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(GMT+08:00) 2006-01-10 10:06:56    
श्रोताओं की नई प्रतिक्रियाएं

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दोस्तो, आज मैं जो प्रथम पत्र लाती हूं , वह रायपुर छत्तीसगढ़ से श्री मनराखन लाल सादू का है । अब सुनिए , उन्हों ने पत्र में क्या क्या लिखा है । भाई मनराखन लाल सादू ने कहा कि आप के द्वारा संप्रेषित श्रोता वाटिका का अंक सात एवं थाइवान द्वीप के बारे में सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता की प्रश्नावली प्राप्त हुए । इस के लिए हमारे क्लब की ओर से हार्दिक धन्यावाद स्वीकार कीजिए । श्रोता वाटिका के इस अंक में बांडुंग सम्मेलन के ऐतिहासिक व अविस्मर्णीय एशिया अफ्रीका संबंध , भारत चीन की सांस्कृतिक आवाजाही जैसे संग्रहनीय आलेख है , साथ ही सी . आर.आई क्लब के दोस्तों द्वारा संप्रेषित कविताओं और चित्रों ने श्रोता वाटिका के इस अंक को और सुन्दर बना दिया है ।

हमें चीन का भ्रमण के अंतर्गत मनोरम घाटियों की सैर के साथ ही भारत चीन व्यापार केन्द्र के बारे में दी गई जानकारी बड़ी अच्छी लगी । वहीं आप से मिलिए के अंतर्गत चीन में अध्ययन हेतु गए एक भारतीय दोस्त से मुलाकात कर उन के चीनी अनुभवों की नई जानकारी मिली । थाइवान द्वीप के बारे में दी गई जानकारी बहुत अच्छी रही , हम लोग आप के प्रतियोगिता में जरूर भाग लेंगे ।

मनराखन लाल सादू को धन्यावाद हैकि आप ने पत्र भेज कर श्रोता वाटिका के नए अंक तथा हिन्दी कार्यक्रमों के बारे में अपनी अच्छी अच्छी राय बतायी है , जिस से हमें उस का सही आकलन प्राप्त हुआ ।

तो बहनो और भाइयो , अब मेरे हाथ में आया है रथगिरी महाराष्ट्र के सतीश लक्षमण बारास्कर का बहुत अच्छा लिखावट वाला पत्र , उन्हों ने इस में कहा कि चीन का भ्रमण में दक्षिण चीन के यो जाति की जानकारी बहुत अच्छी लगी । लाल कपड़े पहनने की वजह से उन्हें लाल यो जाति से संबोधित किया जाता है । यह सुन कर बहुत आश्चर्य लगा । 13 हजार से अधिक जन संख्या वाली इस जाति की लड़कियां 13 साल के बाद ही अपने बाल कटवाना बन्द करती हैं , जानकर काफी हैरानी हुई । ये लड़कियां अपने बालों को सुन्दरता और दीर्घायु का प्रतीक मानती है । तथा अपने बालों को जान से प्यार करती हैं और अपने लम्बे बालों की दर्शन केवल अपने पति को कराती है , यह सुन कर चीन की संस्कृति का एक अलग ही पहलु सामने आया । ये प्राचीन संस्कृति एवं सभ्यता ही चीन तथा विश्व की सच्ची दौलत है । ऐसी सांस्कृतिक परम्पराएं ही भारत व चीन को दुनिया से अलग करती है । 1.8 मीटर तक लम्बे बाल रख कर अपनी पम्परा का सम्मान करने वाली लाल यो जाति की यह युवती आज की इस पश्चमीकृत दुनिया में सचमुच नमस्कार के योग्य है। लम्बे बाल , चांदी के आभूषण एवं कशीदे के कपड़े ये तीन विशेषताँ लाल यो जाति की युवतियों को विश्व की अन्य युवतियों से अलग करती हैं । उन की सुरीली और मिठी आवाजों में सुनाए गए गाने भी पसंद आये । इतनी अच्छी जानकारी के लिए धन्यावाद । अगर हो सके , तो इन की अच्छी सी तस्वीर भेजे , भविष्य में कभी चीन आना हुआ , तो इस जगह जरूर जाऊंगा और चावल की सुगंधित मदीरा का स्वाद लूंगा ।

सतीश भाई ने चीन की लाल यो जाति के बारे में प्रसारित कार्यक्रम का विस्तार से उल्लेख किया और अपनी प्रतिक्रिया बतायी । इस प्रकार का विस्तृत चर्चा वाला पत्र लिख कर आप ने हमें यह जानने को संभव बनाया है कि हमारा साप्ताहिक कार्यक्रम किस कदर तक श्रोताओं को पसंद आता है । इस अच्छे पत्र के लिए मैं हिन्दी परिवार की ओर से आप को धन्यावाद देती हूं ।

लखीमपुर असम के प्रांजल कोछ हमारे बहुत पुराने श्रोता हैं , जिन्हों ने सी .आर .आई के हिन्दी विभाग को पिछले दिनों में बहुत से पत्र लिखे थे , अब भी मेरे सामने उन का एक पत्र है, किन्तु जिस में सी .आर .आई हिन्दी कार्यक्रमों पर नहीं लिखा गया , बल्कि श्रोता वाटिका के लिए 21 चुटकुले लिखे गए । यहां मैं श्री पांजल कोछ को विशेष रूप से धन्यावाद देते हैं कि उन्हों ने बहुतेरे चुटकुले भेज कर श्रोता वाटिका का समर्थन करने की कोशिश की है । श्रोता मित्रों के सभी सार्थक कविताओं ,लघु आलेखों और छोटी कथाओं तथा चुटकुलों का हम स्वागत करते हैं , जो उपयोगी और अच्छा हो , श्रोता वाटिका में छपने के लिए चुने जाएंगे ।

औरेया उत्तर प्रदेश के काल्क प्रसाद कीर्ति प्रिय ने हमें लिखे पत्र में कहा कि महिला दिवस पर चीनी महिलाओं की स्थिति पर रिपोर्ट सुनी , बहुत सुन्दर लगी , आज चीन में महिलाओं की स्थिति पुरूषों के समान है और प्रत्येक पदों पर महिला भी नियुक्त होती है । रिपोर्ट बहुत यथार्थ थी ।

आज के कार्यक्रम के अन्तर्गत श्रीमती क्वो छिंगलान के बारे में बताया गया , क्वो छिंग लान से मैं पूर्व परिचित हूं , मैं ने महान स्वतंत्रता सेनानी डाक्टर कोटनिस पुस्तक को सन् 1983 में पढ़ा था । तब से मैं श्री शांताराम द्वारिका प्रसाद कोटनीस और क्वो छिंग लान के बारे में जानता हूं । और क्वो छिंग लान को मां की तरह मानता हूं । क्वो छिंग लान ने प्यार से स्वेटर बना कर डाक्टर कोटनीस को दिया था और वे अब ताल्यान में रहती हैं ।

काल्क प्रसाद कीर्ति प्रिय का यह पढ़ कर हमें महान भारतीय दोस्त डाक्टर कोटनीस की पुनः याद आयी , उन्हों ने अपने शानदार जीवन से चीन और भारत के बीच महान दोस्ती का पुल बनाया था , जिस से प्रेरित हो कर चीनी और भारतीय जनता की परम्परागत मित्रता सदैव आगे बढ़ती जाएगी । डाक्टर कोटनीस हमेशा हमारे दिल में याद रहेंगे ।