हजारों वर्षों तक चीनियों के बीच जो रीति प्रचलित रही उसमें आम तौर पर चीनी पंचांग के बारहवें माह की 23 तारीख से पहले माह की 15 तारीख तक वसंत त्यौहार की खुशियां मनायी जाती रही हैं। इस तरह करीब तीन हफ्ते का यह आयोजन वसंत त्यौहार की पूर्ववेला यानी पुराने साल के अंतिम दिन की रात और पहले साल की पहले दिन तक धूमधाम से मनाया जाता रहा है। चीन के विभिन्न स्थानों में वसंत त्यौहार की खुशियां मनाने की परम्परा भी अलग-अलग है, पर चीनी पंचांग के अनुसार यह निश्चित है कि साल की अंतिम रात सभी परिजन इकट्ठे होकर भोजन और मनोरंजन करें। दक्षिणी चीन में इस दिन के शानदार भोज में सोयाबीन का पनीर और मछली होना जरूरी माना जाता है, क्योंकि चीनी भाषा में पनीर व मछली के उच्चारण से खुशहाली का अर्थ निकलता है यानी यह कामना कि नव वर्ष में जीवन और खुशहाल हो। उत्तरी चीन के लोग इस रात के विशेष भोज में च्याओ च नामक पकवान खाना जरूरी समझते हैं। इधर के सालों में जीवन स्तर उन्नत होने के चलते बहुत से शहरी घर में ऐसा शानदार भोज तैयार करने के बजाय रेस्त्रां जाने लगे हैं। यों अधिकांश चीनी अपने हाथों से स्वादिष्ट खाना तैयार करना ज्यादा पसंद करते हैं और इस तरह वसंत त्यौहार का मजा लेते हैं। वसंत त्यौहार पर चीनी लोगों के बीच लसदार चावल से विशेष खाद्य बनाने की परम्परा भी रही है। यह जन जीवन स्तर के साल ब साल उन्नत होने और परिवारों के सुखी जीवन बिताने का प्रतीक है।
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