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(GMT+08:00) 2005-09-26 18:09:44    
संगीतकार गाओ ची फङ की कोशिश

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गाओ ची फङ चीन के एक ऐसे संगीतकार हैं , जो गीत लिखने, उनकी धुन बनाने, गाने और अनेक वाद्य बजाने में निपुण हैं। लेकिन शायद आप न जानते हों कि वे नेत्रहीन हैं?वे लम्बे समय से संगीत के प्रेम में डूबे रहे हैं और जीवन की चुनौतियों के सामने उन्होंने कभी भी सिर नहीं झुकाया है। कला के रास्ते पर वे बड़ी मुश्किल से आगे बढ़े हैं।

गाओ ची फङ का जन्म वर्ष 1974 में उत्तरी चीन के शान शी प्रांत के एक गांव में हुआ। छै साल की उम्र में नन्हे गाओ ची फङ ने दृष्टि खो दी। गांव में नेत्रहीनों का स्कूल न होने के कारण गाओ ची फङ पढ़ नहीं सकते थे। इसलिए नौ वर्ष की उम्र में अपने पिता से चीनी परम्परागत वाद्य अर्हू सीखने लगे। शाम को पिता खेती करने के बाद घर वापस लौटते, तो गाओ ची फङ पिता के पास बैठ जाते। पिता गीत की एक पंक्ति गाते, तो बेटा अर्हू पर उसकी धुन बजाता। इस तरह गाओ ची फङ ने लोक संगीत सीखा और इससे प्रेरणा पा कर और मेहनत से अर्हू बजाना सीखने लगे। शीघ्र ही गाओ ची फङ अपने पिता से आगे निकल गये।

गीत----"आकाश के सारे तारे हैं तुम्हारे पास "

इस समय आप सुन रहे हैं, गाओ ची फङ द्वारा गाया गया गीत "आकाश के सारे तारे हैं तुम्हारे पास "। गीत का भावार्थ कुछ इस प्रकार है

बीते समय की याद

चली गयी हवा के साथ

जीवन है लम्बी नदी की तरह

बह रहा कल-कल करता

जीवन की नौका

कैसे पकड़ें हम

नीले आकाश में जैसे स्वर्ण

जीवन है इतना सुन्दर

अपने हाथ में थाम लो भाग्य को

झिझको मत

कभी खुशी, कभी गम

जीवन में हैं मुश्किलें

बहुत ज्यादा

बनो शक्तिशाली

जीतो अपने आप को

आकाश के सारे तारे तुम्हारे पास रहेंगे

अभी आपने सुना संगीतकार गाओ ची फङ का गाया गीत"आकाश के सारे तारे हैं तुम्हारे पास"। गीत की मधुर धुन और सादी भाषा से जीवन के प्रति संगीतकार ने अपनी भावना व्यक्त की है और सुन्दर जीवन की खोज की इच्छा भी जाहिर की है।

विश्वविद्यालय में आगे पढ़ना और संगीत के माध्यम से अपनी भावना व्यक्त करना गाओ ची फङ की अभिलाषा थी ही। स्कूल से निकल कर विश्वविद्यालय जाने के लिए गाओ ची फङ सड़क पर गीत गा-गा कर कुछ न कुछ सीखते रहे और मुश्किलों के बाद भी संगीत को नहीं छोड़ा। अंत में वर्ष 2000 में 26 वर्षीय गाओ ची फङ राजधानी पेइचिंग स्थित चीनी ऑपेरा कॉलेज के संगीत विभाग में दाखिल हुए और इस विश्वविद्यालय के एक विशेष विद्यार्थी बने।

विश्वविद्यालय के अपने समय को गाओ ची फङ ने बहुत मूल्यवान समझा। वहां वे हर रोज़ सोने के अलावा सारा समय पढ़ाई में लगाते और बहुत मेहनत से पढ़ते थे।अन्य सहपाठियों पर कोई प्रभाव न पड़े इस कारण वे ब्रेल मशीन के प्रयोग के बिना अध्यापकों की बात याद रखने की कोशिश करते और कक्षा के बाद ही ब्रेल मशीन पर लिखते थे।

विश्वविद्यालय के चार सालों में गाओ ची फङ ने कला व संगीत के क्षेत्र में पर्याप्त प्रगति हासिल की । वर्ष 2004 में वे एक श्रेष्ठ छात्र के रूप में विश्वविद्यालय से स्नातक हुए। अपनी रचनाओं की प्रस्तुति में गाओ ची फङ ने एकल गायन, और वादन आदि विविध तरीकों से अपनी संगीत प्रतिभा दिखायी। उन की भावुक प्रस्तुतियों, जीवन के प्रति प्यार और भविष्य के प्रति गहरी अभिलाषा ने दर्शकों को बड़ा प्रभावित किया और उन्होंने दर्शकों की वाहवाही भी लूटी।

विश्वविद्यालय से स्नातक होने के बाद, गाओ चीन फङ को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कोई स्थाई नौकरी न मिल पाने के कारण उन्होंने राजधानी पेइचिंग के एक उपनगर में एक सादा घर किराये पर लिया। उनका जीवन बहुत कठिन था लेकिन इसी स्थिति में भी उन्होंने संगीत के प्रति प्यार नहीं छोड़ा। वे हमेशा आशा व आत्मविश्वास का रुख अपनाते हैं। इधर गाओ ची फङ अपने संगीत स्टूडियो की स्थापना में जुटे हुए हैं। उन की आशा है कि वे अपने द्वारा इकट्ठे किए गए लोकगीतों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा सकेंगे। गाओ ची फङ सामाजिक परोपकार की गतिविधियों में भी भाग लेते हैं। उन का विचार है कि वे अपने छोटी शक्ति से समाज के लिए कुछ योगदान कर ही सकते हैं। गाओ ची फङ ने कहा

"मुझे लगता है कि मुझे शिकायत करने की कोई आवश्यकता नहीं है। मुझे सिर्फ़ आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए, जो भी काम करना चाहता हूं, उसे अच्छी तरह करना चाहिए। अगर कोई मुझ से पूछे कि अगर मुझे तीन दिन के लिए आंखों की रोशनी मिले तो मैं क्या करूंगा ? तो मेरा जवाब यही होगा कि रोशनी मेरे लिए अब महत्वपूर्ण नहीं रही, सब से महत्वपूर्ण बात यही है कि मैं क्या करना चाहता हूँ। मैं अपनी विशेष दृष्टि से जीवन के साथ सही व्यवहार करना चाहता हूं और समाज को समझना चाहता हूँ। मेरी आशा है कि मेरा संगीत लोगों को एक मानसिक खाद्य प्रदान कर सकेगा।"