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दक्षिण पूर्वी चीन के ज च्यांग प्रांत के ई वू शहर में एक प्रयोगशाला प्राइम्री स्कूल होती है, जो ज च्यांग प्रांत में बहुत मशहूर है। इस स्कूल की स्थापना वर्ष 1912 में हुई थी। 92 वर्षों के विकास के बाद अब यह स्कूल ज च्यांग प्रांत की सभ्यता इकाई, मॉडल प्राइम्री स्कूल, ज च्यांग प्रांत की सौ मशहूर प्राइम्री स्कूलों में शामिल की गयी है। इतना ही नहीं, यह ज च्यांग प्रांत की एकमात्र ऐसी प्राइम्री स्कूल भी है, जिस में विदेशी छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। हाल में हमारी संवाददाता ने ई वू प्रयोगशासा प्राइम्री स्कूल का दौरा किया।
इस स्कूल की अध्यापिका सुश्री चिन की नजर में ई वू प्रयोगशासा प्राइम्री स्कूल एक बहुत सुन्दर स्कूल है। उन के अनुसार, ई वू नदी के किनारे स्थित इस स्कूल में ऊंची ऊंची शिक्षा इमारतें खड़ी हैं, चौड़ा चौड़ा आधुनिक प्रयोगशालाएं व चौक होती हैं। इस स्कूल के छात्र-छात्राएं अंग्रेज़ी, कंप्यूटर, फिंग फांग ब़ॉल एवं शतरंज आदि सीख सकते हैं। स्कूल न केवल उन की पढ़ाई पर बड़ा ध्यान देती है, बल्कि छात्र-छात्राओं की सर्वोगीण विकास को भी बड़ा महत्व देती है।
ई वू की स्थानीय सरकार ने इस स्कूल के नये कम्पस के निर्माण में भारी सहायता दी है। सरकार ने कुल 5 करोड़ 50 लाख चीनी व्यान की पूंजी लगाकर स्कूल के लिए नये कम्पस का निर्माण पूरा किया। अब ई वू प्रयोगशाला प्राइम्री स्कूल का कुल क्षेत्रफल पहले के 1 हेक्टर से विस्तृत होकर अब के 10.4 हेक्टर तक पहुंचा है। स्कूल में कक्षाएं भी पहले की 28 से आज की 55 बढ़ गयी। अध्यापक-अध्यापिकाओं तथा छात्र- छात्राओं की संख्या तो पहले के 1700 से 2700 तक बढ़ गयी है। यहां आधुनिक उपकरण मौजूद हैं। चीनी लोग इसे शिक्षा जगत के मिसाइल माना है। इस स्कूल में दाखिला करना बहुत कठिन है, यहां तक कि कुछ लोगों ने यह कहा कि अपने बच्चों को प्रयोगशाला प्राइम्री स्कूल में भेजना तो विश्विद्दालय में प्रवेश करने से भी ज्यादा कठिन है। ई वू शहर के महा सचिव थोंग श्यांग दी ने स्कूल का निरीक्षण दौरा करते समय यह बताया कि इधर के वर्षों में चाहे आधुनिक उपकरणों के निर्माण में या सुयोग्य व्यक्तियों के प्रशिक्षण में ई वू प्रयोगशासा प्राइम्री स्कूल को नयी उपलब्धियां प्राप्त हुई हैं। स्कूल में एकता व सुखमैय का माहौल भरा है।
