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(GMT+08:00) 2006-04-21 15:33:49    
वा जाति का मशहूर गायक एमान की कहानी

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दोस्तो , वा जाति के गायक एमान द्वारा बनाया गया एक गीत , जो खुद उसी की आवाज में भी है , जिस का नाम है दूर उड़ी पक्षी , गीत के बोल कुछ इस प्रकार के हैः

बालावस्था में मन का सपना था,

एक पक्षी बने नीले आकाश में ऊंची उड़ान भरे ,

स्वेच्छे का पंख फैलाए

दूर दूर कहीं उड़ जाऊंगा ।

बड़े होने के बाद मन के सपने के लिए घर से विदा

कंधे पर मां जी के हाथों से तैयार असबाब

ऊंचे आदर्श के पक्का इरादा लिए

मैं दूर और दूर चले जा रहा हूं ।

एमान के इस गीत के साथ उस की पेइचिंग में अपनी कैरियर बनाने की कहानी भी आरंभ हुई ।

श्री एमान कद में ऊंचा नहीं है , रंग सांवला , बाल लम्बे और दोनों आंखें बड़ी बड़ी और चमकदार रहीं । बचपन में ही एमान गीत गाने के शौकिन था , वह पहाड़ पर खड़े मुक्त कंठ से गाता था , चरने वाली बैल गायों के आगे गाता था , जिस से संगीत में उस की रूचि और क्षमता काफी बढ़ी । वर्ष 1996 में एमान को पेइचिंग सीनेमा कालेज में दाखिला मिला , वहां वह चाहता था कि संगीत की शिक्षा ले , पर इस मनोरथ के विपरित वह अभिनय विभाग में दाखिल किया गया । कालेज में उस ने दो साल अभिनय कला सीखी , लेकिन दूसरे छात्रों की भांति अभिनेता का काम करने के बजाए एमान ने पुनः अपना मनपसंद गाने का काम शुरू करने का फैसला लिया । वह रोज साइकिल चलाते हुए पेइचिंग के विभिन्न पब बारों में जा कर ग्राहकों के लिए गाना गाता था । उस का कहना है कि उस की आशा है कि लोगों को उस का गीत पसंद आयेगा । अपनी इस कोशिश में उस ने अपना एक विशेष एलब्म भी बनाया। इस की चर्चा में उस ने कहाः

पेइचिंग एक महानगर है , जहां गहरी सांस्कृतिक नींव पड़ी हुई है । पेइचिंग में जहां कहीं भी जाता है , वहां आप को नया नया अनुभव प्रदान कर देता है । मेरी जन्म भूमि दक्षिण चीन के युन्नान प्रांत में ऐसी नई चीजें जानने में दो तीन साल लगता है । पेइचिंग में तो हर जाति की संस्कृति देखने को मिलती है , यदि आप का काम यहीं पर मान्य हुआ , तो इस का मतलब है वह देश के विभिन्न स्थानों में भी मान्य हो गया है ।

पेइचिंग के जाड़ों में कड़ाके की सर्दी होती है , साइकिल चलाने में एमान के हाथ पांव ठंड से सुन्न पड़ते थे , लेकिन जीवन की आवश्यकता भी है और विभिन्न पब बारों में गायन की मांग भी है , एमान को पॉप , जातीय व यूरोपीय गायन शैली बारी बारी से अपनाना पड़ी । एक बार उस ने जातीय गायन शैली में स्वरचित गीत गाया , जिसे एक प्रसिद्ध संगीत निर्देशक ने सुनने के बाद उस से कहा कि आप वा जाति के गायक के रूप में जातीय लोक गीतों का विकास करने की कोशिश करना चाहिए और लोक गीतों की विशेषता उजागर कर अपनी अलग पहचान बनाना चाहिए ।

इस निर्देशक की बातों से एमान की बुद्धि खुली , उस ने संगीत क्षेत्र में अपनी कैरियर के लिए अपना नया स्थान तय किया और तभी से वा जाति में प्रचलित लोक गीतों का संकलन , रूपांतरण और नव सृजन शुरू किया , उस ने वा जाति के परम्परागत लोक गीतों में आधुनिक युग के संगीत तत्वों का समावेश करने का भी प्रयास किया । इस नए काम में समय व धन राशि के खर्च के कारण एमान को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और कभी कभार उस के पास खाने के लिए पैसा भी नहीं रहा । इन कठिनाइयों को दूर करने के लिए एमान ने पेइचिंग सीनेमा कालेज में पढ़ने के दौरान सीखी अभिनय कला का भरोसा लिया, वह कहता हैः

