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(GMT+08:00) 2006-04-17 15:10:02    
चीन में सब से बड़ी घाटी, पंचरंगी झील, पीली नदी

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आज के इस कार्यक्रम में बिलासपुर छत्तीसगढ के चुन्नीलाल कैवर्त, कोआथ बिहार के सुनील केशरी, डी.डी साहिबा, संजय केशरी, सीताराम केशरी, खुशबू केशरी बवीता केशरी, प्रियांका केशरी, एस के जिंदादिल के पत्र शामिल हैं।

बिलासपुर छत्तीसगढ के चुन्नीलाल कैवर्त ने अपने पत्र में चीन की सब से बड़ी औऱ दुर्गम घाटी की जानकारी देने का अनुरोध किया है.

भाई,चीन की सब से बड़ी और दुर्गम घाटी यालुचांगपु घाटी है,जो तिब्बत में स्थित है.लम्बाई और गहराई की दृष्टि से वह अमरीका की कोलोराडो घाटी और पेरु की कोल घाटी से बढकर है.वह 496.3 किलोमीटर लम्बी और औसतन पांच हजार मीटर गहरी है.उस की अधिकतम गहराई 5682 मीटर है.वह मैनलिंग काऊंटी से शुरु होती है और पूर्व की ओऱ बढ़ती हुई नामजाबार्वा चोटी का चक्कर काटती हुई दक्षिण की ओर मुड़ जाती है और मेदोग काऊंटी के पास समाप्त होती है.

यालुचांगपु घाटी मे वार्षिक वर्षा 4 हजार मिलीमीटर से ज्यादा होती हैं औक जल-साधन-प्रचुतरा मिलती है.पन बिजली का उत्पादन क्षमता 3 करोड़ 80 लाख किलोवाट अनुमानितत की गयी है.इस घाटी में सभी प्रकार की उष्णकटीबंधीय,शीतोष्णकटीबंधीय और शीतकटीबंधीय वनस्पतियां पाई जाती हैं.इसलिए उसे वनस्पतियों का प्राकृतिक संग्रहालय की संज्ञा दी गयी है.यहां अजगर,विषैले सर्प,बंगाली बाघ,वानर,जंगली सुअर,बारहसिंघे आदि दुर्लभ जन्तु भी पाए जा सकते हैं.सो जीवों की विविधता की दृष्टि से भी इस घाटी का बड़ा महत्व है.

इस घाटी में हुई खुदाई से यह भी ज्ञात हुआ है कि आज से 8 हजार साल पहले मानव इस घाटी में जीवन व्यतीत करता था.वहां मिट्टी के बर्तन,पत्थर की बनी कुलहाड़ी और तकले प्राप्त हुए हैं.इस घाटी के रहस्य का उद्घाटन करने के लिए चीनी वैज्ञानिकों ने 4 बार घाटी में सर्वेक्षण किया है.

कोआथ बिहार के सुनील केशरी, डी.डी साहिबा,संजय केशरी,सीताराम केशरी,खुशबू केशरी बवीता केशरी, प्रियांका केशरी, एस के जिंदादिल का सवाल है कि चीन में कौन सी ऐसी झील हैं जिस के पानी का रंग बदलता हैं?

भया,चीन में सचमुच एक ऐसी झील है,जिस के पानी का रंग बदलता है.इस झील का नाम पंचरंगी झील है.नाम से आप कल्पना कर सकते हैं कि यह झील कितनी सुन्दर है.

