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वास्तव में यह व्यवस्था मिङ राजवंश की एक कर वाली व्यवस्था का ही जारी रूप थी। इस व्यवस्था में नाना प्रकार के करों को मिलाकर, जिन में व्यक्ति कर का एक भाग और बेगार कर भी शामिल था, एक ही तरह की लेवी का रूप दे दिया गया था, जिस की बसूली चांदी में की जाती थी।
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