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(GMT+08:00) 2005-06-24 08:43:59    
ईर्बुल कान और उस का नामी मटर

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सिन्चांग वेवूर स्वायत्त प्रदेश में ताबांछङ नाम का एक छोटा कस्बा , जो प्राचीन रेशम माग पर स्थित है , आज से 60 साल पहले ताबांछङ की लड़की नामक एक वेवूर गीत के चलते देश भर मशहूर हो गया । इस गीत से यह सर्वविदित हो गया है कि ताबांछङ कस्बे में सुन्दर लकड़ियां प्यारी प्यारी होती हैं । इधर के सालों में इस नामी कस्बे की किसान ईर्बुल कान भी ताबांछङ की लड़की से मशहूर हो रहा है , तो आप को दिलचस्पी हुई होगी कि किसान और ताबाछुङ की लड़की में क्या रहस्य है , जिस से वह मशहूर हो गया ।

ताबांछङ सिन्चांग वेवूर स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ऊरूमुची से 40 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटा कस्बा है । कस्बे में मुख्य सड़क के पास मटर दुकान है , जिस का नाम ताबांछङ की लड़की । दुकानदार श्री ईर्बुल कान रोज व्यापार में व्यस्त रहता है और दुकान में भूना , तला और नमकीन देसक किस्मों के मटर बिकते हैं । दुकान का नाम ताबांछङ की लड़की है , सो दुकान में भी रोज इसी नाम का वेवूर गीत बज कर सुनाई देता है ।

मटर ताबांछङ क्षेत्र का एक विशेष कृषि उत्पाद है , खास बेहतर जलवायु और माटी के कारण ताबांछङ में उत्पादित मटर आकार में बड़ा और गोला होता है तथा स्वाद में बहुत मजा आता है । ताबांछङ मटर उम्दा गुणवत्ता से दूर नजदीत मशहूर है । ताबांछङ के निवासी श्री ईर्बुल कान का परिवार पीढ़ियों से मटर की खेती करता और बेचता आया है । ईर्बुल कान की माता अपने समय में सड़क के किनारे एक स्टॉल रख कर पक्का भूना मटर बेचती थी , उस जमाने में कस्बे में जगह जगह मटर के स्टॉल थे । मटर , लो , स्वादिष्ट मटर की आवाज हवा में गूंजती सुनाई देती थी ।

वेवूर लोग व्यापार को अपना पसंदीदा व्यवसाय समझते हैं , श्री ईर्बुल कान भी इस के आपवाद नहीं है । युवावस्था में वह रोज सड़क के किनारे स्टाल लगा कर मटर बेचता था । ताबांछङ में अकसर तेज हवा चलती है , चीन का सब से बड़ा वायु ऊर्जा से संचालित बिजली घर यही पर है । हवा के मौसम में सड़क के किनारे स्टाल लगने में बहुत सी परेशानी झेलती थी ।

देश के आर्थिक विकास के साथ साथ ताबांछङ कस्बे का भी अच्छा विकास हुआ । स्थानीय सरकार ने वाणिज्य व्यापार बढाने के लिए कस्बे में एक सुविधापूर्ण बजार निमिर्त किया , जिस में दुकानें लगती हैं और खरीदार विक्रेता भी हवा की परेशानी से बच सकते हैं । श्री ईर्बुल कान ने बाजार में अपनी दुकान खोली और व्यापार में होशियार होने के परिणामस्वरूप उन का व्यापार भी फला फुला हो गया । आज से छै साल पहले ऊरूमुची में एक अन्तरराष्ट्रीय वायापार मेला लगा ,जिस से अनुभव पा कर श्री ईर्बुल कान ने एक अच्छा तरकीब सोचा , इस की चर्चा करते हुए वे कहते हैः

मेले में मैं ने पाया कि केवल हमारे ताबांछङ के मटर का कोई भी ब्रांड नहीं था, वहां अन्य सभी चीजों के अपना अपना ब्रांड थे , इस से सीख कर मैं ने अपने मटर के लिए श्वेशान अर्थात बर्फिला पर्वत नाम का ट्रेडमार्क पंजीकृत कराया ।

मेले से लौटने के बाद ईर्बुल कान ने ताबांछङ में एक मटर प्रोसेसिंग वर्कशाप स्थापित किया और ऊरूमुची में एक विशेष मटर दुकान खोली , जिस में श्वेशान ब्रांड का मटर बिकता था । लेकिन ईर्बुल की कल्पना से विपरित श्वेशान ब्रांड नामी नहीं हो पाया । अपनी पहली कोशिश की विफलता के विश्लेषण से ईर्बुल कान को लगा कि विफलता के दो कारण है , एक है मटर प्रोसेसिंग का तकनीकी स्तर ऊंचा नहीं है और दूसरा ब्रांड आकर्षक नहीं है ।

पहले , ईर्बुल कान मटर के प्रोसेंसिंग के तकनीकी स्तर उन्नत करने की कोशिश की , उन्हों ने प्रसिद्ध तकनीशियनों से मटर प्रोसेसिंग की विभिन्न आधुनिक तकनीकें सीखीं और अपने वर्कशाप का तकनीकी नवनीकरण किया । इस में कामयाबी हासिल होने के बाद वह अपने उत्पादों के लिए बेहतर ट्रेडमार्क सोचने लेगे ।

