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कवि थाऔ छ्येन की यह कविता आज से कोई 1600 साल से पहले लिखी गयी है , पर आज तक भी लोगों के जुबान पर है , साथ ही मिडिल स्कूल की पाठ्य पुस्तक में उस का चयन हो गया है । इस कारण से थाओ ह्वा य्वान आज तक भी लोगों को लुभा लेता है । छांगतेह शहर से हम कार से कोई तीस मिनट में थाऔ ह्वा य्वान क्षेत्र पहुंचे। वहां लकड़ी के एक बहुत बड़े बारीक नक्काशीदार मंडप को पार करते ही आड़ू का एक विशाल बगीचा नजर आया।
दोस्तो , शायद आप को याद हो कि चीन का भ्रमण कार्यक्रम में हम मध्य-दक्षिण चीन के हू नान प्रांत के थाओ ह्वा य्वान क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं जो अपने अनुपम प्राकृतिक सौंदर्य व दुनिया से कटा होने से विश्वविख्यात है। आज के इस कार्यक्रम में हम आप को फिर इसी क्षेत्र में एक बहुत लोकप्रिय विशेष लेई चाय चखले के लिये ले चल रहे हैं ।
जैसा कि आप जानते हैं कि थाओ ह्वा य्वान कांऊटी मध्य चीन के हू नान प्रांत में स्थित है । प्राचीन चीन के प्रसिद्ध कवि थाओ छिन ने इस कांऊटी के एक पहाड़ी गांव के गुणगान में एक बहुत प्रसिद्ध कविता लिखी । इस कविता का भावार्थ हैः एक अपार विशाल आड़ू बागान के बीच कलकल कर छोटी नदी आगे बह जाती है , इस नदी के उद्गम स्थान पर एक छोटा शांत पहाड़ी गांव आबाद है , हरे भरे पहाड़ों से घिरे इस गांव का प्राकृतिक दृश्य अनुपम ही नहीं , वह बाहरी दुनिया से एकदम कटा हुआ है और वह एक आरामदेह व रमणीक स्थल ही है । अतः बाद में सांसारिक जीवन से ऊब चुके लोग ऐसे प्रकार की जगह की ओर आकर्षित होने लगे ।
कवि थाऔ छ्येन की यह कविता आज से कोई 1600 साल से पहले लिखी गयी है , पर आज तक भी लोगों के जुबान पर है , साथ ही मिडिल स्कूल की पाठ्य पुस्तक में उस का चयन हो गया है । इस कारण से थाओ ह्वा य्वान आज तक भी लोगों को लुभा लेता है । छांगतेह शहर से हम कार से कोई तीस मिनट में थाऔ ह्वा य्वान क्षेत्र पहुंचे। वहां लकड़ी के एक बहुत बड़े बारीक नक्काशीदार मंडप को पार करते ही आड़ू का एक विशाल बगीचा नजर आया। इस बगीचे का क्षेत्रफल कोई 130 हैक्टर है और उसमें आड़ू के एक लाख से ज्यादा पेड़ खड़े हैं। इस विशाल उद्यान में इतने सारे पेड़ देखकर मुझे सुखद आश्चर्य हुआ। कल्पना की जा सकती है कि जब वसंत में इन सभी पेड़ों पर फूल खिलते होंगे, तो उनसे रंगों की कितनी सुंदर दुनिया बन पड़ती होगी।
अब थाओ ह्वा य्वान क्षेत्र को एक विशाल पर्यटन क्षेत्र का रूप दिया गया है । यहां का प्राकृतिक दृश्य और पानी उतना ही मोहक व स्वच्छ ही नहीं , आकाश से बाते करने वाले अंगिनत प्राचीन पेड़ , घने बांस जंगल , दुर्लभ जंगली फूल घास , पत्थर सीढियां और टेढे मढ़े पथरीले रास्ते भी एकदम शांति का आभास देते हैं । विशेषकर वसंत में जब आड़ू पेड़ बागान में लाखों पेड़ों पर फूल खिलेंगे , तो फूलों से ढकी पहाड़ी घाटी का अद्भुत रंगीन दृश्य देखते ही बन जाता है ।
थाओ ह्वा य्वान पर्यटन क्षेत्र के प्रबंधन विभाग के अधिकारी श्री वांग च्यु ह्वी ने इस क्षेत्र का परिचय देते हुए कहा कि इस समूचे पर्यटन क्षेत्र का क्षेत्रफल लगभग 16 वर्गकिलोमीटर बड़ा है , हर वर्ष बड़ी तादाद में देशी विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता है । हर वर्ष करीब पांच लाख 40 हजार पर्यटक यहां आते हैं , जिन में लगभग 20 से 30 हजार विदेशी पर्यटक शामिल हैं , साल में मार्च , अप्रैल , मई और सितम्बर , अक्तूबर व नवम्बर में पर्यटन का व्यस्त मौसम है , पर्यटक ज्यादा आते हैं ।
ऊबड़-खाबड़ सड़क पर घूमते हुए मैंने सचमुच सांसारिक जीवन से कुछ अलग महसूस किया। लकड़ी या बास से बने छोटे-छोटे मकान धान के लहलहाते खेतों और मछली तालाबों के बीच झांक रहे थे और उनके सामने बच्चे मस्त से खेल रहे थे।
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