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(GMT+08:00) 2006-04-14 15:24:24    
दूसरों की मदद करने में लगी आदर्श महिला श्रीमती ली सिअ

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सिन्चांग वेवूर स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ऊरूमुची के उत्तर पूर्व में स्थित पैशान सामुदायिक बस्ती में तीन हजार हान व वेवूर आदि अल्पसंख्यक जातियों के निवासी रहते हैं । इस रिहाइशी बस्ती में एक बुजुर्ग महिला विशेष तौर पर मशहूर है , जिन्हें स्थानीय निवासी स्नेह से दादी ली कहते हैं । ली सिअ नाम की यह बुजुर्ग महिला इसलिए प्रसिद्ध हैं कि उन्हें न सिर्फ बस्ती के विभिन्न निवासियों की हालत साफ साफ मालूम है , साथ ही वे दूसरों को मदद देने के लिए हमेशा आगे आगे आती हैं । बस्ती में जो हान जाति के लोग रहते हैं अथवा अल्पसंख्यक जाति के लोग , जिस किसी को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है , श्रीमती ली जरूर उसे सहायता देने के लिए सब से पहले आ पहुंचती हैं । श्रीमती ली सालों से पैशान सामुदायिक बस्ती की निवासी कमेटी की सदस्य रही हैं ।

60 वर्षीय श्रीमती ली सिअ रिटायर होने के बाद ही पैशान रिहाइशी बस्ती की निवासी कमेटी की सदस्य चुनी गई । सितम्बर 1999 से अब तक उन्हें निवासी कमेटी में काम करते हुए 7 साल हो गए हैं. सामुदायिक बस्ती में वे मुख्यतः परिवार नियोजन और रोग संगरोध का काम करती हैं , अपने इस कार्यभार को बेहतर निभाने के अलावा वे हमेशा बस्ती में जीवन में कठिनाइयों से ग्रस्त लोगों को मदद भी देती है , खास कर वे अकसर बस्ती में रहने वाले अल्पसंख्यक जातियों के निवासियों की निस्वार्थ सेवा करने में आगे आती हैं । उन्हों ने बस्ती के निवासियों के लिए अखिरकार कितने हितकारी काम किए हैं ,कोई भी साफ साफ बता नहीं सकता । जब कभी फुरसत मिलती है , तो वे विभिन्न कठिनाइयों से ग्रस्त लोगों के घरों में जा जा कर हालचाल पूछती है ।

अब श्रीमती ली सिअ एक बार फिर वेवूर जाति की गरीब निवासी सुश्री रेशालेती के घर आयी । जब जब ली सिअ रेशालेती के घर आयी , तब रेशालेती की आंखें कृतज्ञ डबडबाती रही है । वे दूसरों से कहा करती हैं कि यदि दादी ली की सहायता नहीं होती , तो उन का जीवन पता नहीं किस तरह दूभर हो जाता ।

बीमारी से पीड़ित होने के कारण रेशालेती का पति सालों से पलंग पकड़ता रहा है , घर की अधिकांश आय पति के रोग उपचार में खर्च हो जाती है , चार संतानों में किसी की नौकरी भी नहीं है , घर की जीविका महज पति के 500 य्वान के पैंशन पर निर्भर करती है । कभी कभी घर के पास सब्जी खरीदने के चंद कुछ य्वान के पैसे भी नहीं रहे । श्रीमती ली सिअ को रेशालेती के घर की कठिनाइयां मालूम हुई, तो वे अकसर उन्हें मदद देने आती है । रेशालेती की बेटी की संतान को जब आवास प्रमाण पत्र नहीं मिला था , तो ली सिअ की मदद से उस का आवास पंजीकृत कराया गया । इस बात की चर्चा में रेशालेती हमेशा कृतज्ञ रही । वे कहती हैः

दादी ली की कृपया से मेरी पोती का आवास पंजीकृत हो चुका है , इस काम के लिए मैं बिलकुल लाचार हुई थी , दादी ली ही थी , उन्हों ने मुझ को लेकर पंजीकरण संस्था में पोती के लिए पंजीकरण करवाया । आम समय भी दादी ली मेरे घर की हालत और मेरे पति की बीमारी की स्थिति का ख्याल रखती हैं । वे मेरी सगी संबंधी नहीं है , लेकिन उन्हों ने मेरी मदद करने के लिए बहुत से काम किए है , वे मेरी अपनी सगी संबंधी से भी अच्छी हैं ।

रेशालेती की भांति पैशान बस्ती में बहुत से निवासी , जिन्हें ली सिअ से मदद सहायता मिली है , उन्हें अपनी सगी संबंधी समझते हैं । ली सिअ जीवन के हर छोटे छोटे पहलु में बस्ती निवासियों का तवज्जह करती हैं और उन्हें अपना परिजन समझती है । जो कोई भी मदद के लिए आता है , उसे वे हर संभव सहायता देती हैं । उन का कहना हैः

रिहाइशी बस्ती में हान और अल्पसंख्यक जातियों के लोग रहते हैं , मेरी नजर में वे सभी समान होते हैं । हमारी बस्ती में बहुत से अल्पसंख्यक जातियों के निवासी हैं , उन की संतानें ज्यादा हैं , इसलिए अनेक घरों में कठिनाइयां होती हैं । उन की कठिनाइयां मेरी अपनी ही कठिनाई हैं । यो मेरा घर समृद्ध नहीं है , लेकिन मैं उन्हें अपने सगे रिश्तेदार समझ कर हार्दिक रूप से चाहती हूं कि वे सुखद जीवन बिताते हैं । रोज अगर मैं उन के लिए कुछ न कुछ कर सकती हूं , तो मैं अपने उस दिन को सार्थक मानती हूं ।

