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आज के इस कार्यक्रम में हम कोआथ, बिहार के सुनील केशरी, डी डी साहिबा, संजय केशरी, बविता केशरी, प्रियंका केशरी, खुशबू केशरी, एस के जिंदादिल, धनवंतरी देबी, सिताराम केशरी, जे. पी. नगर, उत्तर प्रदेश के हरीशचन्द्र शर्मा, शिवचन्द्र शर्मा, किरन शर्मा पूना व रजत शर्मा,न्यू भोजपुर, बिहार के कमर सुल्ताना कुरैशी, बालाघाट, मध्य प्रदेश के डॉ. प्रदीप मिश्र और कोआथ रोहतास, बिहार के किशोर कुमार केशरी के पत्र शामिल कर रहे हैं।
अब हम न्यू भोजपुर. बिहार के कमर सुल्ताना कुरैशी का पत्र देखें। चीन की मुख्य दलहनी फसलों में उन की बड़ी रुचि है और हम उनकी जिज्ञासा शांत करने का प्रयास कर रहे हैं।
चीन भर में दलहनी फसलें उगाई जाती हैं और मुख्य दलहनी फसलों की किस्में 20 से अधिक हैं । इन का उत्पादन बहुत ज्यादा है। इन में प्रमुख सोया बीन है, इस का उत्पादन दलहनी फसलों का 70 प्रतिशत होता है। शेष हैं घुड़ सेम, मटर, मूंग, लाल दाल、लोबिया, मोठ, मसूर,फ़रासबीन और चना।
चीन में अनाज के उत्पादन में दलहनी फसलों का भाग 3.73 प्रतिशत है।
20 वीं शताब्दी के 90 वाले दशक से चीन में दलहनी फसलों के उत्पादन में तेज वृद्धि हुई। वर्ष 1991 में दलहनी फसलें उगाने वाले खेतों का क्षेत्रफल 21 लाख 20 हजार हैक्टर और उत्पादन 27 लाख 90 हजार टन रहा। 2002 में यह अल-अलग तौर पर 38 लाख 20 हजार हैक्टर और 59 लाख टन रहा। वर्ष 2003 में प्रति हैक्टर औसत उत्पादन 1320 किलोग्राम से बढ़ कर 1595 किलोग्राम तक जा पहुंचा।
चीन में खाद्य तेल पेरने के अतिरिक्त सोयाबीन से बीन कर्ड और सोया सॉस भी बनाया जाता हैय़ लोगों को ताजा सोया बीन खाना भी पसंद है। दलहनी फसलें चावल, आटे, मैदे या मकई के साथ पका कर खाई जा सकती हैं। दलहनी फसलों की मांढ़ से भी खाद्यान्न पकाये जाते हैं और इनसे साग-सब्जियों का काम भी लिया जाता है।
विदेशों को भी चीन से दलहनी फसलों का निर्यात किया जाता है। पिछली सदी के 80 वाले दशक में हर वर्ष 4 लाख टन फसलों का निर्यात किया गया। 90 वाले दशक से यह बढ़ कर 5 लाख यहां तक कि 10 लाख टन तक पहुंच गया।
अब बालाघाट, मध्य प्रदेश के डॉ. प्रदीप मिश्र का पत्र लें। उन्होंने जानना चाहा है कि क्या भारतीय पर्व होली जैसा चीन में भी रंगों का कोई पर्व मनाया जाता है।
हां जी, भारत के रंगों के पर्व जैसा पर्व चीन में भी होता है। दक्षिण-पश्चिमी चीन के युन्नान प्रांत में तैई जाति के लोग बसे हैं, जो बौद्ध मत के अनुयायी हैं। हर वर्ष अप्रैल के मध्य में तैई जाति अपना नववर्ष मनाती है। यह तै लोगों का बहुत भव्य पर्व होता है। इस उत्सव पर सुसज्जित तैई लोग बौद्ध मठ जाकर बुद्ध की मूर्ति को स्वच्छ पानी से धोते हैं और फिर एक-दूसरे पर पानी छिड़क कर आशीर्वाद देते-लेते हैं।
इस पर्व पर ड्रैगन नोका प्रतियोगिता होती है और पटाखे भी छोड़े जाते हैं। उत्सव के दिन मेला, खेल और संगीत व नृत्य समारोह भी होता है। इस दिन की प्रमुख गतिविधि पानी छिड़कना होती है, हालांकि इसमें लोगों को भारत की तरह रंग से रंगा नहीं जाता, पर खुशी का माहौल वैसा ही होता है।
अंत में कोआथ रोहतास, बिहार के किशोर कुमार केशरी का पत्र देखें। उन्होंने पूछा है कि चीन में विकलांग दिवस कब और किस दिन मनाया जाता है।
दोस्तो, चीन के विकलांग प्रतिभूति कानून की धारा 48 में हर वर्ष के मई माह के तीसरे रविवार को विकलांग दिवस मनाना निर्धारित हुआ है। वर्ष 1990 में चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा के अधिवेशन में यह कानून पारित हुआ और 15 मई, 1991 से कारगर है। तब से अब तक मनाये गये विकलांग दिवसों के विषयों में चीन में विकलांग प्रतिभूति कानून का प्रचार, विकलांगों को सहायता का विस्तार, सुदूर पूर्व एवं दक्षिण-प्रशांत क्षेत्र का विशेष विकलांग खेल समारोह, विकलांगों के रोगों की रोकथाम और उनमें स्वास्थ्य का प्रचार, विकलांगों की निर्धनता का उन्मूलन शामिल रहे। विकलांग दिवस ने विकलांगों को तरह-तरह की सेवाएं और सुविधाएं दीं।
गत वर्ष विकलांग दिवस 16 मई को मनाया गया। यह चीन का चौदहवां विकलांग दिवस था। इस दिन पेइचिंग में चीनी दूरसंचार कम्पनी ने चीनी विकलांग कल्याण कोष को चंदे के रूप में 100 कम्यूटर प्रदान किये। अन्य अनेक कंपनियों व लोगों ने भी विकलांगों को चंदे के रूप में धन और सामग्री प्रदान की। पेइचिंग के विभिन्न तबकों ने विकलांगों के लिए तरह-तरह की सुविधाएं जुटाईं।

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