यह झील दक्षिण पश्चिमी चीन के सछ्वान प्रांत की खांगती काऊंटी के दक्षिण में समुद्र की सतह से कोई 4100 मीटर की ऊंचाई पर खड़े लामूजी पहाड़ पर स्थित है.इस क्षेत्र में तिब्बती लोग सघन रूप से बसे हुए हैं,इसलिए इस झील का एक तिब्बती नाम भी है नाखाछोमू.दरअसल यह नाम चीन में ज्यादा जाना जाता है.नाम का अर्थ है पहाड़ी चोटी पर झील.झील के पानी का रंग बदलता दिखता है,पर बदलता नहीं.दुनिया में शायद ही कोई ऐसी झील हो,जिस के जल का रंग स्वयं रूप से बदलता है.चीन की इस झील के जल का रंग धूप की तेज किरणों के विकिरण में ही हरा,नीला,पीला,गुलामी,सुनहरा बदलता दिखता है.बादल से छाया वाले मौसम में इस झील का पानी हमेशा स्वच्छ व हरा होता है.

इस झील के बारे में एक किबदंती भी है कि बहुत पहले तिब्बत में अवस्थित चोमालांमा चोटी पर बसने वाली 5 अप्सराओं में से एक ज़ाशिज़रनमा पूर्व से अपनी बुआ से मिलने के लिए पश्चिम की ओर जा रही थी.रास्ते में वह एक झील के सौदर्य़ में इतनी रम गयी कि आगे चलना भूल गयी ही नहीं,उस ने साथ लिए पंचरंगी तीर और धूप भरा पिटारा झील में भी छोडे.पलक झपकते ही झील के पानी का रंग विचित्र हो गया.सो इस झील को पंचरंगी झील का नाम मिला.बाद में ज़ाशिज़रनमा अप्सरा को पहाडी देव तांगचिंगतोचील्येबा से प्यार हुआ.दोनों सुनहरे बत्तख बनकर इस झील की गहराई में जलक्रियाएं किए करते थे.हर महीने की पूर्णिमा में दोनों जल- सतह पर आकर हिलोरें मारते थे,जिस से पूरी झील रंगबिरंगी दिखाई दी.

सुनील केशरी,डी.डी साहिबा,संजय केशरी,सीताराम केशरी,खुशबू केशरी बवीता केशरी, प्रियांका केशरी, एस.के.जिंदादिल यह भी पूछते हैं कि चीन में पीली नदी को पवित्र मातृनदी क्यों पुकारा जाता हैं?

दोस्तो,पीली नदी चीन की दूसरा बड़ी नदी है.उस का उद्गम स्थान छिंगहाई प्रांत के पायानखाला पर्वत की उत्तरी ढलान पर है.नदी छिंगहाई,सछ्वान,कानसू,निंगश्या,भीतरी मंगोलिया,शानशी,

शनशी,हनान और शानतुंग आदि 9 प्रांतों से गुजरती है और 5464 मीटर का रास्ता तयकर पूर्व के पाहाई समुद्र में जा मिलती है.

पीली नदी के क्षेत्र में मौसम नम्र है,जमीन उपजाऊ है,जल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और जीवों व वनस्पतियों की बहुतायत है.इस से चीनी राष्ट्र के जीवन और विकास के लिए बेहद अनुकूल स्थितियां तैयार हुई थी.पुरातत्वविदों ने इस क्षेत्र में खुदाई के दौरान आदिम मानव के बहुत से जीवाश्म और आवासीय खंदहर पाए हैं.इस सब से साबित हुआ है कि आदमिकाल में ही चीनी राष्ट्र के पूर्वज इस क्षेत्र में जीवन व्यतीत करने के साथ खेतीबारी भी कर चुके हैं.यह क्षेत्र चीनी राष्ट्र का हिंडोला है,जिस ने अनेक पीढ़ियों के चीनी लोग पाले-पोसे हैं.यही नहीं,वह दुनिया में सभ्यता को जन्म देने वाला एक प्रमुख स्थान भी है.

पीली नदी के क्षेत्र में विशाल हेक्टर में उपजाऊ खेतीयोग्य भूमि है,जिस की चीनी राष्ट्र के जीवन और विकास में अहम भूमिका रही है.इसलिए पीली नदी को पवित्र मातृनदी का नाम दिया गया है.