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(GMT+08:00) 2005-11-24 09:11:06    
पुराने रेशम मार्ग के दोनों किनारों पर अनौखा ऐतिहासिक धरोहर

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तुनह्वांग शहर तत्कालीन रेशम मार्ग का अहम पड़ाव था और प्रसिद्ध तुनह्वांग गुफा समूह पूर्वी व पश्चिमी संस्कृतियों के संगम का द्योकत है । मशहूर मकाओ गुफा दक्षिण पूर्वी तुनह्वांग शहर से 25 किलोमीटर दूर गरजने वाला रेत पर्वत नामक पहाड़ पर स्थित है । 1600 मीटर लम्बे पर्वत पर 600 से अधिक गुफाएं खोदी गयी हैं , जिन में 469 गुफाओं में भित्ति चित्र म मूर्तियां बनायी गयी हैं । सर्वेक्षण से पता चला है कि इन गुफाओं का निर्माण ईस्वी चौथी शताब्दी के मध्य काल से शुरू हुआ और उस का निर्माण पूरा करने में हजार वर्षों से अधिक समय लगा ।

प्रिय मित्रो , पहले हम चीन का भ्रमण कार्यक्रम में आप को विश्वविख्यात पुराने रेशम मार्ग के दौरे पर ले गये थे ।

इस दौरे के माध्यम से हमें मालूम हुआ कि रेशम मार्ग पुराने जमाने में एशिया को युरोपीय महा द्वीप से जुड़ाने वाला एक मात्र प्रसिद्ध थलीय व्यापारिक मार्ग था , उस का इतिहास आज से कोई दो हजार वर्षों से अधिक पुराना है और वह कुल सात हजार किलोमीटर से अधिक लम्बा है । हमें भी पता चला है कि इस रेशम मार्ग के दोनों किनारों पर रंगारंग विविधतापूर्ण जातीय रीति रिवाज , मनमोहक प्राकृतिक दृश्य और प्राचीन ऐतिहासिक व सांस्कृतिक अवशेष लोगों के लिये आकर्षण का केंद्र भी हैं । और तो और सिंच्यांग वेगुर स्वायत प्रदेश की राजधानी उरूमूची शहर में सड़कों के दोनों किनारों पर वेगुर जाति की विशेष सुंदर टोपियां पहने हुए बुजुर्ग व रंगबिरंगे स्कार्फ पहनी महिलाएं और मध्य व पश्चिमी एशियाई व्यापारी देखकर जान पड़ते हैं कि प्राचीन रेशम मार्ग की पुरानी चहल पहल फिर वापस लौट आयी हो ।

इस प्राचीन रेशम मार्ग के दोनों किनारों पर विशेष जातीय परम्पराओं के अतिरिक्त

इस प्राचीन रेशम मार्ग के दोनों किनारों पर जो मनोहर प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलता है , वह भी अपने अलग ढंग के हैं । मसलन छिंगहाई प्रांत की नमक झील , छिंगहाई झील का पक्षी द्वीप , सिंच्यांग वेगुर स्वायत प्रदेश के पाइनब्रुक घास मैदान का राजहंस प्रकृति संरक्षण क्षेत्र , थ्येनशान पर्वत की छत पर स्थित त्येनछी झील , तूर्पान बेसिन में स्थित आग्नि पर्वत और करामाई क्षेत्र का भूत शहर जैसे रमणीक क्षेत्र काफी चर्चित हैं ।

खूचेह नदी घाटी ने अपनी विशेष पहचान बना ली है । खूचेह क्षेत्र सिंच्यांग वेगुर स्वायत प्रदेश के दक्षिण भाग में स्थित है और यह क्षेत्र प्राचीन रेशम मार्ग के महत्वपूर्ण कस्बों में से एक था । जब ऊंचे थ्येनशान पर्वत पर जमी बर्फ के पिघलने वाला पानी नीचे बहकर खूचे क्षेत्र के पास उफनदी में जा मिलता , तो फिर यह नदी अनेक छोटी छोटी नहरों में बदलकर ऊंचे ऊंचे पर्वतों से होकर विशाल रेगिस्तान में विलिन हो गयी और इन नहरों के बहाव से इन ऊंचे पर्वतों ने बेशुमार अजीबोगरीब पत्थर जंगलों और खड़ी चट्टानों का रूपधारण कर लिया ।

आज तक खूचेह नदी घाटी में लाल खड़ी चट्टानों की श्रृंखलाएं नजर आती हैं , खासकर सूर्यास्त के समय जब धूप के कमजोर किरणें लाल खड़ी चट्टानों व पत्थर जंगलों पर पड़े , तो बेमिसाल सुंदर दृश्य देखते ही बन जाता है । हमारे गाईड ली वन चुन ने हमें बताया कि खूचेह नदी घाटी क्षेत्र में मात्र सुंदर प्राकृतिक दृश्य उपलब्ध ही नहीं है । उन का कहना है खुचेह नदी घाटी क्षेत्र में बहुत से ऐतिहासिक अवशेष और गुफाएं भी पायी जाती हैं । उदाहरण के लिये दक्षिण पूर्वी खूचेह कांऊटी से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गोबिस्तान के बीच महा पुराना शहर , इस कांऊटी के उत्तर पूर्वी भाग में स्थित सहस्र मूर्ति गूफा और कांऊटी के पश्चिम भाग में स्थित सूचना देने वाला आग्नि टावर समेत प्राचीन सांस्कृतिक अवशेष के खंडहर पाये जाते हैं । खूचेह नदी घाटी क्षेत्र में प्राचीन रेशम मार्ग के और बहुत से प्रसिद्ध पुराने सांस्कृति अवशेष भी उपलब्ध हैं ।

जैसा कि गाईड ली ने कहा है कि विविधतापूर्ण मानवीय दृश्य प्राचीन रेशम मार्ग की सब से बड़ी विशेषता है । इस प्राचीन रेशम मार्ग पर हजारों वर्ष पुरानी गुफाओं , प्राचीन शहरों व मदिरों के खंडहरों के अतिरिक्त कानसू प्रांत का तुनह्वांग गुफा समूह भी बहुत विश्वविख्यात है ।

तुनह्वांग शहर तत्कालीन रेशम मार्ग का अहम पड़ाव था और प्रसिद्ध तुनह्वांग गुफा समूह पूर्वी व पश्चिमी संस्कृतियों के संगम का द्योकत है । मशहूर मकाओ गुफा दक्षिण पूर्वी तुनह्वांग शहर से 25 किलोमीटर दूर गरजने वाला रेत पर्वत नामक पहाड़ पर स्थित है । 1600 मीटर लम्बे पर्वत पर 600 से अधिक गुफाएं खोदी गयी हैं , जिन में 469 गुफाओं में भित्ति चित्र म मूर्तियां बनायी गयी हैं । सर्वेक्षण से पता चला है कि इन गुफाओं का निर्माण ईस्वी चौथी शताब्दी के मध्य काल से शुरू हुआ और उस का निर्माण पूरा करने में हजार वर्षों से अधिक समय लगा । इस प्राचीन रेशम मार्ग का दौरा बहुत चर्चित है । गत शताब्दी के 70 वाले दशक में जापान के अनुरोध के अनुसार चीनी अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन कम्पनी ने रेशम मार्ग का दौरा शुरू कर दिया । तब से लेकर आज तक प्राचीन रेशम मार्ग देखने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ती गयी है । जापानी पर्यटकों के अतिरिक्त युरोपीय व अमरीकी पर्यटक भी अधिकाधिक हो गये हैं ।