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(GMT+08:00) 2005-12-23 10:30:48    
विज्ञान के बूते समृद्ध हुए तासी गांव के किसान

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तासी गांव सिन्चांग के ताकलिमाकन रेगिस्तान के किनारे क्षेत्र में स्थित है , जो इतिहास में सिन्चांग के गरीब गांव के नाम से दूर निकट मशहूर था । लेकिन इधर के सालों में गांव के बीस प्रतिशत के निवासियों के पास कार आयी और आधे से ज्यादा लोगों के पास सेलफोन उपलब्ध हैं। तासी गांव के समृद्ध होने का रहस्य जानने के लिए शर्द के सुनहरे मौसम में हम वहां के लिए रवाना हुए ।

दक्षिणी सिन्चांग के कोरले शहर से रवाना हुए कोई डेढ़ घंटे के गाड़ी सफर के बाद हम तासी पहुंचे । यों तासी गांव रेगिस्तान के किनारे पर खारी भूमि पर आबाद है , पर हमारी आंखों के सामने जो नजारा दिखा , उस ने हमें बड़े आश्चर्य में डाल दिया ।

तासी गांव की खुशहाल हालत पर मुझे अत्यन्त बड़ा ताज्जुब हुआ , गांव के बाहर विशाल घनी जंगलें उगी हुई हैं , जो रेगिस्तान के रेतों को गांव के भीतर बढ़ने से रोक देती है । गांव में पंक्तिबद्ध सुन्दर मकान खड़े नजर आये और हर घर आंगन में ताजा फुलों के छोटे छोटे बगीचे बने हैं , कुछ किसान घरों में नई नई सुन्दर कार और मोटर साइकिल देखने को मिलती हैं । गांव के बाहर खेतों में नाश्पाती , अनाड़ और अंगूर के पेड़ उगे हैं, जिन पर बड़े मोटे फल भरपूर लदे हुए हैं , कपास खेतों में अपार सफेद रंग दिखाई देता रहा है , हर जगह शानदार फसलों का दृश्य दिख रहा है ।

इस प्रकार की फलता फुलता समृद्ध हालत देखने पर कोई भी यह सोच नहीं सकता कि आज से बीस साल पहले यह एक ऐसा गरीब गांव था , जो सरकार की राहत सहायता पर आश्रित है । तासी गांव में 80 फीसदी के गांववासी वेवूर जाति के हैं , जो पहले पशुपालन और फलों की बागबानी करते थे, शेष हान जाति के लोग सब्जी और कपास की खेती करते थे , लेकिन खारी भूमि पर स्थित होने के कारण गांव की प्राकृतिक स्थिति बहुत खराब थी , इसलिए गांववासियों का जीवन भी बहुत दुभर था और भर पेट खाने को अहार नसीब नहीं होता था ।

लेकिन इन बीस सालों में तासी गांव का कायापलट हो गया , इस जमीन आसमान के परिवर्तन का श्रेय वेवूर जाति के स्थानीय कार्यकर्ता श्री शावुर मांगरिक को है ।

इस साल 60 वर्षीय शावुर मांगरिक कभी व्यापार के काम कर चुके थे और एक ज्ञानी आदमी है। बीस साल पहले वे तासी गांव की गांववासी कमेटी के मुखिया चुने गए । विस्तृत सर्वेक्षण अध्ययन से श्री शावुर इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि खराब प्राकृतिक स्थिति गांव की घोर गरीबी का मूल कारण नहीं है । इस की चर्चा में वे कहते हैः

उस समय गांव में 920 लोग रहते थे , गांववासियों का विचार चिन्तन बहुत पुराना पिछड़ा था , सभी काम पुराने तर्ज तरीकों से करते थे , खेतीबाड़ी की अच्छी तकनीक नहीं थी और फसलों की पैदावार बहुत कम थी ।

श्री शावुर ने गांववासियों की विचारधारा को बदलने की ठान ली और नई विचारधारा से प्रशिक्षित नौजवान लोगों को गांववासी कमेटी में शामिल किए और कृषि तकनीशियनों को गांववासियों को खेती की उन्नतशील तकनीक सिखाने के लिए आमंत्रित किए और खुद खेतों में किसानों का मार्गदर्शन किया । उन्हों ने वेवूर और हान लोगों को एक दूसरे से सीखने के लिए भी प्रेरित किया । नदीजातः गांव के हान किसान पशुपालन व बागबानी में कुशल हुए और वेवूर चरवाहे सब्जी व कपास की खेती में माहिर हो गए ।

श्री शावुर ने गांव में प्रशिक्षण कक्षा भी खोली । उन का कहना हैः

गांव में निरक्षर निवारण कक्षा खोली गई और सर्दियों के अवकाश समय गांववासियों को प्रशिक्षण दिया जाता है ,ताकि उन्हें देश विदेश की खबरें और कृषि विज्ञान की जानकारी मिल जाए । वर्ष 1997 के बाद तासी गांव में कोई भी निरक्षर नहीं रह गया ।

