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(GMT+08:00) 2005-12-26 09:27:53    
चीन का नाम लाओत्से और चीन का स्वतंत्रता दिवस

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आज के इस कार्यक्रम में हम राइपुर, छत्तीसगढ़ के आनंद मोहन बैइन,बलीदपुर, मऊ, उत्तर प्रदेश के इंडो-चाइना डी एक्स क्लब के अध्यक्ष एच आई फारूकी, उपाध्यक्ष एम एन फारूकी, सचिव ताउसीफ फारूकी,मुजफ़्फ़रपुर, बिहार के जसीम अहमद, रजिया अहमद, अदीबा सुलताना, अतीया सुलताना, कोआथ, बिहार के विश्व रेडियो श्रोता संघ के सुनील केशरी, डीडी साहिबा और आजमगढ़, उत्तर प्रदेश के अनीस हैदर के पत्र शामिल कर रहे हैं।

अब मुजफ़्फ़रपुर बिहार के जसीम अहमद, रजिया अहमद, अदीबा सुलताना, अतीया सुलताना कोआथ बिहार के विश्व रेडियो श्रोता संघ के सुनील केशरी, डी डी साहिबा का पत्र लें। उन्होंने अपने पत्र में पूछा है कि चीन का नाम चीन कैसे और क्यों रखा गया, लाओत्से कौन थे, उन के बारे में विस्तार से बताएं।

श्रोता दोस्तो, प्राचीन काल में चीन को चुंगक्वो नाम दिया गया। यह नाम चीन के चओ राजवंश काल में प्रचलित रहा। पर उस वक्त चुंगक्वो का मतलब चीन नहीं, राजधानी था।

चुंग का चीनी भाषा में अर्थ केन्द्र है। राजा का स्थल केन्द्रीय स्थल माना जाता था, इसलिए चुंगक्वो से राजधानी का अर्थ लिया गया। बाद में चुंगक्वो का अर्थ बदल कर समूचा देश हो गया।

 प्राचीन चीन का छीन राजवंश बहुत शक्तिशाली था और विश्वविख्यात भी। इसलिए बाद में सारी दुनिया ने चीन को छीन नाम दिया पर उच्चारण में फर्क होने के कारण छीन चीन में बदल गया।

अब आपको लाओत्से के बारे में भी कुछ जानकारी देते हैं। लाओत्से 2500 साल पूर्व चीन के वसंत व शरत काल में हुए विचारक और ताउपंथ के संस्थापक थे। उन्होंने लाउत्से नामक पुस्तक या ताउतह सूत्र लिखा। उन के ताउतह सूत्र में संसार के परिवर्तन पर प्रकाश डाला गया है। चीन की दर्शन प्रणाली पर इस सूत्र का भारी प्रभाव पड़ा।

लाओत्से का जन्म उस वक्त के छू राज्य की खू कांउटी या आज के हनान प्रांत के लूई जिले में हुआ था।

प्राचीन चीन के महान शिक्षक और विचारक कंफ्यूशियस ने लाओत्से के पास रहकर उनसे मर्यादा सीखी।

ताउ पंथ के संस्थापक लाउत्से चीन के महान दर्शनशास्त्री थे।

प्राचीन चीन में मुख्यतः कंफ्यूशियस मत, बौद्धमत और ताउमत प्रचलित थे। इन तीन मतों की विचारधारा ने चीन के सामंती समाज की राजनीति, अर्थतंत्र, धार्मिक विश्वास, साहित्य व कला, विज्ञान व तकनीक और रीति-रिवाज पर भारी प्रभाव डाला। लाउत्से को ताउमत का संस्थापक माना जाता है, क्योंकि ताउशास्त्र की विचारधारा ही ताउमत का आधार है।

ताउमत में प्राणायाम का अभ्यास भी प्रचलित है। यह पद्धति भी ताउशास्त्र का सहारा है।

अंत में अजमगढ़, उत्तर प्रदेश के अनीस हैदर का पत्र देखें। उन्होंने पूछा है कि चीन में स्वतंत्रता दिवस कब मनाया जाता है।

अनीस हैदर भाई, 7 जुलाई, 1937 को जापानी आक्रमणकारी सेना ने पेइचिंग के दक्षिण-पश्चिमी उपनगर के मार्को पोलो पुल के निकट वहां तैनात चीनी सेना पर हमला किया और इस से चीन में जापानी आक्रमण विरोधी युद्ध छिड़ा। चीनी सेना व जनता ने जापानी आक्रमणकारी सेना को परास्त करने के लिए कठोर संघर्ष किया।

14 अगस्त, 1945 को. जापानी सम्राट ने एक विज्ञप्ति जारी कर युद्ध की समाप्ति की घोषणा की और पोत्सडम विज्ञप्ति को स्वीकार किया।

2 सितंबर को, जापान सरकार ने एक आत्मसमर्पण पत्र पर हस्ताक्षर कर बिना किसी शर्त के आत्मसमर्मण करना स्वीकारा। चीन सरकार के प्रतिनिधि ने भी इस पत्र पर हस्ताक्षर किए।

  3 सितंबर को चीन में तीन दिनों तक युद्ध की विजय मनाई गई। तत्कालीन चीन सरकार ने 3 सितंबर को स्वतंत्रता दिवस घोषित किया।

वर्ष 1949 के अंत में चीन लोक गणराज्य सरकार ने 15 अगस्त को जापानी आक्रमण विरोधी युद्ध का विजय दिवस घोषित किया।

  13 अगस्त 1951 को चीन सरकार ने 3 सितंबर को जापानी आक्रमण विरोधी युद्ध का विजय दिवस की मान्यता दी।

वर्ष 1999 में चीनी राज्य परिषद ने जापानी आक्रमण विरोधी युद्ध से जुड़े तीन दिवसों की घोषणा की। इन में 7 जुलाई को जापानी आक्रमण विरोधी युद्ध दिवस, 3 सितंबर को जापानी आक्रमण विरोधी युद्ध का विजय दिवस और 18 सितंबर को उत्तर-पूर्वी चीन में जापानी आक्रमण दिवस माना गया। 3 सितंबर स्वतंत्रता दिवस भी है।