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(GMT+08:00) 2006-04-03 12:45:34    
पेइचिंग की चुंगक्वानछुन सिलिकान वैली छिंगह्वा विश्वविद्यालय

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आज के इस कार्यक्रम में हम नरनौल हरियाणा के उमेश कुमार के प्रश्नों के उत्तर दे रहे हैं।

नरनौल हरियाणा के उमेश कुमार ने अपने पत्र में पेइचिंग की चुंगक्वानछुन सिलिकान वैली और छिंगह्वा विश्वविद्यालय के बारे में जानकारी हासिल करने की इच्छा व्यक्त की है

पहले हम चुंगक्वानछुन सिलिकान वैली के बारे में जानकारी देंगे।.चुगक्वानछुन उत्तर- पश्चिमी पेइचिंग का एक इलाका है, जो चीन की दो प्रसिद्ध उच्च शिक्षा संस्थाओं—पेइचिंग विश्वविद्यालय और छिंगह्वा विश्वविद्यालय से काफी नजदीक है। बीसेक साल पहले वहां इलेकट्रोनिक कल-पुर्जों का कारोबार शुरू हुआ.। अब वह विकसित होकर चीन के उच्च वैज्ञानिक व तकनीकी उत्पादों का एक प्रमुख बाजार बन गया है।उसका पिछले वर्ष का व्यापार 30 अरब चीनी य्वान से अधिक रहा। चुंगक्वानछुन में कंप्यूटर से जुड़े हाडवैयर और सौफ्टवैयर के विकास और निर्माण का काम भी चलता है।चीनी बाजारों में 50 फीसदी नोटबुक कंप्यूटर और इस से जुड़े 40 फीसदी सोफ्टवैयर चुंगक्वानछुन में बनाए जाते हैं। इसलिए लोग इसे सिलिकाँन वैली कहकर पुकारते हैं।

चुंगक्वानछुन में इस समय अनेक उच्च विज्ञान-तकनीकी उद्यान हैं। उन में सूचना-प्रौद्योगिकी का अनुसंधान-कार्य जोरों पर है। सोफ्टवैयर ,इंटिग्रेटिड सर्किट डिजाइन,मोबाइल दूरसंचार साजोसामान, नोटबुक कंप्यूटर, स्कैनर, दुर्लभ चुम्बकीय सामग्री, रेडियो कार्यक्रम प्रसारण की क्षमता वाले डिजिटल संयंत्र, सिलिका के बड़े व्यास वाले इकहरे दुकड़े और सौरऊर्जा से ताप जुटाने वाले उपकरण बनाने और बेचने के क्षेत्रों में चुंगक्वानछुन चीन में सब से आगे हैं। स्वतंत्र बौद्धिक संपदा आधिकार प्राप्त नक्षत्रप्रकाश नामक श्रृंखलाबद्ध डिजिटल मल्टीमीडिया में काम आने वाले CMOS चिप भी यहां बनती हैं। इन का व्यापार पूरी दुनिया की इस किस्म के उत्पाद के बाजार का 40 प्रतिशत बनता है।अब वे दुनिया में हाथोंहाथ बिक रहे हैं। नवीनत्तम अनुमान के अनुसार इस साल भी इन की बिक्री दुनिया में सब से ज्यादा रहेगी।

चुंगक्वानछुन में स्थापित ल्यानश्यान,फांगजंग,थुंगफांग,ज़ीक्वान और चिंगछांगछंग आदि उच्च विज्ञान-तकनीकी उद्यानों द्वारा निर्मित कंप्यूटर देश के 50 प्रतिशत से भी ज्यादा कंप्यूटर बाजारों को पाट चुके हैं। अब इस क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी से जुडी कंपनियों की संख्या 2000 से अधिक हो चुकी है। इन कंपनियों की कोशिशों से पेइचिंग में सूचना प्रौद्योगिकी के भारी विकास की पुख्ता नींव डाली गयी है। पिछले साल यहां के विभिन्न उच्च विज्ञान-तकनीकी उद्यानों का उत्पादन-मूल्य 91 अरब 50 करोड़ य्वान दर्ज किया गया,जो पूरे पेइचिंग शहर के कुल उत्पादन-मूल्य का 60 फीसदी था।चुंगक्वानछुन में विकसित पेइचिंग के सोफ्टवैयरों का निर्यात पूरे देश के सोफ्टवैयरों के कुल निर्यात का दो तिहाई भाग है।

उमेश कुमार जी चुंगक्वानछुन के पास स्थित छिंगह्वा विश्वविद्यालय के बारे में भी जानना चाहते हैं।अब हम इस का संक्षिप्त परिचय देंगे।

छिनह्वा विश्वविद्यालय इने-गिने अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त चीनी उच्च शिक्षा संस्थाओ में से एक है। इस की स्थापना सन् 1911 में हुई थी। स्थापना के बाद के पहले 14 वर्षो में इस में वास्तव में केवल हाई स्कूल के कोर्स खोले गये थे। सन् 1925 से बैचलर डिग्री के लिए 4 वर्षीय कोर्स शुरू किया गया.1929 में उस में उच्च स्तर के शोर्धकर्ताओं के प्रशिक्षण के लिए प्रथम विशिष्ट प्रतिष्ठान कायम किया गया। 1949 में नये चीन की स्थापना के बाद इस विश्वविद्यालय ने अपने मूल आधार पर शिक्षण और अनुसंधान-कार्य में अभूतपूर्व प्रगति हासिल की। वर्ष 1952 में चीनी उच्च शिक्षा मंत्रालय के आदेश पर इस विश्वविद्यालय ने अपने कार्य का केंद्र इजीनियर तैयार करने और वैज्ञानिक अनुसंधान करने पर विस्थापित करना शुरू किया। पिछली शताब्दी के 70 वाले दशक के अंत में चीन में सुधार की नीति लागू होने के बाद छिनह्वा विश्वविद्यालय पूर्ण विकास के नए दौर में प्रविष्ट हुआ। अब इस में प्राकृतिक विद्या, सामाजिक व साहित्यिक विद्या, वास्तुकला,मशीनरी इंजीनियरिंग,सूचना प्रौद्योगिकी, अर्थ-प्रबंधन, कानून, ललितकला, सार्वजनिक प्रबंधन, प्रायोगिक तकनीक और चिकित्सा से जुड़े 12 कालेजों वाले 48 विभाग हैं। इस दृष्टि से वह एक बहुविषयी उच्च शिक्षालय भी कहा जा सकता है,हालांकि बहुत से लोग मानते हैं कि वह इंजीनियर तैयार करने में देश में सब से आगे है। यह सच है कि इस विश्वविद्यालय ने बड़ी संख्या में वैज्ञानिक तैयार किए हैं,जिन में से अनेकों ने वैज्ञानिक उपलब्तियों के लिए अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किये।

विज्ञान व शिक्षा के सहारे देशोद्धार करना चीन की वर्तमान राष्ट्रीय नीति है। इसे लागू करने में छिनह्व विश्वविद्यालय की अहम भूमिका रही है। हाल ही में चीन सरकार द्वारा घोषित वैज्ञानिक अनुसंधान-कार्यों का लगभग 60 प्रतिशत भाग इस विश्वविद्यालय को सौंपा गया।.अब इस में पढ़ रहे 25 हजार विद्यार्थी देश के उज्ज्वल भविष्य और अपने मूल्यों की प्राप्ति के लिए पढाई में एक-दूसरे से आगे निकने की होड़ में हैं।.