एक दिन , जब ईबुल कान अपने उत्पादन काम में व्यस्त हो रहे थे, अचानक नजदीक से ताबांछङ की लड़की नाम का गीत सुनाई देने लगा , इस देश भर में मशहूर गीत सुनते सुनते ईर्बुल कान के दिमाग में यह विचार धौंकाः कहीं अच्छा है कि इस गीत के नाम से अपने मटर के लिए ब्रांड पंजीकृत कराऊं ।

दरअसल ताबांछङ की लड़की नाम का यह वेवूर गीत चीन के सुप्रसिद्ध लोक संगीतकार श्री वांग लोपिन द्वारा 60 साल पहले स्थानीय लोक गीत का रूपांतर कर बनाया गया था , इस गीत के मंच पर प्रस्तुत होने के बाद जल्द ही देश भर में व्यापक रूप से पसंद किया गया है , जो आज भी विभिन्न मौकों पर गाया जाता है । ताबांछङ के निवासी श्री ईर्बुल कान को भी यह गीत बहुत पसंद है । इसलिए उन्हों ने अपने मटर का ट्रेड मार्क ताबांछङ की लड़की से पंजीकृत कराया । वर्ष 2001 के सितम्बर माह में ऊरूमुची में पुनः अन्तरराष्ट्रीय व्यापार मेला लगा । ईर्बुल कान ने ताबांछङ की लड़की ट्रेडमार्क के मटर उत्पाद ला कर दिखाया ।

इस बार मेले में ईबुल कान ने जो ताबांछङ की लड़की ब्रांडेड मटर लाए , वह हाथों हाथ बिक चुका । कुछ विदेशी व्यापारियों ने ईर्बुल कान के साथ मटर खरीद के अनुबंध भी किये , बहुत से व्यापारियों का कहना है कि ताबांछङ की लड़की वाला ब्रांड बहुत अच्छा और आकर्षक लगता है । मटर को लड़की के नाम से जोड़ कर बड़ा मजा भी आता है । देखते ही देखते ईर्बुल कान का ताबांछह की लड़की वाले मटर ने ऊरूमुची शह के विभन्न सुपर मार्केटों में अपना स्थान बनाया और इस का ब्रांड भी जगह जगह नामी हो गया ।

श्री ईर्बुल कान कामयाब हुआ और मालामाल भी हो गया । लेकिन उन की अपनी योजना हैः

वे कह रहे है कि मेरा व्यापार विकसित होता जा रहा है , लेकिन मेरा वर्कशाप व्यापारियों की मांग पूरा करने में सक्षम नहीं सिद्ध हुआ , इस समस्या को दूर करने केलिए उन्हों ने उच्च स्तर के मटर उत्पादों के प्रोसेसिंग के लिए किसानों के साथ अनुबंध भी संपन्न किए , वे अपने मटरों का आरंभिक प्रोसेसिंग करते हैं , इस के बाद ईर्बुल कान उन्हें खरीद कर अपने वर्कशाप में उन का आगे का प्रोसेंसिंग करता है ,जिस से उत्पादों की मात्रा और क्वालिटी दोनों उन्नत हो गई है ।

श्री ईर्बुल कान को जानने वाले लोगों का कहना है कि उन का मटर उत्पादन और व्यापार इतना अच्छा होने का एक कारण यह भी है कि वे अपने सौदा में हमेशा ईमानदार होता है । ईमानदारी का सुचरित्र उन्हें पारिवारिक शिक्षा से नसीब हुआ है । पड़ोसियों की याद है कि ईर्बुल कान की बालावस्था में उस के पिता जी एक बार घोड़ा गाड़ी हांकते किसी काम के लिए बाहर गया , उन्हों ने रास्ते में एक हजार युन्न का बटुआ पड़ा पाया , उस समय एक हजार युन्न का मूल्य अत्यन्त बड़ा था , लेकिन उस के पिता जी ने बिना हिचकी से उस के मालिक को वापस लौट कर अपना निस्वार्थ चरित्र दिखाया ।

अपनी पत्नी अईसगुल की नजर में ईर्बुल कान की ईमानदारी के अलावा अपने व्यापार का निरंतर विकास करने की भावना भी गर्व की बात है । वह कहती हैः

ईर्बुल कान एक बहुत दक्ष और कार्यकुशल व्यक्ति हैं , हमारी कंपनी के ताबांछङ की लड़की ब्रांडेड मटर की सफलता बमुश्किल से हासिल हुई है , आगे हम अपने उत्पादन व व्यापार को विकसित करेंगे और अच्छे से अच्छा मटर बनाएंगे ।

अब ईर्बुल कान का कारखाना ताबांछङ कस्बे में 5 हजार वर्ग मीटर का क्षेत्रफल घेरता है , जिस का वाषिक मटर उत्पादन दो हजार टन है । ईर्बुल कान की भांति ताबांछङ के अन्य निवासी और किसान भी अपने मटर उत्पादन से समृद्ध हो गए हैं , वे अपनी मेहनत से अपनी जन्म भूमि को सुन्दर बनाने की कोशिश करते है . कस्बे के 63 वर्षीय वेवूर बुजुर्ग श्री जुनूर ने कहाः

हमारे ताबांछङ का भारी परिवर्तन हुआ है , पहले के मिट्टी के आवासी मकानों की जगह अब खपरेलों व ईंटों के मकानों ने ले लिया , खाने पहनने का सवाल तो छोड़ो , यहां अनेकों घरों के पास अपनी कार और मोटर गाड़ी भी हो गई है । मुझे लगा है कि अब हम स्वर्ग लोक में रहते हैं ।