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चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता श्री ल्यू च्येन शाओ ने छैः तारीख को कहा कि जापान के ईने गिने नेताओं के जिद के साथ यासुकुनी मंदिर का दर्शन करने से चीन-जापान संबंध के राजनीतिक आधार को क्षति पहुंचायी गयी है। इस बाधा को यथाशीघ्र ही मिटाकर द्विपक्षीय संबंधों का सुधार करना दोनों देशों की जनता की समान अभिलाषा है।
श्री ल्यू च्येन शाओ ने पेइचिंग में आयोजित एक नियमित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हाल में चीन व जापान के संबंध में कठिनाई आयी है। चीन का मानना है कि इस का मुख्य कारण यह है कि जापानी नेता द्वितीय विश्व युद्ध के प्रथम श्रेणी के युद्ध अपराधियों के स्मृति चिंह रखने वाले यासुकुनी मंदिर का दर्शन करने पर अड़े रहते हैं। इसी कारण से चीन व जापान के राजनीतिक संबंध गतिरोध में फंस गये। चीन का मानना है कि यह जापानी जनता की जिम्मेदारी नहीं है, चूंकि अधिकांश जापानी जनता चीनी जनता की ही तरह चीन-जापान मैत्री का पक्ष लेती है। दोनों देशों की सरकारों का समान कर्त्तव्य यह है कि दोनों देशों की जनता की समान अभिलाषा के अनुसार सक्रिय कदम उठाकर निरंतर चीन-जापान संबंध को सुधार कर विकसित किया जाए और दोनों देशों की जनता को कल्याण लाया जाए। चीन सरकार ने स्पष्ट रुप से जापान को यह संदेश पहुंचा दिया है, आशा है कि इसे जापान की ओर से प्रतिक्रिया मिलेगी।
श्री ल्यू च्येन शाओ ने कहा कि चीन चीन-जापान संयुक्त वक्तव्य जैसे तीन राजनीतिक दस्तावेजों के सिद्धांतों पर कायम रहेगा और इतिहास से सबक लेकर भविष्य की उन्नमुख भावना से समानता व सलाह मश्विरा के जरिये दोनों देशों के बीच मौजूद समस्याओं का अच्छी तरह निपटारा करेगा और चीन-जापान मैत्री की परिस्थिति की रक्षा करेगा।
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