श्रीमती ली सिअ का मासिक वेतन केवल एक हजार य्वान है , लेकिन जीवन में कठिनाइयों से पीड़ित लोगों को मदद देने के लिए वे कभी कंजूसी नहीं करती है। वेवूर जाति की निवासी श्रीमती सियाजादंमु के परिवार के तीन सदस्य हैं , लेकिन मासिक आय सिर्फ तीन सौ य्वान । पिछले साल सियादादंमु के बच्चे को स्कूल जाना था , पर उस समय घर में स्कूली फील के लिए पैसा नहीं था , वे बहुत चिंतित हुई , और उसे दादा ली की याद आयी , वे निवासी कमेटी में दादाली से मिलने गई , तो ली सिअ ने बिना हिचके तुरंत सौ य्वान का पैसा निकाल कर दे दिया । सौ य्वान का मामला बड़ा तो नहीं था , लेकिन इस बात को ले कर सियाजादंमु दादी ली का यह एहसान कभी नहीं भूल सकती । सियाजादंमु के दिल में केवल यह एकमात्र बात नहीं है । उन्हों ने यह भी कहाः

पिछले साल मेरे मकान का दरवाजा खराब हो गया । एक बार दादी ली मेरे घर के सामने गुजरी , तो यह बात पता चला , तब उन्हों ने अपने पैसे से एक नया दरवाजा खरीद कर मेरे मकान पर लगवाया । सच कहिए , मेरे सगे भाई बहन ने भी मुझ से मिलने आते वक्त मेरे लिए दरवाजा लगवाने की नहीं सोचा । दादी ली मेरा बराबर ख्याल रखती हैं , मुझे बड़ी आत्मीयता महसूस हुई है ।

श्रीमती ली सिअ कहती हैं कि वे बाजार में खरीदने जाना नहीं चाहती हैं , वे चाहती हैं कि कुछ पैसे बचा कर आवश्यकता पड़ने पर कठिनाइयों से ग्रस्त और मदद के जरूरी लोगों को सहायका देती हैं । उन का कहना है कि अपने खाने पीने से बेहतर होगा कि मुसिबतों में फंसे लोगों को थोड़ा सहारा दे ।

रेबियाहान एक विकलांग वेवूर महिला है । परिवार पर दूसरों का कर्ज लदा है और इस की जमानत पर अपना मकान भी रखा गया । वे किराये पर लिए मकान में रहते थे , जो सर्दियों में ठंडा और गर्मियों में तपता था । दादा ली की मदद में उन का नया मकान निर्मित हुआ और उन का पूरा परिवार फिर अच्छे मकान में रह गया ।

दादी ली मेरी सगी बहन जैसी हैं , वे अकसर मेरे घर पर आती है और मदद के लिए हाथ बाटती हैं । मेरी कोई दिक्कत हुई , तो भी ली सिअ से हल करवाना पसंद करती हूं । मेरी कोई परेशानी हो , तो उन्हें बताना चाहती हूं । जब कभी वे नहीं आयी , मैं उन की खूब याद भी करती हूं ।

पैशान बस्ती की रिटायर निवासी श्रीमती त्ये क्वी लान ली सिअ से पिछले 20 सालों से परिचित है । ली सिअ की दूसरों को निस्वार्थ सहायता देने की भावना ने उन पर गहरी छाप छोड़ी । वे ली सिअ का बड़ा स्मान आदर करती हैं । श्रीमती त्ये क्वीलान की याद में ली सिअ हमेशा व्यस्त रहती हैं । वे कहती हैः

इतवार के दिन वे हमेशा सबेरे सबेरे उठती हैं , कभी आटा , तो कभी खाद्यतेल ले कर गरीब घरों को पहुंचाने जाती हैं , मैं तहेदिल से उन का सम्मान करती हूं । वे सचमुच एक निस्वार्थ और उदार भावना युक्त महिला हैं । दूसरों के कल्याण के लिए उन्हों ने अपने घर के कामकाज की बलि की है ।

श्रीमती ली सिअ का अपना पोता है , लेकिन उन्हें पोते का देखभाल करने के लिए फुरसत बहुत कम मिलती । इस पर वे खुद बहुत दुखी भी है , कभी सोचते ही आंसू भी आती थी । जब दिल में दुख हुई , तो वे नजदीकी गर्म चश्मे पर कपड़ा धोने जाती हैं , इस तरह अपनी परेशानी को भगा देती हैं । लेकिन बस्ती के निवासियों की सेवा करने पर उन्हें कभी आपत्ति नहीं है और हमेशा बड़े उत्साह के साथ दूसरों की सेवा में जुट जाती हैं ।

मई 2005 में श्रीमती ली सिअ देश की राष्ट्रीय श्रेणी का जातीय एकता व प्रगति आदर्श पुरस्कार से सम्मानित किया गया, लेकिन वे खुद तो समझती हैं कि उन्हों ने जो किया है , वह पर्याप्त नहीं है । उन के आस पास जो बहुत से लोग कठिनाइयों से पीड़ित हैं , उन्हें मदद देने के लिए बहुत ज्यादा प्रयास करना चाहिए ।