बाहरी दुनिया और विज्ञान के बारे में जानकारियां ज्यादा मिलने से तासी गांववासियों को यह अनुभव हुआ कि मात्र खेती और पशुपालन से गांव की गरीबी नहीं छूट जाएगी । उन्हों ने सिन्चांग के विभिन्न स्थानों में बाजारों की आवश्यकता के मुद्देनजर आटा प्रोसेसिंग मील , ईंट भट्टी ,पशुपालन फार्म , कृषि उतपाद बाजार तथा गर्म सब्जी क्यारी केन्द्र कायम किए । ये कारोबार स्थानीय संसाधनों पर आधारित हैं , इसलिए लागत कम है और बाजारों में मांग बड़ी है । परिणामस्वरूप कारोबारों के जोरशोर विकास से तासी गांव वासी भी समृद्ध होने लगे ।

34 वर्षीय गांववासी मोहमेद शावुर तासी गांव का उत्पादन माहिर है । उन का कहना है कि गांव में खुली प्रशिक्षण कक्षा से ज्ञान पाने के बाद उन के घर की कपास पैदावार बढ़ गई और आमदनी भी ज्यादा आयी । वे हर साल कृषि विज्ञान की पुस्तकें खरीदते हैं और अध्ययन करते हैं । उन्हों ने इंटरनेट वेबसाइट से भी तकनीकी सूचनाएं उपलब्ध करने की कोशिश की और कृषि तकनीशियनों की मदद से कपास की खेती शुरू की और कुछ भूमि को नाश्पाती के पेड़ उगाने के लिए ठेके पर ले लिया और पूंजी लगा कर उच्च स्तर का पशुपालन फार्म स्थापित किया और पशुपालन उद्योग का विस्तार किया ।

मोहमेद शावुर ने अपने ज्ञानों और अनुभवों को अन्य गांववासियों को सिखाया , उन के सुझाव पर गांव के स्कूली शिक्षा प्राप्त हो चुके सभी लोग हर साल सर्दियों में दो महीनों के वैज्ञानिक प्रशिक्षण लेते रहे ।

गांव के इन समृद्ध हुए युवा किसानों से प्रभावित हो कर तासी गांव के लोगों की विचारधारा एकदम बदल गई । वे फिर बातचीत में गरीबी की शिकायत नहीं करते हैं , बल्कि विज्ञान तकनीक , कारोबार व्यापार तथा समृद्धि प्रगति के बारे में अनुभवों का आदान प्रदान करते हैं और सभी आर्थिक विकास के लिए क्रियाशील हो गए हैं ।

समृद्धि के विकास के क्षेत्र में मोहमेद शावुर एक ज्वलंट उदाहरण है , उन्हों ने न केवल अपना खुशहाल जीवन लाया है , साथ ही गांववासियों को खुशहाली लाने के लिए मदद भी दी है । इस कारनामे से उन्हें दो साल पहले चीनी युवा पीढी का सर्वोच्चर पुरस्कार यानी चार मई पदक पुरस्कार से सम्मानित किया गया । पेइचिंग में चीनी नेताओं ने उन से मुलाकात भी की । उस मुलाकात की चर्चा में मोहमेद शावुर हमेशा उत्साहित रहेः

उस दिन के दोपहरबाद महा सचिव व राष्ट्राध्यक्ष हु चिन थाओ ने हम से मुलाकात की और मेरे साथ हाथ मिलाते हुए पूछा , आप सिन्चांग के अल्पसंख्यक जाति के कामरेड हैं न , मैं ने जवाब में कहा कि मैं सिन्चांग की वीली काऊंटी के तासी गांव से आया हूं । महा सचिव हु ने मुझे प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आप बुनियादी इकाई के कार्यकर्ता हैं , जरूर और अच्छी तरह काम करते हुए जन समुदाय को समृद्धि की ओर आगे ले जाए और निरंतर सीखते रहें । मैं ने कहा कि मैं जरूर आप के निर्देशन का अनुसरण करते हुए लगातार सीखता रहूंगा और गांववासियों को आगे ले जाऊँगा ।

वर्तमान में तासी गांव के 310 परिवारों में से 70 परिवारों ने कार खरीदी है ,हरेक परिवार में कम से कम एक मोटर साइकिल है और आधे से ज्यादा गांववासियों के पास सेलफोन हैं , जिस से बाहरी दुनिया के साथ संपर्क खासा ज्यादा सुविधापूर्ण हुआ है । पिछले साल , तासी के गांव वासियों की औसत आय 6 हजार तीन सौ य्वान को पार हो गई , तासी गांव सिन्चांग के दक्षिणी भाग का सब से समृद्ध गांव बन गया ।