अभिनेता कभी भूखारी का पात्र भी करता है , उसे भूखारी की ही तरह जीवन का अनुभव लेने की भी आवश्यकता है । मैं ने कालेज में अभिनय कला सीखी थी , अब इस का यह काम आया है कि जब मेरे पास खाने के लिए पैसा नहीं है , तो मैं यह समझ कर अपने को तसल्ली देता हूं कि अभी मैं भूखारी के जीवन का अनुभव ले रहा हूं ।

वर्ष 2000 में एक मैदानी व्यायाम क्लब के मालिक ने संयोग से एमान का गीत सुना , उन्हें पता था कि एमान की बालावस्था युन्नान प्रांत के पहाड़ी क्षेत्र में बीता था , तो उन्हों ने एमान से पूछा कि क्या वह इन के क्लब में शामिल हो कर गाइड के रूप में क्लब सदस्यों को पहाड़ों में मैदानी व्यायाम के लिए ले जाने का काम करना पसंद करता है , तो पहाड़ी क्षेत्र से गहरा लगाव रखे एमान को उन का आमंत्रण पसंद आया और उस ने एक नए क्षेत्र में अपनी कैरियर आजमाने का निश्चय किया । पहाड़ी व्यायाम गतिविधियों के दौरान श्री एमान अकसर गितार बजाते हुए क्लब सदस्यों के लिए गीत गाता था । क्लब सदस्यों के शब्दों में एमान का गाना चुंबक की तरह आकर्षक शक्ति रखता है , लहरेदार लय ताल में ऐसी शक्ति है , जो खुली हवा में बादल को चीर कर सीधी उड़ान भरी पक्षी की तरह पहाड़ी वादियों में गूंजता है । एमान का गाना इस विशेष जन समुदाय में मशहूर हो गया । वर्ष 2002 में एमान का प्रथम व्यक्तिगत एलब्म निकला , जिस में उस के स्वलिखित व स्वयं गाये गए पांच गीत भी शामिल हैं । इस सफलता से एमान बहुत प्रभावित हुआ , वर्षों के अथक प्रयत्नों का एक संतोषजनक परिणाम निकला है ।

मनोरंजन क्षेत्र में कामयाबी हासिल होने के साथ एमान को प्रेम भी मिला । दो साल पहले एमान के गीतों से गहरा लगाव रखने वाली एक सिन्चांग लड़की लुलु उस के जीवन में प्रवेश कर गयी और उस की गर्लफ्रैंड बन गयी । सुश्री लुलु का कहना हैः

जब कभी मुझे विषाद परेशानी हुई , तो एमान के गीतों से वह सब कुछ गायब किया जाता है । मैं उस की आवाज में वा जाती के गीत खासा पसंद करती हूं , यों वा भाषा मैं नहीं समझती हूं , पर उस की आवाज मुझे गहरा प्रभावित कर देती है , उस की आवाज के साथ वा जातीय गीतों के तह तक पहुंच सकता है । एमान के गीत मन को मोहित कर लेते हैं।

सुश्री लुलु की आवाज में यह वा जाति के गीत में विषाद से भरा भाव व्यक्त हुआ है । उसे एमान ने कभी वा जाति का गीत नहीं सिखाया , किन्तु अकसर एमान से वा जाति का गाना सुन सुन कर लुलु को खुद भी कुछ न कुछ वा जातीय गीत गाना आ गया ।

वर्तमान में श्री एमान ने पेइचिंग में एमङ नामक छोड़ा सा बार खोला , जिस में पूरी तरह वा जाति के प्राचीन चट्टान चित्र , काष्ठ ढोल , बांस के लैंपशेड तथा वृक्ष जड़ों की मेज कुर्सियां सजाए गए हैं , पब बार में वा जाति के गांवों के फोटो भी लगाए गए । एमान खुद बार में वा जाति का गायन कार्यक्रम देता है । इस तरह उस का यह बार लोगों के लिए मन पसंद सप्ताहांत का विश्राम व मनोरंजन स्थल बन गया । यहां कार्यरत एक वा जातीय लड़की येलाई ने कहा कि एमान के गीतों से उसे अपनी जन्म भूमि की खूब याद आयी ।

मुझे लगा कि एमान के गीतों का हरेक शब्द हमें प्रभावित कर सकता है , वह हमारा असली जीवन है और प्राकृतिक आकर्षण भरा हुआ है।

एमान का कहना है कि अब उस का जीवन बहुत आनंदपूर्ण है, बार के संचालने के अलावा वह पुस्तक भी लिखता है । वह हर साल अपने गांव में लौट जाता है और वा जाति के लोक गीतों का संकलन करता है और खुद लोकगीत भी लिखता है । वा जाति के लोकगीत उस के संगीत सृजन का एक स्रोत है , वह इस के आधार पर नया नया गीत लिखने की कोशिश करता है ।