प्राइम्री स्कूल के विभिन्न क्षेत्रों में प्रथम स्तर पर होने की वजह से यह स्कूल न केवल चीनी बच्चे इस स्कूल में पढ़ना चाहते हैं, इस स्कूल ने अनेक विदेशी बच्च्यों को भी आकृषित किया है। वर्ष 2001 में इस स्कूल ने विदेशी बच्च्यों को दाखिला करना शुरु किया। यह ज च्यांग प्रांत में प्रथम ऐसी प्राइम्री स्कूल बन गयी , जो विदेशी छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। प्राइम्री स्कूल के मास्टर श्री चिन ज होंग ने परिचय देते हुए बताया, जापान और अमरीका आदि देशों की प्राइम्री स्कूलों के साथ हमारी स्कूल के सहयोग व संपर्क होते हैं। अब हमारी स्कूल के विदेशी छात्र-छात्राएं मुख्य रुप से दक्षिण कोरिया, औस्ट्रेलिया, इंटोनेशिया, अफ़गानिस्तान, माली, पाकिस्तान, थाईलैंड आदि देशों से आते हैं। कुछ लोगों ने हमारी स्कूल को एक छोटा सा संयुक्त राष्ट्र संघ बुलाते हैं। आम तौर पर उन के मां-बाप ई वू में व्यापार करते हैं।
स्कूल में हमारी मुलाकात एक छोटा लड़के से हुई।
संवाददाता -- नमस्ते। तुम्हारा नाम क्या है।
लड़का -- मेरा नाम खा बाओ बाओ है।
संवाददाता -- इतनी उम्र में है।
लड़का -- नौ।
संवाददाता -- किस देश से आया है।
लड़का -- माली।
संवाददाता -- चीन को कैसा लगा।
लड़का -- बहुंच अच्छा।
हमारी संवाददाता के साथ बातचीत में छोटा खा बौ बौ ने हमें बताया कि उन के मां बाप ई वू में जूता व कपड़े का व्यापार करते हैं। उसे चीन को बहुत पसंद है। यहां का जीवन स्थिर व सुखमैय है। ई वू प्राइम्री स्कूल में पढ़ने व रहने के बाद अब उस के पास अनेक चीनी मित्र भी होते हैं। चुंकि उसे व्यायाम को बहुत पसंद है और बास्केटबॉल , फुटबाल एवं दौड़ने में उसे अच्छा क्षमता है, इसलिए,अब वह स्कूल का छोटा खेल कूद स्टार बन गया और अपनी सहपाठियों का विशेष प्यार मिलता है।
सुश्री वू श्याओ लिन खा बौ बौ की अध्यापिका हैं। उन की नज़र में खा बौ बौ एक बहुत खुशी लड़का है, जो सीधे रुप से अपना विचार व भावना प्रकट सकते हैं। यह आम चीनी बच्चों से अलग होता है। उन के अनुसार, भाषा व संस्कृति में चीनी बच्चों व विदेशी बच्चयों के बीच भारी विभिन्नताएं मौजूद हैं। यदि खा बौ बौ को खुशी लगा, तो वह ऊंची आवाज़ में मुझे बताएगा कि वह खुश है। जबकि चीनी बच्चे ऐसा नहीं करेंगे। मुझे लगा कि चीनी बच्चों व विदेशी बच्चों के साथ पढ़ने की बहुत श्रेष्ठताएं हैं। वे लोग एक दूसरे से सीख सकते हैं। खा बौ बौ से प्रभावित होकर चीनी छात्र और लजीलापन बन गये हैं, जबकि चीनी छात्रों से खा बौ बौ ने चीनी भाषा सीखी । स्कूल में रहने के कारण खा बौ बौ ने अन्य चीनी छात्रों की ही तरह अपनी स्वतंत्रता व प्रबंध की क्षमता का प्रशिक्षण किया। अब खा बौ बौ एवं अपने सहपाठियों के साथ घनिष्ट मैत्री स्थापित हुई है।
अब ई वू प्रयोगशाला प्राइम्री स्कूल की हर एक कक्षा में एक से तीन विदेशी छात्र-छात्राएं होती हैं। इन छात्र-छात्राओं को पढ़ाने में अध्यापक-अध्यापिकाओं को और बड़ी महनती से काम करना है। अध्यापिका चिन की कक्षा में अफगानिस्तान से आया एक लड़का है, जिस का नाम ना जी बा है। दो वर्षों से पहले जब वह हमारी स्कूल में प्रवेश आया , तो उसे एक ही चीनी शब्द भी नहीं आता था। उस के