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प्रकाश औऱ छवि को सिनेमा के द्वारा दिखाने की कला चीन में एक सौ वर्ष पूर्व आरम्भ हुई। लेकिन चीन में प्रकाश और छवि में दिलचस्पी कई वर्षों पहले आरम्भ हुई। प्राचीन काल के चीनी ये मानते थे की कोई भी चमकीले वस्तु- वो चाहे टेरा फार्मा में हो या स्वर्ग में हो, को पवित्र मानते थे और उसके छवि और छाया को रहस्यमय मानते थे । थांग काल के विख्यात और महान् कवि लि पाय के विख्यात काव्यांश "मेरे गिलास को ऊपर उठाते हुए, मैं चाँद को निमंत्रण देता हूँ की वह मेरे और मेरे छाया के साथ मदिरा पान का आनंद उठायें", न सिर्फ उनकी कविशैली को दर्शाती बल्कि हमें यह मूल तत्व का याद दिलाता है की आकार और छवि दोनों ही किसी भी शारिरिक तत्व के अभिन्न अंग हैं।
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