मुरादाबाद उत्तर प्रदेश के मुहम्मद शफिक खान ने सी .आर .आई के हिन्दी प्रसारण के लिए लिखे पत्र में कहा कि मैं आप का पुराना श्रोता हूं और गत छै वर्षों से स्वयं ही कार्यक्रम सुनता था । लम्बे समय से पारिवारिक समस्याओं के कारण पत्र व्यवहार नहीं कर सका । अब सब कुशल मंगल है । आप को जान कर अति प्रसन्नता होगी कि मैं ने अन्य युवाओं के साथ एक श्रोता क्लब की स्थापना की है , जिस का नाम ब्रास सीटी लिस्नर्स क्लब है । मैं क्लब का अध्यक्ष हूं और सदस्यों की संख्या 25 है । हम सभी युवा हैं , सदस्यों में छात्र भी हैं और चीन के संबंध में जानने के इच्छुक रहते हैं । आप की पसंद सब का प्रिय कार्यक्रम है । आप ने चीन के तिब्बती लामा , जिन्हों ने सुनामी पीड़ितों के लिए पाठ किया था , से वार्ता पेश की , बहुत पसंद आयी ।
मुहम्मद शफिक खान और ब्रास सीटी लिस्नर्स क्लब के सभी सदस्य भाइयो , हम आप लोगों का अपने नियमित श्रोता के रूप में हार्दिक स्वागत करते हैं । आप द्वारा पुनः सी .आर .आई हिन्दी कार्य़क्रम सुनने तथा हमारे साथ पत्र व्यवहार करने पर हमें बड़ी खुशी हुई है और हमें विश्वास है कि आप और आप के परिवार हमेशा कुशल मंगल रहेगा और आप और आप के क्लब के सदस्य हमेशा हमारे प्रिय श्रोता मित्र बने रहेंगे ।
मुजाफ्फर नगर उत्तर प्रदेश के ब्रिजेर उपाध्याय ने हमें भेजे पत्र में लिखा है कि मैं ने आप को पत्र भेजा था , शायद वह आप को मिला नहीं, अब मैं फिर आप को पत्र भेज रहा हूं । और आशा करता हूं कि यह पत्र अवश्य आप तक पहुंचेगा । मैं आप का समाचार बहुत ही ध्यान से सुनता हूं और मैं आप के चीनी गीत संगीत में बहुत ज्यादा रूचि रखता हूं । चीनी संगीत तो जैसे मुझे मस्ती से भर देता है । आज का तिब्बत भी बहुत बहुत अच्छा लगता है , उस में आप ने तिब्बती लामा चुमैकांका से जो हमारी मुलाकात करवाई , वो मुझे बहुत अच्छी लगी । आप सभी हिन्दी भाषा को जिस प्रकार से बोलते हैं , वो मुझे बहुत रोचक लगती है । मुझे कोई ऐसी पुस्तक भेजे , जिस में चीनी लोग कैसे वस्त पहनते हैं , आज कल चीन में कैसा पहनावा है ।
ब्रिजेर उपाध्याय जी , आप का पत्र मिलने पर हमें बड़ी खुशी हुई है और हम आप का एक नए श्रोता के रूप में हार्दिक स्वागत करते हैं । आप को चीनी गीत संगीत में गहरी रूचि लगती है , जान कर बड़ी प्रसन्नता हुई , हर इतवार को हम चीनी गीत संगीत कार्यक्रम पेश करते हैं , आशा है कि आप को वह पसंद आएगा । आप को चीनी पत्रिका भेजी गई है , उस में आप को देखने को मिलेगा कि चीनी लोग अब किस प्रकार का वस्त्र पहनते हैं । चीन में लोग आधुनिक ढंग के वस्त्र पहनते हैं , विशेष मौकों पर परम्परागत वस्त्र भी पहनते और चीन की हरेक अल्पसंख्यक जाति के लोगों के अपने अपने जातीय शैली के परम्परागत वस्त्र भी हैं । जिस तरह भारत में विविध रंगों के पहनावा होते हैं , उसी तरह चीन में भी रंगबिरंगे पहनावा देखने को मिलते हैं ।
रत्नगिरी महाराष्ट्र के सतिश लक्ष्णमान बरस्कर ने हमें लिखे पत्र में कहा कि आज के तिब्बत में पहाड़ के गायक राजा यातून की जानकारी बहुत अच्छी लगी , उन के द्वारा गाया गीत प्यारी मां बहुत पसंद आया । भावनाओं की कोई भाषा नहीं होती , उसे समझने के लिए तो दिल चाहिए । संगीत तो आखिर संगीत होता है , चाहे किसी भी भाषा या देश का क्यों न हो ।
चीनी गीत और संगीत दोनों मुझे बहुत पसंद है । पर खास कर चीनी संगीत जो बहुत कुछ मन से बातें करता है । आप के कार्यक्रम का टाइटल संगीत और हर एक कार्यक्रम का संगीत बहुत पसंद आता है। खास कर कार्यक्रम खत्म होने की सूचना करने वाली धून मुझे बहुत अच्छी लगती है । कार्य़क्रम खत्म होने के बाद भी बहुत देर तक मन में रहती है और आप सब के चेहरे मेरे आंखों के सामने आ जाते हैं । मेरा मन मुझे चीन के पहाड़ों में ले जाता है , जो मैं ने कभी देखे भी नहीं है । बहुत ही गूढ भावनाएं हैं , जो शब्दों में ब्यान करना मुश्किल है । शायद आप लोगों से मेरा कोई पिछले जन्म का रिश्ता हो । श्याओ यांग , श्याओ थांग और चंद्रिमा इन की आवाजों की गहराई मानों जैसे मुझे चीन आने को कह रही है । एक ना एक दिन मैं अवश्य चीन आऊंगा और आप सभी प्यारे दोस्तों से मिलूंगा । अब मुझ से और लिखा नहीं जाएगा । भावनाओं का एक अजीब तूफान मन में उठा है , डर लग रहा है कि कहीं आंसूओं का बाढ़ बन कर आंखों से बाहर न आ जाए , आप सब लोग अपना ख्याल रखना और जो प्यार जता रहे हैं , वह कायम बनाए रखना ।
सतिश भाई , आप के दिल को गहराई में छू लेने वाला इस पत्र पढ़ कर हमारी आंखें भी डबडबा हो गई , गीत संगीत से हमारे मन में ऐसी भाइचारी जैसी भावनाओं का संचार और आदान प्रदान हो रहा है , जिस का शब्दों में वर्णन करना मुश्किल है । बस , हमारी भी उम्मीद है कि कभी हम एक दूसरे से मिलें , हमारे दिल में गर्भित अदृश्य दोस्ती की भावना सदृश्य हो जाएगी । आप को लाखों धन्यावाद ।

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