साथ कैसा बातचीत करना अध्यापिका चिन के सामने आयी एक समस्या थी। उन्होंने बताया, पहले उस के पास प्रतिरोध की भावना बहुत दृढ़ है। वह सब कुछ नहीं करना चाहता, केवल भागना चाहता। कैसे उस के साथ विचारों का आदान प्रदान करना बहुत मुश्किल बात बन गयी है। चीन में एक कहावत है , यानी मनुष्य शुरु से ही अच्छा है और नरम दिल होता है। इसलिए, मैं ने पढ़ाई और दैनिक जीवन में उस की विशेष देखभाल की।धीरे धीरे उसे मालूम लिया कि मैं एक अच्छी अध्यापिका है और उस के लिए विश्वसनीय है, तो उस ने भी मेरे साथ बातचीत करनी शुरु की। अब दो वर्ष गुजर गये, ना जी बा भी अच्छी तरह चीनी बोल सकता है और उस के अनेक चीनी मित्र भी होते हैं।
अध्यापिका चिन और वू की तरह ई वू प्रयोगशाला स्कूल के अनेक श्रेष्ठ अध्यापक अध्यापिकाओं के प्रयासों व महनती से स्कूल का तेज़ विकास हुआ। स्कूल अपने अध्यापक-अध्यापिकाओं के प्रशिक्षण को भी बहुत महत्व देती है। अब इस स्कूल में दो विशेष स्तरीय अध्यापक-अध्यापिकाएं, 14 प्रांत स्तरीय श्रेष्ठ अध्यापक-अध्यापिकाएं और 30 से ज्यादा शहर स्तरीय श्रेष्ठ अध्यापक-अध्यापिकाएं होते हैं। अध्यापक-अध्यापिकाओं द्वारा प्रकाशित किये गए लेकों व पुस्तकें अनगिनी हैं। यहां के अध्यापक-अध्यापिकाएं न केवल अच्छी तरह पढ़ा सकते हैं, बल्कि हर एक के पास भिन्न भिन्न विशेषताएं व क्षमताएं होती हैं। प्रयोगशाला प्राइम्री स्कूल में पढ़ाने वाले अध्यापक-अध्यापिकाओं को अपने को बहुत गौरव लगता है ।यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं भी बहुत ही सुख में हैं। अमरीकी पेंडा टी वी स्टेशन के निदेशक , अमरीकी केलिफॉनर के सेंटनीविर शहर के मेयर ने स्कूल के निरीक्षण के बाद कहा , इतनी सुन्दर व अच्छी गुणवत्ता वाली प्राइम्री स्कूल अमरीका में भी बहुत कम मिलता है।
अब ई वू प्रयोगशाला प्राइम्री स्कूल के सुन्दर कम्पस , श्रेष्ठ अध्यापक-अध्यापिकाओं का दल और ऊंची शिक्षा गुणवत्ता ने समाज के विभिन्न तबकों की नज़र खींची है। इधर के वर्षों में देश की विभिन्न प्रतियोगिताओं में इस स्कूल को अनगिनत पुरस्कार मिले हैं। केवल वर्ष 2002 में ही 82 अध्यापकों व छात्रों को शहर स्तरीय मेचों में प्रथम स्तर के इनाम मिले हैं।
स्कूल के सतत विकास के लिए, शिक्षा गुणवत्ता को उन्नत करने के साथ साथ वैज्ञानिक प्रबंध भी बहुत जरुरी है। प्रबंध का कोल सेवा ही है। इसलिए, इस स्कूल के हर एक कर्मचारी छात्रों को पढ़ाना और सेवा करना अपना सब से महत्वपूर्ण काम समझता है।
यहां काम करते हुए मुझे बहुत संतुष्ट है। मैं केवल यह आशा करती हूं कि मैं अपने कोशिशों से पढ़ाई को अच्छी तरह अंजाम दूंगी और मेरे छात्रों की सेवा करूंगी। यह अध्यापिका वू ने हमारी संवाददाता से कही है।
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