुशी में खुशी जोड़ने के लिए आबुलेती मैजन ने एक विशेष उपहार ला कर दे दिया यानी उन्हों ने 28 मीटर ऊंची हवा में झूलती इस्पाती रस्सी पर 38 दिन तक सर्कस करतब दिखा कर विश्व गाइनेस रिकार्ड तोड़ा । अपनी इस सफलता से भाव विभोर हो कर श्री आबुलेती ने हमें बतायाः

सिन्चांग सर्कस मंडली के समर्थन में मैं ने सात साल तक अथक कोशिश की , और अंत में तावाज सर्कस से गाइनेस के सात विश्व रिकार्डों को तोड़ कर अपना सपना साकार कर ली और सिन्चांग स्वायत्त प्रदेश की स्थापना की 50 वीं वर्षगांठ के लिए अपनी असाधारण तोफा भेंट की ।

अपनी सफलता की खुशी में डूब कर श्री आबुलेती मैजन ने फिर अपना प्यारा रेवाप उठा कर एक लोकप्रिय सिन्चांग का लोकगीत बजाया ।